ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में 16-17 जनवरी की रात हुए हादसे में डूबकर जान गंवाने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार को एनडीआरएफ की टीम ने निर्माणाधीन साइट में भरे पानी से बरामद कर लिया.
इससे पहले इस मामले में मुख्य आरोपी बिल्डर अभय कुमार को मंगलवार को हरियाणा के पलवल से गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने उसकी लोकेशन ट्रेस करने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया. आरोपी पहले मध्य प्रदेश के दतिया भी गया था. पुलिस बिल्डर की कंपनी के अन्य डेरेक्टरों की भूमिका की जांच करेगी.
कोर्ट ने अभय कुमार को 1 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है. पुलिस ने बताया कि जांच अभी जारी है और आगे की कार्रवाई में आरोपी की भूमिका के आधार पर कदम उठाए जाएंगे.
नोएडा प्राधिकरण में हुई अहम बैठक के बाद एसआईटी ने मामले की जांच तेज कर दी है. बैठक समाप्त होते ही टीम तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हो गई. एडीजी भानु भास्कर ने बताया कि अब तक संबंधित अधिकारियों से पूछताछ पूरी हो चुकी है और मृतक के परिजनों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे.
अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी हो सकती है कार्रवाई
भानु भास्कर ने कहा कि सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी. फिलहाल टीम स्थल का निरीक्षण कर रही है और जांच में अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना भी बनी हुई है. एसआईटी यह भी पता लगा रही है कि युवराज को दो घंटे तक मदद क्यों नहीं मिल पाई.
युवराज की मौत ने नोएडा अथॉरिटी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. परिजन और स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि यदि सुरक्षा इंतज़ाम सही होते तो यह हादसा रोका जा सकता था.
दो घंटे तक संघर्ष करती रही जिंदगी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवराज दो घंटे तक डूबती कार में फंसा रहा. जब सरकारी तंत्र से कोई गोताखोर पानी में नहीं उतरा, तब एक स्थानीय व्यक्ति ने अपनी कमर में रस्सी बांधकर करीब 50 मीटर तक पानी के अंदर जाने की कोशिश की. लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी.