भीड़ भरे मंदिर का परिसर... लोग पूजा में व्यस्त... अचानक चीख- सांप! सांप...! एक पल में अफरा-तफरी मच जाती है. कोई पीछे हटता है, कोई गिरता है, कोई अपने गहनों को संभालने की कोशिश करता है... लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है.
यही था उस शातिर गैंग का तरीका, जिसने गोरखपुर और आसपास के जिलों में दहशत फैला रखी थी. नकली सांप और छिपकली के सहारे यह गिरोह लोगों को डराकर उनके कीमती जेवर साफ कर देता था.
इस गैंग की नजर हमेशा उन जगहों पर रहती थी, जहां भीड़ ज्यादा हो- मंदिर, बाजार, ऑटो या ई-रिक्शा. खासकर महिलाओं को निशाना बनाया जाता था, क्योंकि वे अक्सर सोने-चांदी के गहने पहने होती थीं.
गोरखपुर के तरकुलहा मंदिर परिसर में भी ऐसा ही कुछ हो रहा था. लोग दर्शन के लिए आते, और अचानक नकली रबर के सांप-छिपकली फेंक दिए जाते. जैसे ही लोग डरते, धक्का-मुक्की होती-उसी अफरा-तफरी में गैंग के सदस्य अपने काम को अंजाम दे देते.
16 लोगों का संगठित गिरोह
यह कोई छोटा-मोटा गैंग नहीं था. इसमें 8 महिलाएं और 8 पुरुष शामिल थे. हर किसी की भूमिका तय थी. कोई डर फैलाता. कोई भीड़ में घुल-मिल जाता. कोई गहने निकालने का काम करता. और कोई तुरंत सामान लेकर निकल जाता.
महिलाओं की मौजूदगी इस गैंग की सबसे बड़ी चाल थी. वे आसानी से भीड़ में घुल जाती थीं और किसी को शक भी नहीं होता था.
पुलिस के रडार पर कब आया गैंग?
पिछले कुछ समय से पुलिस को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में अजीब तरीके से चोरी हो रही है. लोग बताते कि अचानक सांप या छिपकली दिखी और फिर उनका गहना गायब हो गया.
शुरुआत में ये घटनाएं अलग-अलग लग रही थीं, लेकिन जब पुलिस ने पैटर्न जोड़ा तो एक संगठित गिरोह की तस्वीर सामने आई.
जाल बिछाया गया... और गैंग फंस गया
चौरीचौरा पुलिस को सूचना मिली कि यह गैंग तरकुलहा मंदिर परिसर में सक्रिय है. इसके बाद पुलिस ने सादी वर्दी में टीम तैनात की और निगरानी शुरू की.
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इस बार जैसे ही गैंग ने अपनी पुरानी चाल चली, पुलिस पहले से तैयार थी. मौके पर ही घेराबंदी कर 16 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. इनमें 8 महिलाएं और 8 पुरुष शामिल हैं.
बरामदगी ने खोले कई राज
गिरफ्तारी के बाद जो सामान मिला, उसने पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया. 2 सोने जैसी पीली धातु की चेन, 8 नेलकटर (गहने काटने के लिए इस्तेमाल), 4 रबर के सांप, 3 रबर की छिपकली, 5 चार पहिया वाहन, 4 एंड्रॉयड मोबाइल फोन और करीब 45,940 रुपये कैश मिले हैं.
कई जिलों में फैला था नेटवर्क
पूछताछ में सामने आया कि इस गिरोह के सदस्य सिर्फ गोरखपुर ही नहीं, बल्कि गाजीपुर, मऊ और देवरिया जैसे जिलों से जुड़े हैं. यानी यह एक अंतरजनपदीय नेटवर्क था, जो जगह-जगह जाकर वारदात करता था और फिर आगे बढ़ जाता था.
कैसे करते थे वारदात?
गैंग का तरीका बेहद सुनियोजित था. पहले भीड़ वाली जगह चुनना. टीम के कुछ सदस्य पहले से वहां मौजूद रहते. अचानक नकली सांप या छिपकली फेंक देना. अफरा-तफरी मचते ही टारगेट को घेर लेना. नेलकटर से गहना काटना या झटके से निकाल लेना और तुरंत अलग-अलग दिशाओं में निकल जाना... पूरी घटना कुछ ही सेकंड में हो जाती थी, और पीड़ित को समझ ही नहीं आता था कि क्या हुआ.
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क्षेत्राधिकारी रत्नेश्वर सिंह के मुताबिक, यह गिरोह खासतौर पर अकेले सफर कर रही महिलाओं को निशाना बनाता था. लंबे समय से इसकी शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद पुलिस ने जाल बिछाकर इसे पकड़ लिया. गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है.
लोगों का कहना है कि अपराधी अब नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं. भीड़ में घबराहट, डर या अफरा-तफरी... यही उनका सबसे बड़ा हथियार है. इसलिए जरूरी है कि ऐसे हालात में सतर्क रहें, अपने सामान पर नजर रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें.