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मथुरा: गोदाम की आड़ में चल रहा था बूचड़खाना, गोवध के आरोप में चार गिरफ्तार

मथुरा के थाना हाइवे क्षेत्र में पुलिस ने कबाड़ के गोदाम की आड़ में चल रहे अवैध बूचड़खाने का पर्दाफाश किया है. कार्रवाई के दौरान चार पुरुष और एक महिला को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने मौके से संदिग्ध मांस और चार छुरे बरामद किए हैं. मांस को जांच के लिए भेजा गया है. आरोपियों के खिलाफ गोवध और पशु क्रूरता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है.

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चार आरोपी गिरफ्तार (Photo: Screengrab)
चार आरोपी गिरफ्तार (Photo: Screengrab)

उत्तर प्रदेश के मथुरा में पुलिस ने अवैध तरीके से बीफ बेचने के आरोप में चार पुरुष और एक महिला को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि ये लोग कबाड़ के गोदाम की आड़ में अवैध रूप से जानवरों को काट कर उसका मांस बेच रहे थे. पुलिस ने मौके से जानवरों को काटने में इस्तेमाल किए जाने वाले चार छुरे भी बरामद किए हैं. मामला गोवध निवारण अधिनियम, पशु क्रूरता अधिनियम और बीएनएस की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है.

कबाड़ के गोदाम की आड़ में चल रहा था बूचड़खाना

पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई अजय नगर कॉलोनी में शुक्रवार रात की गई. स्थानीय लोगों ने सूचना दी थी कि इलाके में कबाड़ के गोदाम की आड़ में संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं. सूचना पर पुलिस टीम ने छापेमारी की, जहां बड़ी मात्रा में संदिग्ध मांस बरामद हुआ. मांस को जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वह किस पशु का है.

छापेमारी के दौरान पुलिस को एक गड्ढे में मृत पशुओं के अवशेष भी मिले, जिससे इलाके में आक्रोश फैल गया. लोगों ने मौके पर नारेबाजी भी की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. हालात को देखते हुए पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा.

संदिग्ध मांस और छुरे बरामद

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पुलिस ने इस मामले में इलियास, इस्लाम, फैजान, शाहरुख और एक महिला को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं और यह भी जांच की जा रही है कि इनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं है.

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस जैसी गंभीर धाराओं के बजाय गोवध अधिनियम की धारा 3/5/8, पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 11 और बीएनएस की धारा 325 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, कुछ आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी रहा है और पहले भी उनके खिलाफ विभिन्न मामलों में केस दर्ज हो चुके हैं. इस एंगल से भी जांच की जा रही है कि कहीं यह गतिविधि लंबे समय से संगठित तरीके से तो नहीं चल रही थी.

 

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