युवराज मेहता की मौत प्रशासन की लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है. नोएडा के सेक्टर 150 में खुले गंदे पानी के गड्ढे में डूबने की वजह से युवराज की जान चल गई. उनकी मौत नोएडा की नागरिक व्यवस्था की बदहाली दिखाती है जिसे यहां के निवासी सालों से झेलते आ रहे हैं.
इंडिया टुडे ने पाया कि 'स्मार्ट सिटी' में कई रिहायशी सोसाइटियों के आसपास ऐसे सैकड़ों खुले पानी के गड्ढे हैं, जो सैटेलाइट तस्वीरों में आसानी से दिखाई देते हैं. सेंटिनल सैटेलाइट से मिली तस्वीरों का विश्लेषण करने के बाद 2019 और 2025 के शुष्क शीतकालीन मौसम के डेटा की तुलना करके नए बने जल निकायों का मानचित्रण किया गया.
भू-स्थानिक विश्लेषण से पता चला कि नोएडा में खुले पानी के कई गड्ढे मौजूद हैं. बढ़ती जनसंख्या और शहरी विस्तार की वजह से पिछले एक दशक में नोएडा का निर्मित क्षेत्र लगभग दोगुना हो गया है. इंडिया टुडे की ओएसआईएनटी टीम के विश्लेषण के मुताबिक ये 2019 में लगभग 334 वर्ग किलोमीटर था जो 2025 में बढ़कर 559 वर्ग किलोमीटर हो गया है. यह विश्लेषण सेंटिनल-2 सैटेलाइट से मिले डेटा पर आधारित है.
जब नोएडा में आबादी कम थी, तब ये क्षेत्र खुले मैदान और खेती की जमीन थी. लेकिन जल के अनियोजित मोड़ और खराब नागरिक नियोजन की वजह से ये खुली नालियों में बदल गईं. इन्हीं में एक नाली वो भी है, जिसमें गिरकर युवराज की मौत हो गई.
सैटेलाइट फोटोज में साफ दिखाई देता है कि साल 2021 में उस स्थान पर निर्माण कार्य चल रहा था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक मॉल के तहखाने के लिए उस क्षेत्र की खुदाई की गई थी. लेकिन 2022 से उस जगह पानी भर चुका था. सेक्टर 98 की ऑप्टिकल तस्वीरों से पता चलता है कि गौशाला बनने के कुछ महीनों बाद ही खुला मैदान पानी से भरी खाई में बदल गया है. फुटबॉल मैदान भी पानी से लबालब भर गया.
आवासीय विकास बढ़ना भी बना वजह
नोएडा के सेक्टर 134 में एक आवासीय सोसायटी के पास एक इलाके में जब कम घर थे, तब आसपास के खेतों में पानी कम जमा होता था. लेकिन जैसे-जैसे आवासीय विकास बढ़ा, गंदा पानी और अपवाह निचले खुले मैदान में जमा होने लगा और ये भी पानी से भरी खाई में बदल गया.
नोएडा का शहरी प्रशासन खामियों से भरा है, जो भ्रष्टाचार और गैर-जिम्मेदारी की वजह से नाकाम साबित हुआ है. इन सबसे एक बात साफ होती है कि जब युवराज मेहता जैसे मामले सामने आते हैं, तो तबादले, निलंबन और जांच तो होती है, लेकिन मूल ढांचा वैसे का वैसा ही रहता है.