यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में 16 अप्रैल की शाम हुई एक हत्या ने जब पहली बार पुलिस पहुंची, तो मामला एक सामान्य आपराधिक वारदात जैसा लग रहा था. सड़क किनारे गोली से मारा गया एक युवक, कोई चश्मदीद नहीं, हमलावरों का कोई सुराग नहीं सब कुछ अंधेरे में था. लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, यह कहानी एक साधारण हत्या से निकलकर रिश्तों, धोखे और साजिश की ऐसी परतों तक पहुंच गई, जिसने हर किसी को चौंका दिया. यह कहानी है गणेश त्रिपाठी की, जो अपने घर से रोज की तरह निकला था, लेकिन उसे नहीं पता था कि यह उसकी जिंदगी का आखिरी सफर होगा.
शाम का वह सफर, जो मौत में बदल गया
16 अप्रैल की शाम, नीमचेनी गांव का रहने वाला गणेश त्रिपाठी घर से निकला था. घरवालों को उसने बताया कि वह तेल लेने जा रहा है और कुछ देर में लौट आएगा. न कोई खतरे का अंदेशा, न कोई अनहोनी की आशंका. लेकिन जब गणेश वापस लौट रहा था, तभी रास्ते में उसे रोक लिया गया. सामने दो लोग थे पहचान के या अनजान, यह कहना मुश्किल था. इससे पहले कि गणेश कुछ समझ पाता, 315 बोर के तमंचे से गोली चलाई गई. गोली लगते ही गणेश जमीन पर गिर पड़ा. हमलावर मौके से फरार हो गए. कुछ देर बाद स्थानीय लोगों की नजर पड़ी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
पुलिस के सामने चुनौती
हत्या की सूचना मिलते ही मितौली थाना पुलिस मौके पर पहुंची. शुरुआती जांच में कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिला. न कोई गवाह, न कोई पहचान मामला पूरी तरह से उलझा हुआ था. जिले की पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तीन टीमों का गठन किया गया. स्वाट और सर्विलांस टीम को भी जांच में लगाया गया. पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि आखिर गणेश की हत्या क्यों हुई?
मोबाइल लोकेशन से खुला पहला राज
जांच के दौरान पुलिस ने गणेश के मोबाइल और उसके संपर्कों को खंगालना शुरू किया. इसी दौरान एक अहम सुराग हाथ लगा. पता चला कि गणेश की पत्नी संध्या त्रिपाठी लगातार एक व्यक्ति पुरुषोत्तम बाजपेई के संपर्क में थी. दोनों के बीच खूब बातचीत होती थी . यहीं से पुलिस का शक गहराया.
हिरासत में पत्नी, खुलने लगी परतें
पुलिस ने संध्या को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की. शुरुआत में वह टालमटोल करती रही, लेकिन जब सख्ती से सवाल किए गए, तो कहानी का असली चेहरा सामने आने लगा. संध्या और पुरुषोत्तम के बीच लंबे समय से संबंध थे. दोनों एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे और कई बार मिल भी चुके थे. यहां तक कि पुरुषोत्तम उससे मिलने जयपुर तक गया था. जांच में यह भी सामने आया कि घटना से कुछ समय पहले दोनों ने नए मोबाइल फोन और सिम कार्ड का इस्तेमाल शुरू किया था, ताकि उनकी बातचीत पर किसी को शक न हो.
साजिश का खाका
पूछताछ में यह साफ हुआ कि यह हत्या कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि पूरी योजना के तहत अंजाम दी गई थी. संध्या ने अपने प्रेमी पुरुषोत्तम के साथ मिलकर पति को रास्ते से हटाने की साजिश रची. इस काम के लिए पुरुषोत्तम ने अपने साथी प्रवेश कुमार को भी शामिल किया. तीनों ने मिलकर तय किया कि गणेश को ऐसे समय और जगह पर रोका जाएगा, जहां कोई गवाह न हो. 16 अप्रैल को जैसे ही गणेश घर से निकला, उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी. जब वह वापस लौट रहा था, तभी पहले से घात लगाए बैठे पुरुषोत्तम और प्रवेश ने उसे रोक लिया. कुछ ही सेकंड में तमंचा निकला और गोली चला दी गई. यह सब इतनी तेजी से हुआ कि गणेश को संभलने का मौका तक नहीं मिला.
जेल में बनी थी जोड़ी
जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया. पुरुषोत्तम और प्रवेश की मुलाकात पहले जेल में हुई थी. पुरुषोत्तम पहले भी एक डबल मर्डर केस में जेल जा चुका था, जबकि प्रवेश दहेज हत्या के मामले में बंद रहा था. वहीं दोनों के बीच दोस्ती हुई और बाहर आने के बाद भी संपर्क बना रहा. यही दोस्ती बाद में इस साजिश का हिस्सा बन गई.
सबूतों की कड़ी
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल तमंचा, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और मोटरसाइकिल बरामद कर ली. सर्विलांस डेटा और कॉल डिटेल्स ने भी इस बात की पुष्टि कर दी कि घटना के दिन तीनों लगातार संपर्क में थे. इन सबूतों ने पुलिस की कहानी को मजबूत कर दिया. मितौली क्षेत्र के सीओ ने बताया कि इस मामले में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. उन्होंने कहा कि यह हत्या पूरी तरह से साजिश के तहत की गई थी, जिसमें पत्नी, उसका प्रेमी और उसका साथी शामिल थे. पुलिस के मुताबिक, सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेजा जा रहा है.