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कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट... जिस सपने को इंटरनेशनल उड़ान भरनी थी, वो रनवे पर ही दम तोड़ बैठा

यूपी के कुशीनगर एयरपोर्ट की चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है. RTI से पता चला है कि 327 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से दो साल के दरम्यान एक भी नियमित उड़ान नहीं चली है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उद्घाटित कुशीनगर एयरपोर्ट को बौद्ध पर्यटन का बड़ा केंद्र बताया गया था.

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RTI से कुशीनगर एयरपोर्ट की चौंकाने वाली हकीकत सामने आई.
RTI से कुशीनगर एयरपोर्ट की चौंकाने वाली हकीकत सामने आई.

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में जिस इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बौद्ध पर्यटन के लिए भारत का नया वैश्विक द्वार बताया गया था, आज वही एयरपोर्ट लगभग खामोश पड़ा है. सरकारी दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि नवंबर 2023 के बाद से यहां एक भी शेड्यूल्ड कमर्शियल फ्लाइट नहीं चली है, जबकि इसके निर्माण और अपग्रेडेशन पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं.

सूचना का अधिकार (RTI) के तहत इंडिया टुडे को जो सूचना मिली है, वो बताती है कि अक्टूबर 2021 में जिस विज़न के साथ कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन हुआ था, उसकी जमीनी हकीकत उससे बिल्कुल उलट है. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2023 के बाद से यहां नियमित यात्री उड़ानों का पूरी तरह से अंत हो चुका है.

2021 में हुआ था भव्य उद्घाटन

अक्टूबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 327 करोड़ रुपये की लागत से बने कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था. उस वक्त इसे भारत के बौद्ध पर्यटन सर्किट का इंटरनेशनल हब बताया गया था, जो कुशीनगर को लुंबिनी, सारनाथ और बोधगया जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों से जोड़ेगा.

उद्घाटन समारोह खुद इस महत्वाकांक्षा का प्रतीक था. श्रीलंकन एयरलाइंस की विशेष उड़ान से बौद्ध भिक्षु और श्रीलंका के वरिष्ठ नेता पहुंचे थे. तत्कालीन खेल मंत्री नमल राजपक्षे भी इस ऐतिहासिक उड़ान में शामिल थे.

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इसके अलावा जापान, थाईलैंड, म्यांमार, भूटान, नेपाल और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के राजनयिकों की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि कुशीनगर को एशिया के बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए एक बड़े गेटवे के रूप में विकसित किया जाएगा.

उड़ानें गायब, रनवे सुनसान

RTI से मिले जवाबों के मुताबिक, 2022 और 2023 की शुरुआत तक एयरपोर्ट पर कुछ गतिविधियां जरूर रहीं, लेकिन इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ते चले गए. मार्च 2022 में सबसे ज्यादा 54 शेड्यूल्ड फ्लाइट्स चलीं. इसके बाद यात्री संख्या और उड़ानों में लगातार गिरावट आई. नवंबर 2023 आखिरी महीना रहा, जब सिर्फ 6 शेड्यूल्ड कमर्शियल फ्लाइट्स दर्ज की गईं. 2024 और 2025 में एक भी नियमित उड़ान नहीं चली. यानी, जिस एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय यातायात के लिए तैयार किया गया था, वह दो साल से पूरी तरह से नियमित उड़ानों से खाली है.

327 करोड़ खर्च, टर्मिनल लगभग खाली

RTI दस्तावेज बताते हैं कि कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कुल 327.30 करोड़ रुपये खर्च हुए. 125.30 करोड़ रुपये एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने दिए. 202 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश सरकार ने वहन किए. खर्च का ब्योरा भी चौंकाने वाला है. 79.84 करोड़ रुपये सिर्फ सिविल वर्क्स पर खर्च हुए. इसके अलावा तकनीकी सिस्टम, इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन और नेविगेशन सुविधाओं पर भारी रकम झोंकी गई.

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इसके बावजूद आज हालात ये हैं कि टर्मिनल बिल्डिंग्स ज़्यादातर वक्त खाली रहती हैं और एयरपोर्ट का इस्तेमाल मुख्य रूप से VIP मूवमेंट और कभी-कभार नॉन-शेड्यूल्ड फ्लाइट्स के लिए हो रहा है.

