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24 साल बाद आई न्याय की घड़ी, धनंजय सिंह फायरिंग केस में 15 अप्रैल को फैसला, अभय सिंह हैं मुख्य आरोपी

वाराणसी के एमपी एमएलए कोर्ट में 2002 में पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर हुए जानलेवा हमले के मामले में 15 अप्रैल को फैसला आएगा. इस केस में अभय सिंह मुख्य आरोपी हैं. कोर्ट में दोनों पक्षों की बहस पूरी हो चुकी है और लिखित दलीलें जमा हो गई हैं. अब फैसले का इंतजार है.

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जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह
जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह

वाराणसी के एमपी एमएलए कोर्ट में 24 साल पुराने पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर हुए जानलेवा हमले के मामले में अब फैसला आने वाला है. कोर्ट ने इस चर्चित मामले में 15 अप्रैल को फैसला सुनाने की तारीख तय की है. इस केस में बागी विधायक अभय सिंह को मुख्य अभियुक्त बनाया गया है.

साल 2002 के इस मामले में सोमवार को कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई. बचाव पक्ष, अभियोजन और वादी तीनों की बहस पूरी होने के बाद दोनों पक्षों ने अपनी लिखित दलीलें और विधि व्यवस्था से जुड़े दस्तावेज कोर्ट में जमा कर दिए. इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए 15 अप्रैल की तारीख तय कर दी.

धनंजय सिंह पर चली गोलियों का हिसाब 15 अप्रैल को

धनंजय सिंह के वकील श्रीनाथ त्रिपाठी ने बताया कि दोनों पक्षों की बहस पूरी हो चुकी है और लिखित बहस भी दाखिल कर दी गई है. उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है, क्योंकि इसमें अंधाधुंध फायरिंग कर पांच लोगों को घायल किया गया था. उन्होंने धारा 307 के तहत अधिकतम सजा आजीवन कारावास की मांग की है. उनका कहना है कि तीनों आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य सामने आ चुके हैं.

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यह मामला 4 अक्टूबर 2002 का है, जब वाराणसी के नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा के पास धनंजय सिंह पर जानलेवा हमला हुआ था. उस समय वह अपने साथियों के साथ एक अस्पताल से जौनपुर लौट रहे थे. शाम करीब 6 बजे घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उनके काफिले पर एके-47 और अन्य ऑटोमेटिक हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग की थी.

इस हमले में धनंजय सिंह के बाएं हाथ में गोली लगी थी. उनके साथ उनके गनर बासुदेव पाण्डेय, ड्राइवर दिनेश गुप्ता और अन्य साथी जितेंद्र बहादुर और संतोष सिंह भी गंभीर रूप से घायल हुए थे. इस घटना ने उस समय पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी.

 अभय सिंह समेत अन्य पर फैसला तय

मामले में अभय सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया था. इसके अलावा एमएलसी विनीत सिंह समेत करीब सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. हालांकि बाद में साक्ष्यों के अभाव में विनीत सिंह समेत चार लोगों को बरी कर दिया गया था. अब इस लंबे समय से चले आ रहे मामले में फैसला आने वाला है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं. 24 साल के इंतजार के बाद यह फैसला कई मायनों में अहम माना जा रहा है.
 

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