उत्तर प्रदेश के इटावा के डॉक्टर भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई है. यहां हार्ट अटैक और गंभीर हालत में लाए जाने वाले मरीजों को लगाए जाने वाले इंजेक्शन एक्सपायर पाए गए. मामला उजागर होने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया. फिलहाल सीएमएस ने जांच के आदेश देते हुए जिम्मेदारों को नोटिस जारी करने की बात कही है. वहीं प्रभारी मंत्री ने भी जांच के आदेश देते हुए कार्रवाई की बात की है.
ऐसे सामने आया मामला
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बड़ी संख्या में एट्रोपिन और एड्रोप्रो नाम के इंजेक्शन एक्सपायर मिले. ये इंजेक्शन आमतौर पर हृदय घात और गंभीर मरीजों के इलाज में तुरंत लगाए जाते हैं. ऐसे में इमरजेंसी जैसे संवेदनशील विभाग में एक्सपायर दवाइयों का होना मरीजों की जान के साथ बड़ा खिलवाड़ माना जा रहा है. यह लापरवाही उस समय सामने आई जब एक गंभीर हालत में वृद्ध महिला को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया.
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डॉक्टर ने इलाज के लिए इंजेक्शन लगाने के निर्देश दिए. जब कंपाउंडर ने इंजेक्शन उठाया तो उस पर एक्सपायरी तारीख दिसम्बर 2025 देखी गई. इसके बाद मीडिया ने एक्सपायर इंजेक्शन को कैमरे में कैद कर लिया. स्थिति बिगड़ती देख इमरजेंसी में मौजूद स्टाफ इंजेक्शन हटाने में जुट गया.
मामले में प्रभारी मंत्री ने कही ये बात
मामले में इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर और कर्मचारियों ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है. जिम्मेदार लोग इस लापरवाही को मामूली घटना बताकर टालते नजर आए. लेकिन इस मामले ने सरकार की पोल खोलकर रख दी है. क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार जहां स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे कर रही है, वहीं जिला स्तर पर ऐसी लापरवाहियां सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं.
प्रभारी मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने कहा कि इस तरह की कोई भी घटना है तो निश्चित ही जांच होकर कार्रवाई होगी. मामले में जिसकी भी भूमिका पाई जाएगी, लापरवाही पर कार्रवाई होगी.