खर्च बढ़ता गया, उड़ानें खत्म होती गईं

सबसे बड़ा विरोधाभास तब सामने आता है, जब ऑपरेशन और मेंटेनेंस कॉस्ट के आंकड़ों पर नजर डाली जाए.

- 2021-22 में खर्च: 135.83 लाख रुपये
- 2022-23 में खर्च: 221.98 लाख रुपये
- 2023-24 में खर्च: 305.22 लाख रुपये
- 2024-25 में खर्च: 342 लाख रुपये

चार साल में मेंटेनेंस खर्च में करीब 152 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है.

RTI यह भी साफ करता है कि इन आंकड़ों में कर्मचारियों की सैलरी और कुछ अन्य ऑपरेशनल खर्च शामिल नहीं हैं, जो AAI अलग से वहन करता है. यानी असल खर्च इससे कहीं ज्यादा हो सकता है.

नॉन-शेड्यूल्ड फ्लाइट्स भी बेहद कम

RTI डेटा यह भी दिखाता है कि नियमित उड़ानों के अलावा नॉन-शेड्यूल्ड फ्लाइट्स का इस्तेमाल भी बेहद सीमित रहा है. 2024 और 2025 के कई महीनों में तो एक भी नॉन-शेड्यूल्ड फ्लाइट दर्ज नहीं हुई, जो एयरपोर्ट की लगभग पूरी तरह से ठप स्थिति को दर्शाता है.

नवंबर 2025... एक बार का उछाल

हालांकि, आंकड़ों में एक असामान्य उछाल जरूर दिखता है. नवंबर 2025 में अचानक 50 नॉन-शेड्यूल्ड फ्लाइट्स दर्ज की गईं. यह उछाल किसी एविएशन रिकवरी का संकेत नहीं था, बल्कि कुशीनगर भिक्षु संघ के अध्यक्ष महास्थविर भदंत ज्ञानेश्वर के अंतिम संस्कार समारोह से जुड़ा था.

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इस अवसर पर करीब 10,000 से ज्यादा श्रद्धालु, भिक्षु और अनुयायी पहुंचे. 40 से अधिक देशों से लोग आए. म्यांमार, थाईलैंड, श्रीलंका और नेपाल से प्रतिनिधिमंडल चार्टर्ड विमानों के जरिए पहुंचे. डेटा साफ बताता है कि यह एक बार का धार्मिक आयोजन था, न कि एयरपोर्ट की स्थायी वापसी.

सरकार का क्या तर्क...

इंडिया टुडे की पड़ताल पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि कुशीनगर एयरपोर्ट AAI के स्वामित्व में है और इसे उड़ान (UDAN) योजना के तीसरे चरण में चुना गया था. मंत्रालय के मुताबिक, उड़ान योजना के तहत 108.22 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च कर एयरपोर्ट का रिवाइवल और अपग्रेडेशन किया गया. स्पाइसजेट ने दिल्ली–कुशीनगर रूट पर उड़ानें चलाईं, जो 4 नवंबर 2023 तक जारी रहीं. इसके बाद विमानों की कमी के चलते स्पाइसजेट ने सेवाएं बंद कर दीं.

सरकार ने यह भी बताया कि कुशीनगर एयरपोर्ट को अब Visual Flight Rules (VFR) से अपग्रेड कर Instrument Flight Rules (IFR) में बदल दिया गया है. इससे नाइट लैंडिंग संभव हो गई है. इस अपग्रेड की जानकारी सभी एयरलाइंस को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई स्लॉट रिक्वेस्ट नहीं मिली.

आगे क्या?

मंत्रालय का कहना है कि UDAN राउंड 5.3 के तहत कुशीनगर को आगरा, बरेली, गया और कानपुर से जोड़ने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट जारी किए गए हैं. हालांकि, संबंधित एयरलाइन ने अभी तक उड़ान शुरू करने की तारीख तय नहीं की है. वहीं, एअर इंडिया एक्सप्रेस ने दिल्ली–कुशीनगर रूट पर उड़ान शुरू करने में रुचि दिखाई है, जो मार्च 2026 से शुरू हो सकती है.
 

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