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हिंदू दोस्त के मिलने पर हॉस्टल से मुस्लिम छात्र को निकाला, अब स्कूल ने दी सफाई, आरोप किए खारिज

मुजफ्फरनगर जनपद के बेसिक शिक्षा अधिकारी शुभम शुक्ला ने इसकी जांच के लिए आदेश दिए हैं और खंड शिक्षा अधिकारी खतौली को जांच करने के लिए आदेशित किया गया है. उन्होंने विद्यालय को नोटिस जारी कर दिया है.

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स्कूल के प्रधानाचार्य और आरोप लगाने वाला छात्र
स्कूल के प्रधानाचार्य और आरोप लगाने वाला छात्र

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक स्कूल से मुस्लिम छात्र के निष्कासन का मामला सामने आया है और इसकी कथित वजह सुनकर लोग हैरान भी हैं. दरअसल रतनपुरी थाना क्षेत्र के सठेडी गांव निवासी मुनव्वर नाम का एक छात्र पास ही के फूलत गांव में स्थित विजन इंटरनेशनल एकेडमी में कक्षा 8वीं का छात्र है जो स्कूल में ही बने छात्रावास में रहता था. 

मनव्वर नाम के इस छात्र ने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर अपनी एक वीडियो वायरल कर स्कूल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया था.  मुनव्वर ने कहा था कि संदीप नाम का उसका एक दोस्त उससे मिलने के लिए छात्रावास में आया था और जब इसकी जानकारी स्कूल प्रबंधन को हुई तो उन्होंने यह कहकर उसे स्कूल से निकाल दिया कि गैर मुस्लिम तुम्हारे दोस्त कैसे हो सकते हैं.

पुलिस और शिक्षा विभाग ने बैठाई जांच
जैसे ही वीडियो वायरल हुआ तो जिला शिक्षा और पुलिस विभाग भी हरकत में आया और तुरंत स्कूल में पहुंचकर अपनी जांच पड़ताल शुरू कर दी तो. वहीं जनपद के शिक्षा विभाग द्वारा भी इसकी जांच खतौली खंड शिक्षा अधिकारी को दे दी गई और साथ ही स्कूल प्रबंधन को एक नोटिस भी जारी किया गया. इस नोटिस के जरिए स्कूल प्रबंधन से शिक्षा विभाग द्वारा इस पूरे मामले की जानकारी मांगी गई है. अब इस मामले में स्कूल प्रबंधन का भी पक्ष सामने आया है. प्रबंधन के मुताबिक, छात्र की लगातार शिकायतें मिल रही थी कि वह बाहरी लड़कों को स्कूल में बुलाता है जो कि नियम के विरुद्ध है.

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स्कूल के प्रधानाचार्य की सफाई
इस मामले में जहां स्कूल के प्रिंसिपल अब्दुल अजीम वाहिद दुर्रानी ने सफाई देते हुए कहा, 'हमारे स्कूल में मदरसे के वह बच्चे जो हाफिज (पूरी कुरान शरीफ याद कर लेते हैं ) होते हैं, उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने के लिए पढ़ाया जाता है. हमारी सरकार में मोदी जी भी यही कहते हैं कि है कि मदरसों के बच्चों के एक हाथ में कुरान दूसरे हाथ में कंप्यूटर होना चाहिए. मदरसे के बच्चे गरीब परिवार से भी होते हैं तो उनके लिए हम काफी रियायत देते हैं.'

मुनव्वर का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया, 'इस बच्चे का एडमिशन तकरीबन 2 महीने पहले हुआ होगा. हमारी एक टीचर है, वह रिक्वेस्ट लेकर आई थी यह बच्चा काफी गरीब-यतीम है उसके वालिद साहब नहीं है और आप इन्हे एडमिशन दे दीजिए. उस बच्चे को उसके भाई साहब के सामने कहा कि बेटा कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए और आप यहां पढे आपको हम यहां पढ़ाएंगे. जब वह जुड़ा तो टीचर्स के पास उसकी दो-तीन शिकायत आई औऱ उसे समझाया. हमारे जो रूल्स रेगुलेशन है वह ऐसे है कि मां और बाप या अन्य गार्जियन ही स्कूल में आने चाहिए. अगर इससे हटकर कोई आता है तो उसे लिखकर भेजना पड़ता है कि फलां आदमी आ रहा है मेरे बच्चे से मिलने के लिए इसे इजाजत दे दीजिए. यह रूल हर एक को एडमिशन देने से पहले बताया जाता है. 

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प्रधानाचार्य के आरोप
उन्होंने बताया, 'मुनव्वर से मिलने दो लोग आए और रजिस्टर में इन्होंने अपना नाम राज या राजू लिखा और बच्चों के कमरे में चले गए. बच्चों के कमरे में मां-बाप को जाने की भी इजाजत नहीं है और मां-बाप से भी मिलने के लिए दो विजिटर रूम हैं जिसमें एक अकेडमी ब्लॉक में है और दूसरा हॉस्टल ब्लॉक में है. यह सीधे सेकंड फ्लोर पर बच्चों के कमरे में चले गए और तकरीबन घंटा भर बच्चों से बात की.स्कूल के कानून कायदों के हिसाब से बच्चों को मोबाइल का इस्तेमाल करने नहीं देते हैं लेकिनबच्चे अपने गार्जियन से हर हफ्ते में गुरुवार और शुक्रवार को लैंडलाइन से बात कर सकते हैं.'

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उन्होंने कहा कि मुनव्वर हॉस्टल में आए साथी के साथ मोबाइल पर भी बात करता रहा है और दूसरे बच्चों को भी बात करने के लिए मोबाइल दिया. ऐसा लग रहा था कि जो बाहर से आया है उसने शराब भी पी रखी थी.. ऐसा नहीं है कि हम किसी को मिलने नहीं देते किसी राजू, संदीप, राजीव जो भी उसका नाम होगा और हमारे पास तो सब आते हैं . हमारे स्टाफ में खुद हिंदू स्टाफ भी है.

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मुनव्वर ने लगाए थे ये आरोप
वहीं छात्र मनव्वर द्वारा जो अपनी वीडियो वायरल की गई है उसमें उसने आरोप लगाते हुए कहा, 'मैंने मुफ्ती साहब को बताया कि वह मेरा दोस्त व मेरा भाई है तो कहने लगे क्या नाम है इन भाई का. तो मैंने कहा संदीप. इस पर वह कहने लगे कि यह गैर मुस्लिम आपके दोस्त कैसे हो सकते हैं आपके भाई कैसे हो सकते हैं और क्या यह आपके साथ कुर्बानी में हिस्सा लेते हैं?  इस तरह की उन्होंने बात कही और मुझे भगा दिया.'

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