उत्तर प्रदेश में मिशन 2024 में नरेंद्र मोदी के चुनावी रथ को आगे ले जाने वाले सिपेहसालारों की घोषणा आखिर कर दी गई. काफी समय से नई टीम की सूची का इंतजार हो रहा था. प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह चौधरी की नई टीम में जहां कई पुराने चेहरों को अभी बनाए रखा गया है, वहीं योगी सरकार में मंत्री बने चेहरों को ‘एक व्यक्ति एक पद’ के सिद्धांत पर अमल करते हुए ड्रॉप किया गया है. प्रदेश महामंत्री जेपीएस राठौड़, प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद कुमार शर्मा, प्रदेश मंत्री दयाशंकर सिंह को नई टीम में ड्रॉप किया गया है.
महामंत्रियों की सूची में मामूली बदलाव
इस नई सूची में 7 महामंत्री घोषित किए गए जिसमें महामंत्री रहे गोविंद नारायण शुक्ला, प्रियंका सिंह रावत, अनूप गुप्ता और अमरपाल मौर्य को महामंत्री बनाए रखा गया है. इसके अलावा कन्नौज से सांसद सुब्रत पाठक को नई टीम में जगह नहीं मिली है. संभवतः पार्टी ने उनको ये संदेश भी दिया है कि 2024 में कन्नौज में मुकाबला कड़ा होने वाला है पूरी तरह से पार्टी की जिम्मेदारी से मुक्त रखा गया है. महामंत्री के पद के लिए युवा मोर्चे के पूर्व अध्यक्ष और एमएलसी सुभाष यदुवंश का नाम घोषित किया गया है. सुभाष यदुवंश मौजूदा टीम में प्रदेश मंत्री थे. ऐसा माना जा रहा है कि टीम में यादव चेहरे को शामिल करके बीजेपी लोकसभा चुनाव से पहले बड़ा संदेश देना चाहती है. वहीं पूर्व विधायक राम प्रताप सिंह को भी महामंत्री बनाया गया है. महामंत्रियों को रिपीट कर 2024 के लिए प्रदेश टीम में जिम्मेदारी संभालने वाले चेहरों को बनाए रखा गया है.
यूपी में 18 उपाध्यक्ष
नई टीम में 18 उपाध्यक्ष घोषित किए गए हैं. पूर्व नौकरशाह और योगी मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री अरविंद कुमार शर्मा को जगह न मिलना पहले से ही तय था. उपाध्यक्षों में 3 क्षेत्रीय अध्यक्षों को जगह दी गई है. इनकी जगह क्षेत्रीय अध्यक्ष के तौर पर नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है. एमएलसी और गोरक्ष क्षेत्र में अध्यक्ष डॉ धर्मेंद्र सिंह, पश्चिम क्षेत्र के अध्यक्ष मोहित बेनीवाल और कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्र के अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह अब मुख्य टीम में काम करेंगे. तीनों को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है. उपाध्यक्ष पद के लिए 4 महिलाओं को जगह मिली है. कांता कर्दम, नीलम सोनकर, सुनीता दयाल और कमलावती सिंह को उपाध्यक्ष बनाया गया है. कांता कर्दम, नीलम सोनकर और सुनीता दयाल वर्तमान टीम में भी उपाध्यक्ष थीं. कमलावती सिंह महिला मोर्चा की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं और महिलाओं के साथ काम करने का उनका अनुभव इस बार काम आ सकता है. बुंदेलखंड की नेता और उपाध्यक्ष रहीं रंजना उपाध्याय को ड्रॉप किया गया है. कांता कर्दम राज्यसभा सांसद हैं जबकि नीलम सोनकर पूर्व सांसद हैं.
उपाध्यक्ष के तौर पर नोएडा से विधायक पंकज सिंह, एमएलसी विजय बहादुर पाठक, संतोष सिंह, सलिल विश्नोई को रिपीट किया गया है. इन नामों को लोकसभा चुनाव के लक्ष्य को देखते हुए भी टीम में रखा गया है. हालांकि नए और युवा चेहरों को प्राथमिकता दी गई है. अर्चना मिश्रा, सुरेश पासी, शिवभूषण सिंह और अभिजात मिश्रा जैसे चेहरों को जगह दी गई है. जाति की दृष्टि से देखा जाए तो ओबीसी चेहरों को टीम में प्रमुखता से जगह मिली है. पदाधिकारियों में करीब आधी संख्या ओबीसी और दलित की है. वहीं देखा जाए तो क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश भी की गई है और पूर्वी और पश्चिमी यूपी के साथ मध्य यूपी को भी मौका दिया गया है.
नए चेहरों को मिला मौका
लोकसभा चुनाव को देखते हुए क्षेत्रीय टीम का नेतृत्व करने के लिए नए चेहरों को मौका दिया गया है. किसी भी क्षेत्रीय अध्यक्ष को उसी पद कर रिपीट नहीं किया गया है. वर्तमान टीम में उपाध्यक्ष रहे प्रकाश पाल को कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्र का क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया गया है. वहीं दिलीप पटेल को काशी क्षेत्र के अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. काशी क्षेत्र में पटेल वोटरों की संख्या को देखते हुए ये अहम है क्योंकि बीजेपी अपनी सहयोगी अपना दल के सहयोग से यहां पटेल वोटर्स के बीच पैठ बनाती रही है. युवा मोर्चा की टीम में महामंत्री रहे कमलेश मिश्रा को अवध क्षेत्र के अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह में ट्वीट करके नई टीम को बधाई दी है.
भाजपा ने की सभी जातियों को साधने की कोशिश
भाजपा में संगठन के लिहाज से अध्यक्ष और संगठन महामंत्री के बाद सबसे अहम क्षेत्रीय अध्यक्षों का पद होता है क्योंकि पूरे प्रदेश को 6 क्षेत्रों में बांटा गया है. क्षेत्रीय अध्यक्ष में इस बार जातीय संतुलन को खास करके साधा गया है. पाल और गडरिया समुदाय से 1, कुर्मी समुदाय से 1 और शाक्य बिरादरी का 1 क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया गया है जबकि एक ब्राह्मण, एक ठाकुर और एक भूमिहार को भी क्षेत्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है.
पहले से ही बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री दोनों OBC समुदाय से आते हैं, जिसमें भूपेंद्र चौधरी जाट बिरादरी से जबकि धर्मपाल सिंह सैनी बिरादरी से आते हैं. यह दोनों ही जातियां पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओबीसी जातियां हैं.
क्षेत्रों में विभाजित उत्तर प्रदेश में वाराणसी के क्षेत्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी दिलीप पटेल को दी गई है, जो कुर्मी बिरादरी से आते हैं. जबकि कानपुर क्षेत्र की जिम्मेदारी प्रकाश पाल की है, जो पाल-गडरिया समुदाय के हैं. वहीं द्रुवविजय सिंह शाक्य को बरेली, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत का क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया गया. जबकि सहजानंद राय को गोरखपुर क्षेत्र, कमलेश मिश्र को अवध और सत्येंद्र सिसोदिया के पश्चिमी क्षेत्र का क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया गया. अगर जातिवार चेहरों को देखें तो संगठन में दलितों को लगभग 20 फीसदी जगह दी गई है 8 चेहरे दलित बिरादरी से जिसमें दो जाटव, दो पासी बिरादरी से एक बाल्मीकि एक सोनकर और दो कोरी बिरादरी से संगठन में लाए गए हैं.