उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में सैकड़ों साल पुरानी बैलगाड़ी से बारात निकालने की परंपरा को एक बार फिर जीवित किया गया. थाना मौदहा क्षेत्र के अंतिम गांव गुड़ा में 25 बैलगाड़ियों से करीब तीन किलोमीटर लंबी बारात निकाली गई, जिसमें लगभग 200 लोग शामिल हुए. बताया गया कि करीब 50 वर्षों से बंद पड़ी इस परंपरा को परिवार और गांव वालों के सहयोग से दोबारा शुरू किया गया.
दरअसल, सजी-धजी बैलगाड़ियों में सवार होकर दूल्हा और बराती खेतों के रास्ते द्विवेदी परिवार के फार्म हाउस तक पहुंचे. पूरे आयोजन में शोर-शराबे और आडंबर से दूर रहकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न कराया गया. बैलगाड़ियों में सवार बारात को देखकर राहगीर और ग्रामीण आश्चर्यचकित नजर आए.
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तीन दिनों तक चलीं विवाह की रस्में
दूल्हे के पिता जागेंद्र द्विवेदी ने बताया कि विवाह की रस्में तीन दिनों तक चलीं. पहले दिन तिलक, दूसरे दिन द्वारचार और तीसरे दिन विदाई की रस्म निभाई गई. विशेष बात यह रही कि गुरुवार 26 फरवरी को दुल्हन की विदाई भी बैलगाड़ी से ही की गई, जो उपस्थित लोगों के लिए यादगार क्षण बन गया.
दूल्हा मोहित द्विवेदी मोबाइल की दुकान चलाता है. उसकी शादी भेड़ी जलालपुर निवासी विवेक पाठक की बेटी मोहिनी पाठक के साथ 25 फरवरी को तय थी. दोनों परिवारों की इच्छा थी कि बारात बैलगाड़ी से निकाली जाए, जिसके लिए 25 बैलगाड़ियां बुक की गईं. बुधवार दोपहर देसी अंदाज में बारात निकाली गई.
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लोक परंपराओं और देशी व्यंजनों ने बढ़ाया आकर्षण
बारात गांव गुड़ा से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित फार्म हाउस पहुंची, जहां पुराने रीति-रिवाजों के अनुसार कठघोड़वा नृत्य और लौंडा नाच का आयोजन किया गया. दूल्हा बैलगाड़ी पर सवार होकर बरातियों के साथ समारोह स्थल पहुंचा. आयोजन का मुख्य आकर्षण तमूरा भजन, महिलाओं द्वारा गाए गए पारंपरिक बुंदेलखंडी गीत और पत्तल में परोसा गया देशी भोजन रहा.
मेन्यू में कद्दू, आलू-बैंगन की सब्जी सहित अन्य पारंपरिक व्यंजन शामिल थे. सभी मेहमानों को बैठाकर सम्मानपूर्वक भोजन परोसा गया. इस आयोजन ने क्षेत्र में पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं को फिर से जीवंत कर दिया.