लखनऊ के प्रसिद्ध मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने आगामी जनगणना 2027 को देखते हुए मुस्लिम समुदाय से अपनी धार्मिक और भाषाई पहचान स्पष्ट रूप से दर्ज करने का आह्वान किया है. जनगणना का कार्य डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है, जिसके लिए 10 अप्रैल तक 5.5 लाख गणना करने वालों का डेटाबेस तैयार हो जाएगा. नागरिक 7 मई से खुलने वाले स्व-गणना पोर्टल पर अपना विवरण खुद भर सकेंगे. मुख्य सचिव एसपी गोयल ने अधिकारियों को मकान सूचीकरण का कार्य बिना एरर और समय-सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए हैं. मौलाना के अनुसार, सटीक डेटा के आधार पर ही भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ सही ढंग से मिल सकेगा.
धर्म और भाषा पर मौलाना की स्पष्ट राय
मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने जोर देकर कहा है कि जनगणना फॉर्म भरते समय धर्म के स्थान पर सिर्फ "इस्लाम" ही लिखें. इसके साथ ही उन्होंने मातृभाषा के कॉलम में हिंदी के बजाय "उर्दू" लिखने की अपील की है.
उनके मुताबिक, अक्सर लोग सामान्य तौर पर हिंदी लिख देते हैं, लेकिन अपनी सही पहचान दर्ज करना जरूरी है. मौलाना का तर्क है कि सरकार जब भी जन कल्याणकारी योजनाएं बनाएगी, तो इसी डेटा का इस्तेमाल किया जाएगा. स्पष्ट डेटा होने से सरकार को योजनाएं बनाने और उन्हें लागू करने में सहूलियत होगी.
पूरी तरह डिजिटल होगी यह जनगणना
बुधवार को मुख्य सचिव एसपी गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक की, जिसमें सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए. जनगणना 2027 पूरी तरह डिजिटल होगी, जिसमें सटीक आंकड़ों पर विशेष जोर दिया जा रहा है. नागरिक 7 मई से पोर्टल के जरिए खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे. प्रशासन का लक्ष्य है कि मकान सूचीकरण और गणना का कार्य बिना किसी गलती के पूरा हो. इस बार की जनगणना में तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि डेटा पारदर्शी और सुलभ रहे.