scorecardresearch
 

 प्रशांत सिंह की पोल खोलने वाले डॉक्टर भाई को अब मिलने लगी धमकियां, परिवार से बोलचाल बंद  

अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह की पोल खोलने वाले बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह को अब धमकियां मिल रही हैं. फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आरोप सामने लाने के बाद परिवार से उनका संवाद टूट गया है. शिकायत के बाद दोनों पीसीएस अधिकारियों पर जांच शुरू हो चुकी है. इस्तीफे और जांच के बीच पूरा मामला सुर्खियों में है.

Advertisement
X
विश्वजीत सिंह ने अपने भाई प्रशांत सिंह की पूरी पोल खोल दी (Photo: ITG)
विश्वजीत सिंह ने अपने भाई प्रशांत सिंह की पूरी पोल खोल दी (Photo: ITG)

अयोध्या में जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह की पूरी पोल अब खुल चुकी है. जिसे खोला हैं उनके सगे बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने. इस्तीफे के बाद प्रशांत सिंह की सच्चाई दुनिया के सामने लाने के बाद अब उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं. विश्वजीत का कहना है कि वह डरने वाले नहीं है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, जिसे जो करना है कर लें, लेकिन मैं किसी विकलांग का हक नहीं जाने दूंगा. यह मेरी नैतिक जिम्मेदारी है.

डॉ. विश्वजीत सिंह का कहना है कि शिकायत के बाद से न सिर्फ प्रशांत कुमार सिंह, बल्कि उनकी छोटी बहन जया सिंह से भी पूरी तरह बातचीत बंद हो चुकी है. जया सिंह वर्तमान में कुशीनगर के हाटा में तहसीलदार के पद पर तैनात हैं और वह भी इस मामले में जांच के दायरे में हैं. विश्वजीत सिंह बताते हैं कि सच सामने लाने की कीमत उन्हें पारिवारिक रिश्तों की टूटन के रूप में चुकानी पड़ी है. 

एक ही डॉक्टर से दोनों ने बनवाए दिव्यांग प्रमाण पत्र

विश्वजीत सिंह का दावा है कि प्रशांत कुमार सिंह और उनकी बहन जया सिंह ने अलग-अलग वर्षों में, लेकिन एक ही डॉक्टर से दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाया. डॉ. विश्वजीत सिंह का आरोप है कि प्रशांत कुमार सिंह ने वर्ष 2009 में और जया सिंह ने वर्ष 2012 में एक ही डॉक्टर से दिव्यांगता प्रमाण पत्र हासिल किया. आरोप है कि दोनों प्रमाण पत्र फर्जी हैं और इनके जरिए सरकारी सेवा में लाभ लिया गया. शिकायतकर्ता का दावा है कि इस संबंध में उनके पास दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें जांच एजेंसियों को सौंपा जा चुका है. यही वजह है कि अब दोनों अधिकारियों पर जांच बैठी हुई है.

Advertisement

शिकायत, जांच और इस्तीफे का पूरा गणित

डॉ. विश्वजीत सिंह के अनुसार, इस मामले की औपचारिक शुरुआत 13 अक्टूबर 2025 को हुई, जब राज्य आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई. इसके बाद सीएमओ मऊ को जांच के निर्देश दिए गए. 19 दिसंबर 2025 को सीएमओ मऊ ने स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र लिखकर कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए दिशा-निर्देश मांगे. यहीं से, आरोपों के मुताबिक, जांच को प्रभावित करने की कोशिशें शुरू हो गईं. डॉ. विश्वजीत सिंह का आरोप है कि जब जांच को रोका नहीं जा सका, तब इस्तीफे का रास्ता चुना गया. उनका दावा है कि प्रशांत सिंह चाहते हैं कि इस्तीफा मंजूर होते ही न तो जांच आगे बढ़े और न ही किसी तरह की रिकवरी हो.

जन्मतिथि, उम्र और दिव्यांगता पर सवाल

डॉ. विश्वजीत सिंह ने दस्तावेजों के साथ यह दावा भी किया है कि प्रशांत कुमार सिंह की जन्मतिथि 28 अक्टूबर 1978 है. इसके अनुसार, उन्होंने 27 अक्टूबर 2009 को, यानी 31 वर्ष की उम्र में, सीएमओ मऊ से 40 प्रतिशत दिव्यांगता का प्रमाण पत्र बनवाया. इसी प्रमाण पत्र के आधार पर उन्हें वर्ष 2011 बैच में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से 4 प्रतिशत दिव्यांग कोटे में चयन मिला. डॉ. विश्वजीत सिंह का कहना है कि जिस आंख की बीमारी के आधार पर दिव्यांगता दिखाई गई, वह मेडिकल साइंस के अनुसार उस उम्र में संभव ही नहीं है. यही सवाल अब मेडिकल बोर्ड और जांच एजेंसियों के सामने है.

Advertisement

परिवार की पृष्ठभूमि और सरकारी सेवाओं का नेटवर्क

प्रशांत कुमार सिंह का परिवार लंबे समय से सरकारी सेवाओं से जुड़ा रहा है. पिता त्रिपुरारी सिंह आजमगढ़ बिजली विभाग से बाबू पद से सेवानिवृत्त हुए पत्नी वीणा सिंह मुंबई एयरपोर्ट पर स्पोर्ट्स कोटे से सिक्योरिटी इंचार्ज (दरोगा) रहीं
करीब पांच साल पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया. इनकी दो बेटियां हैं, जिनकी उम्र 10 और 15 वर्ष बताई जाती है. पत्नी और बेटियां वर्तमान में लखनऊ में रहती हैं.

पुराना है राजनीतिक जुड़ाव 

प्रशांत कुमार सिंह का करियर केवल प्रशासन तक सीमित नहीं रहा. आजमगढ़ से एलएलबी करने के बाद वह छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे. वह दिवंगत सपा नेता अमर सिंह के करीबी माने जाते थे और अमर सिंह द्वारा गठित राष्ट्रीय लोकमंच पार्टी में मऊ के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं. 2010 से 2013 के बीच उन्होंने कोचिंग कक्षाएं चलाईं और नौकरी के दौरान यूपी जीएसटी संगठन के चुनाव में भी अपनी किस्मत आजमाई. 

धमकियों के बीच भी अडिग डॉक्टर भाई

धमकियों और सामाजिक दबाव के बावजूद डॉ. विश्वजीत सिंह का कहना है कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं. वह कहते हैं कि अगर मैं चुप रहता, तो किसी असली दिव्यांग का हक मारा जाता. यह लड़ाई मेरे भाई से नहीं, सिस्टम की सच्चाई से है. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement