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कानपुर किडनी रैकेट: फर्जी डॉक्टर ने किए 100 से ज्यादा ट्रांसप्लांट, कई चौंकाने वाले खुलासे

कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का बड़ा खुलासा हुआ है, जहां एक फर्जी डॉक्टर ने 100 से ज्यादा सर्जरी कर डालीं. गिरोह गरीब लोगों को पैसों का लालच देकर किडनी बिकवाता था. 12वीं पास युवक भी खुद को डॉक्टर बताकर ऑपरेशन करा रहा था. कई मरीजों की हालत बिगड़ी, कुछ को ICU में भर्ती करना पड़ा और एक महिला की मौत तक हो गई. पुलिस ने ज्यादातर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी अब भी फरार हैं.

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अली ने कहीं भी डॉक्टर के रूप में काम नहीं किया था. Photo ITG
अली ने कहीं भी डॉक्टर के रूप में काम नहीं किया था. Photo ITG

कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा होने के बाद जैसे-जैसे आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, पूरे नेटवर्क की परतें खुलती चली गईं. पुलिस लगभग सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन अब भी मुख्य आरोपी अफजल और कथित फर्जी डॉक्टर अली फरार हैं. दोनों पर 25,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया है और उनकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है.

12वीं पास रोहित बना 'डॉक्टर', 30 अवैध ट्रांसप्लांट कराए
इस गिरोह का एक अहम सदस्य रोहित भी पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है. चौंकाने वाली बात यह है कि महज 12वीं पास रोहित ने खुद को डॉक्टर बताकर करीब 30 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कराए. पूछताछ में सामने आया कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पैसों का लालच देकर किडनी बेचने के लिए तैयार करता था.

अकेले 'अली' करता था पूरी सर्जरी
जांच में सबसे बड़ा खुलासा फरार आरोपी मुदस्सर अली को लेकर हुआ है. पुलिस के मुताबिक, उत्तम नगर निवासी अली ने अकेले ही 100 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट किए. गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान अली किसी अन्य व्यक्ति को मरीज के पास तक नहीं जाने देता था. बताया गया कि अली खुद ही शरीर पर चीरा लगाता था. किडनी निकालने से लेकर प्रत्यारोपण तक की पूरी प्रक्रिया अकेले करता था. बाकी लोग सिर्फ उसकी मदद के लिए मौजूद रहते थे. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अली खुद को ओटी टेक्नीशियन बताता था, लेकिन उसकी किसी भी डिग्री या प्रशिक्षण का कोई प्रमाण नहीं मिला है.

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बिना अनुभव के बना 'ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट'
पुलिस जांच में सामने आया है कि अली ने कहीं भी डॉक्टर के रूप में काम नहीं किया था. लगातार ऑपरेशन करते-करते उसने खुद को किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ समझना शुरू कर दिया. यही लापरवाही कई मरीजों पर भारी पड़ी.

मरीजों की बिगड़ी हालत, ICU तक पहुंची नौबत
इस अवैध सर्जरी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ा. बिहार के समस्तीपुर निवासी एक डोनर को ऑपरेशन के बाद ICU में भर्ती करना पड़ा. पारुल नाम की महिला, जिसने 90 लाख रुपये देकर ट्रांसप्लांट कराया, ऑपरेशन के बाद संक्रमण का शिकार हो गई. चूंकि ऑपरेशन ऐसे स्थानों पर किए जा रहे थे जहां किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट (KTU) मौजूद नहीं थी, इसलिए हालत बिगड़ती गई. पारुल को पहले कानपुर के एक निजी अस्पताल और बाद में गंभीर स्थिति में लोहिया अस्पताल रेफर करना पड़ा.

दिल्ली में मौत पर शिकायत नहीं
जांच में एक और गंभीर मामला सामने आया है, जहां अली द्वारा ऑपरेशन के बाद एक महिला की हालत इतनी खराब हो गई कि उसे दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां उसकी मौत हो गई. चूंकि पूरा ट्रांसप्लांट अवैध था, इसलिए मृतका के पति ने कोई शिकायत नहीं की और चुपचाप शव लेकर चला गया. बताया जा रहा है कि दलालों ने भी उसे मामले को दबाने के लिए कहा था.

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रिकॉर्ड नहीं, कई और केस सामने आने की आशंका
पुलिस का मानना है कि यह सिर्फ वे मामले हैं जो सामने आ पाए हैं. इस पूरे रैकेट में किसी भी मरीज या डोनर का सही रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था. जांच एजेंसियों को आशंका है कि कई और अवैध ट्रांसप्लांट हुए हैं. कई मरीज संक्रमण या जटिलताओं का शिकार हुए होंगे. एक फर्जी डॉक्टर के हाथों सर्जरी होने से कई जानें खतरे में पड़ीं.

कानपुर किडनी रैकेट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि बिना किसी वैध डिग्री के एक व्यक्ति ने अकेले दम पर सैकड़ों सर्जरी कर डालीं. यह न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि अवैध मेडिकल नेटवर्क की गहराई को भी उजागर करता है.

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