scorecardresearch
 

हरदोई: सीओ ने धरना दे रही महिलाओं को दी गालियां, थानेदार ने पत्रकारों को मौके से भगाया

हरदोई के दिउसीपुर गांव में जमीन कब्जा हटाने की कार्रवाई के दौरान हरपालपुर सीओ सतेंद्र सिंह पर धरना दे रही महिलाओं से अभद्र भाषा इस्तेमाल करने का आरोप लगा है. वहीं सांडी थानाध्यक्ष का पत्रकारों को मौके से भगाने का वीडियो भी वायरल हुआ है. दोनों मामलों की जांच एसपी ने एएसपी को सौंपी है.

Advertisement
X
महिलाओं से अभद्रता करते सीओ (Photo: Screengrab)
महिलाओं से अभद्रता करते सीओ (Photo: Screengrab)

 हरदोई जिले में खाकी की भूमिका एक बार फिर कठघरे में है. हरपालपुर के क्षेत्राधिकारी (सीओ) सतेंद्र सिंह और सांडी थानाध्यक्ष राकेश यादव से जुड़े दो अलग-अलग वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए. इन वीडियो से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं. 

मामला हरपालपुर थाना क्षेत्र के खसौरा ग्राम पंचायत अंतर्गत दिउसीपुर गांव का है. यहां जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही थी. सवायजपुर के एसडीएम मयंक कुंडू के नेतृत्व में राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम गांव पहुंची थी. गांव निवासी आदेश शुक्ला ने प्रशासन से शिकायत की थी कि उनकी जमीन पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है. शिकायत के आधार पर प्रशासन ने जांच के बाद कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू की. कार्रवाई के दौरान जब टीम जमीन पर पहुंची तो वहां पहले से मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई. कब्जा हटाने का विरोध करते हुए कुछ घरों की महिलाएं अपने-अपने घरों के अंदर जमीन पर ही बैठ गईं और उठने से इनकार कर दिया. महिलाओं का कहना था कि बिना उनकी पूरी बात सुने और उचित सुनवाई किए कार्रवाई की जा रही है. उनका विरोध शांतिपूर्ण था, लेकिन हालात तब बिगड़ गए जब मौके पर मौजूद हरपालपुर के सीओ सतेंद्र सिंह का रवैया अचानक बदल गया.

Advertisement

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ देखा और सुना जा सकता है कि सीओ सतेंद्र सिंह महिलाओं को जबरन उठने के लिए कह रहे हैं. जब महिलाएं अपनी जगह से नहीं उठतीं, तो वे अपना आपा खो बैठते हैं. वीडियो में कथित तौर पर सीओ महिलाओं को धमकाते हुए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं. उनकी आवाज में गुस्सा और शब्दों में तल्खी साफ झलकती है. 

ग्रामीणों का आरोप है कि सीओ का व्यवहार बेहद अपमानजनक था. महिलाओं के साथ जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह न सिर्फ असंवेदनशील है बल्कि कानून के रक्षक की छवि को भी धूमिल करता है. गांव की महिलाओं का कहना है कि वे सिर्फ अपनी बात रखना चाहती थीं, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें डराया-धमकाया गया. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, वैसे ही प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. 

मामला यहीं खत्म नहीं होता. इसी कार्रवाई के दौरान एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें सांडी थानाध्यक्ष राकेश यादव कथित तौर पर मौके पर मौजूद पत्रकारों को वहां से हटाते नजर आ रहे हैं. वीडियो में देखा जा सकता है कि जब मीडिया के लोग कार्रवाई की कवरेज कर रहे थे, तब थानाध्यक्ष ने उन्हें वहां से जाने को कहा. आरोप है कि पत्रकारों को यह कहकर भगाया गया कि यहां रुकने की जरूरत नहीं है. इस वीडियो के वायरल होते ही पुलिस की मंशा पर और भी सवाल खड़े हो गए हैं.

Advertisement

इन दोनों वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक ने दोनों घटनाओं की जांच अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) को सौंप दी है. प्रशासन की ओर से कहा गया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान संयम और संवाद बेहद जरूरी होता है. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement