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जहां होती थी साइबर ठगी, वहीं क्राइम के खिलाफ उठी आवाज... ग्रामीणों ने पुलिस को सौंपे 68 मोबाइल

जहां कभी साइबर ठगी का जाल फैला था, उसी गांव से अब अपराध के खिलाफ आवाज उठ रही है. मथुरा के गोवर्धन थाना क्षेत्र के दौलतपुर गांव में ग्रामीणों ने पुलिस के साथ मिलकर साइबर अपराध पर करारा प्रहार किया है. साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किए जा रहे 68 मोबाइल फोन ग्रामीणों ने खुद आगे बढ़कर पुलिस को सौंप दिए.

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पुलिस के हवाले कर दिए मोबाइल. (Photo: Screengrab)
पुलिस के हवाले कर दिए मोबाइल. (Photo: Screengrab)

मथुरा के गोवर्धन थाना क्षेत्र के दौलतपुर गांव ने साइबर ठगी के खिलाफ एक मिसाल कायम की है. कभी साइबर ठगी के मामलों को लेकर बदनाम रहा यह गांव अब पुलिस के साथ मिलकर अपराध के खिलाफ खड़ा नजर आ रहा है. ग्रामीणों ने साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किए जा रहे 68 मोबाइल फोन पुलिस को सौंप दिए हैं.

दरअसल, कुछ दिन पहले गोवर्धन थाना पुलिस ने दौलतपुर गांव में जागरूकता बैठक की थी. इसमें पुलिस और ग्रामीणों के बीच साइबर अपराध को रोकने को लेकर चर्चा हुई. बैठक के दौरान गांव के 20 जिम्मेदार लोगों की एक समिति बनाई गई, जिसने यह आश्वासन दिया कि साइबर ठगी में प्रयुक्त किसी भी मोबाइल या उपकरण को पुलिस के हवाले किया जाएगा और फरार आरोपियों को सरेंडर करने के लिए कहा जाएगा.

इसी कड़ी में बुधवार को दौलतपुर गांव के लोगों ने 68 फोन पुलिस के हवाले कर दिए. ये सभी मोबाइल साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे थे. मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने मोबाइल को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. पुलिस का कहना है कि इन मोबाइलों की तकनीकी जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि किन-किन मामलों में इनका इस्तेमाल हुआ और इनके जरिए कितने लोगों को ठगा गया.

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सीओ गोवर्धन अनिल कुमार ने कहा कि गांव में आयोजित गोष्ठी के दौरान ग्रामवासियों ने पुलिस को पूरा सहयोग देने का वादा किया था. ग्रामीणों ने खुद आगे बढ़कर साइबर ठगी में प्रयुक्त मोबाइल पुलिस को सौंपे हैं, जो सकारात्मक संकेत है. सीओ ने यह भी कहा कि सभी मोबाइलों की जांच के बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी.

पुलिस के अनुसार, साइबर फ्रॉड के मामलों में फरार चल रहे वांछित आरोपियों से भी जल्द सरेंडर की उम्मीद है. ग्रामीणों के इस सहयोग से न केवल दौलतपुर गांव, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी साइबर अपराध पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी. 

गांव के लोगों का कहना है कि साइबर ठगी के कारण कई निर्दोष लोग आर्थिक नुकसान का शिकार हुए थे, जिससे गांव की छवि भी खराब हो रही थी. अब सभी ने मिलकर तय किया है कि भविष्य में किसी भी तरह के साइबर अपराध को पनपने नहीं दिया जाएगा.

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