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24 साल बाद मिली 'आजाद' को आजादी, बेगुनाह होने के बावजूद सिस्टम की अड़चनों ने जेल में रखा कैद!

मैनपुरी के आजाद खान ने अपनी जवानी के 24 साल जेल की सलाखों के पीछे गुजार दिए. डकैती के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आजाद को हाई कोर्ट ने बेगुनाह पाया, लेकिन कागजी कार्यवाही और जुर्माने की रकम न होने के कारण उनकी रिहाई में देरी हुई.

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बरेली जेल से बाहर आए आजाद खान (Photo- ITG)
बरेली जेल से बाहर आए आजाद खान (Photo- ITG)

Uttar Pradesh News: मैनपुरी निवासी आजाद खान साल 2000 में डकैती के आरोप में गिरफ्तार हुए थे. निचली अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उनके भाई मस्तान ने हाई कोर्ट में अपील की. न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने 19 दिसंबर 2025 को उन्हें दोषमुक्त घोषित किया क्योंकि पुलिस उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं दे सकी. हालांकि, धारा 437ए की औपचारिकताएं और 7000 रुपये का जुर्माना न भर पाने के कारण वह आदेश के बाद भी बरेली जेल में बंद रहे. मीडिया के हस्तक्षेप और एक सामाजिक संस्था की मदद से जुर्माना भरकर अब उनकी रिहाई संभव हुई है.

सिस्टम की कागजी कार्रवाई में फंसी रिहाई

हाई कोर्ट से दोषमुक्त होने के बावजूद आजाद खान की आजादी के बीच धारा 437ए की कानूनी प्रक्रिया अड़चन बन गई. सत्र न्यायालय में जमानतदार पेश न कर पाने के कारण मैनपुरी कोर्ट से रिलीज ऑर्डर जारी नहीं हो सका. इसके अलावा, उन पर एक अन्य मामले में 7000 रुपये का जुर्माना बकाया था. यदि यह रकम जमा नहीं होती, तो बेगुनाह साबित होने के बाद भी उन्हें एक साल और जेल में रहना पड़ता.

मीडिया और सामाजिक संस्था ने बढ़ाई मदद

'आजतक' द्वारा पड़ताल शुरू करने के बाद शासन से लेकर बरेली जेल प्रशासन तक में हड़कंप मच गया. जेल सुपरिंटेंडेंट अविनाश गौतम ने आनन-फानन में ईमेल के जरिए न्यायालय से संपर्क किया. जब यह बात सामने आई कि आजाद के पास जुर्माने के पैसे नहीं हैं, तब 'छोटी सी आशा' संस्था की पारुल मलिक और रूपाली गुप्ता ने 7000 रुपये जमा किए. इसके बाद ही बरेली सेंट्रल जेल से उन्हें उनके भाई मस्तान के सुपुर्द किया गया.

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भाई के संघर्ष ने दिलाई जीत

आजाद के भाई मस्तान ने सालों तक मजदूरी करके हाई कोर्ट में केस की पैरवी की. न्यायालय ने माना कि केवल इकबालिया बयान के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. 24 साल बाद जब आजाद घर लौटे, तो परिवार की आंखों में खुशी और सिस्टम की देरी का दर्द साफ झलक रहा था. जेल प्रशासन ने रिहाई का वीडियो जारी कर इस प्रक्रिया के पूरे होने की पुष्टि की है.

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