काशी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर इन दिनों बड़े स्तर पर कायाकल्प का काम चल रहा है. इसी को लेकर तोड़फोड़, मूर्तियों के नुकसान और धार्मिक विरासत के विध्वंस के आरोपों ने सियासी घमासान खड़ा कर दिया है. सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल होने के बाद यह मुद्दा अचानक गरमा गया और सरकार पर मंदिर तोड़ने जैसे गंभीर आरोप लगाए जाने लगे.
सरकार का कहना है कि मणिकर्णिका घाट को विश्व स्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है. इसके लिए पहले चरण में 35 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. योजना के तहत एक बड़ा प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है, ताकि एक साथ कई अंतिम संस्कार सुचारु और सम्मानजनक ढंग से हो सकें. प्रशासन का दावा है कि यह काम आस्था को ध्यान में रखकर किया जा रहा है.
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मढ़ी तोड़ने से भड़का विवाद, वायरल हुई तस्वीरें
विवाद उस वक्त गहरा गया जब मणिकर्णिका कॉरिडोर के तहत एक मढ़ी यानी चबूतरे को हटाया गया. मढ़ी हटाने के दौरान वहां मौजूद पुरानी मूर्तियां नीचे गिर गईं. इसी दौरान ली गई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं, जिसके बाद आरोप लगने लगे कि काशी कॉरिडोर की तरह मणिकर्णिका कॉरिडोर के नाम पर भी मंदिरों और मूर्तियों का विध्वंस किया जा रहा है.
तस्वीरें सामने आते ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इसे सनातन और काशी की विरासत से जोड़ते हुए कहा कि सरकार बनारस का मूल स्वरूप नष्ट कर रही है. उनका आरोप था कि विकास के नाम पर आस्था पर चोट की जा रही है, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं.
मुख्यमंत्री योगी का निरीक्षण और सफाई
विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद मणिकर्णिका घाट पहुंचे और वहां बनाए गए प्रोजेक्ट साइट दफ्तर से दाह संस्कार स्थल का निरीक्षण किया. उन्होंने अधिकारियों से पूरी जानकारी ली और काम की प्रगति देखी. मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी मंदिर या मूर्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है.
योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें भ्रामक हैं और कुछ तस्वीरें तो एआई से बनाई गई हैं. उनके मुताबिक, मंदिर टूटने या मूर्तियों को नुकसान पहुंचने की बातें पूरी तरह अफवाह हैं. सरकार किसी भी हाल में काशी की आस्था और विरासत के साथ खिलवाड़ नहीं करेगी.
सरकार का दावा: मूर्तियां सुरक्षित, बाद में होंगी पुनर्स्थापित
सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी मंदिर का विध्वंस नहीं हुआ है. केवल एक मढ़ी हटाई गई है. मढ़ी हटाने के दौरान मूर्तियां जरूर गिरीं, लेकिन उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. गिरने वाली मूर्तियों को सुरक्षित कर पुरातत्व विभाग के कार्यालय में रखवा दिया गया है.
सरकार का कहना है कि मणिकर्णिका तीर्थ का विकास कार्य पूरा होने के बाद इन सभी मूर्तियों को फिर से उसी स्थान पर विधिवत तरीके से स्थापित किया जाएगा. प्रशासन के अनुसार, यह पूरा काम संरक्षण और पुनर्स्थापना की प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है.
कैसा है मणिकर्णिका घाट का मौजूदा स्वरूप
मणिकर्णिका तीर्थ स्थल काशी कॉरिडोर से सटा हुआ है. यहां मौजूद मसान मंदिर, तारकेश्वर मंदिर और रत्नेश्वर मंदिर पूरी तरह सुरक्षित हैं और अपने मूल स्वरूप में ही हैं. केवल मणिकर्णिका घाट की एक मढ़ी और कुछ पुराने स्ट्रक्चर हटाए गए हैं, ताकि नया प्लेटफॉर्म बनाया जा सके.
घाट के पंडे और पुरोहित इस कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि मढ़ी कोई मंदिर नहीं थी, लेकिन वहां मूर्तियां होने के कारण लोगों की आस्था उससे जुड़ी थी. वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनका मानना है कि विरासत को बिना बुलडोजर चलाए भी संजोया जा सकता था.
क्यों जरूरी है मणिकर्णिका तीर्थ का विकास
दरअसल, मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्थाएं लंबे समय से अव्यवस्थित रही हैं. विश्वनाथ चौधरी (डोम राजा), जिनकी ज्योति से मृतकों को मुखाग्नि दी जाती है, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया था कि काशी कॉरिडोर के बाद मणिकर्णिका तीर्थ का भी विकास होना चाहिए.
संकरी गलियों, लकड़ी की दुकानों, गंदगी और जगह की कमी के कारण अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों को भारी परेशानी होती है. बरसात के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जब गलियों और आसपास के घरों तक भस्म पहुंच जाती है. इन्हीं समस्याओं को देखते हुए 2023 में प्रधानमंत्री मोदी ने मणिकर्णिका तीर्थ विकास की नींव रखी थी.
कैसा बनेगा नया मणिकर्णिका तीर्थ
यह परियोजना रूप फाउंडेशन अपने एसआईआर फंड से बना रहा है. प्रोजेक्ट मैनेजर समीर के अनुसार, करीब 3000 स्क्वायर मीटर में नया मणिकर्णिका तीर्थ विकसित किया जा रहा है. पूरा प्लेटफॉर्म लगभग 39 हजार 350 स्क्वायर मीटर का होगा और चार चरणों में निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा.
परियोजना पूरी होने पर एक साथ 19 अंतिम संस्कार किए जा सकेंगे. साथ ही श्रद्धालुओं और परिजनों के लिए तमाम जन सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी. रूप फाउंडेशन के प्रोजेक्ट मैनेजर समीर का कहना है कि विरोध बढ़ने के बावजूद मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि न कोई मंदिर टूटा है और न ही कोई मूर्ति, सब कुछ सुरक्षित है और काशी की आस्था बरकरार रहेगी.