Uttar Pradesh News: हमीरपुर जिले के राठ नगर निवासी 20 वर्षीय अमृतलाल का मोबाइल गेम खेलने के दौरान मानसिक संतुलन बिगड़ गया. सिकंदरपुरा स्थित अपने घर में गेम खेलते समय वह अचानक "ये अंधा कानून है" जैसे फिल्मी गाने, भक्ति गीत और शायरी तेज आवाज में पढ़ने लगा. ईंट-भट्टे पर मजदूरी करने वाले उसके पिता रमेश और मां गुड्डी ने उसे शांत करने की कोशिश की, लेकिन हालत न सुधरने पर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक मोबाइल चलाने, नींद की कमी और हाल ही में अपनी बहन गायत्री की मौत के सदमे के कारण उसे 'एंजायटी न्यूरोसिस' की समस्या हुई है.
अस्पताल में कभी शायरी तो कभी जयकारा
अमृतलाल की हालत इतनी विचित्र थी कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी वह लगातार बड़बड़ाता रहा. उसने "ये जिंदगी एक कहानी है" जैसी शायरियां सुनाईं और फिर "जय बाला जी महाराज" के जयकारे लगाने लगा. परिजनों ने बताया कि वह अक्सर घंटों बाग में छिपकर मोबाइल चलाता था.
घरवाले उसे समझाते थे कि आंखें खराब हो जाएंगी, लेकिन वह नहीं माना. डॉक्टरों ने बताया कि यह एक तरह की नशे जैसी लत है, जिसका इलाज दिमाग को शांत कर और गहरी नींद दिलाकर किया जा रहा है.
बहन की मौत और गेमिंग का दोहरा तनाव
युवक की इस हालत के पीछे सिर्फ मोबाइल ही नहीं, बल्कि पारिवारिक दुख भी शामिल है. करीब 20 दिन पहले अमृतलाल की बहन गायत्री की बीमारी से मौत हो गई थी, जिससे वह गहरे तनाव में था. पिता के अनुसार, वह पिछले एक साल से मोबाइल गेम का आदी हो चुका था और बहन के जाने के बाद वह और भी अधिक फोन में खोया रहने लगा. मनोचिकित्सकों का कहना है कि अत्यधिक स्ट्रेस लेने के बाद "एंजायटी न्यूरोसिस" जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे इंसान अजीब व्यवहार करने लगता है.
डॉक्टरों की चेतावनी: मोबाइल से रहें दूर
राठ सीएचसी और जिला अस्पताल के विशेषज्ञों ने इस मामले को गंभीरता से लिया है. डॉक्टर आर.एस. प्रजापति के मुताबिक, यह बीमारी नशे की लत की तरह होती है, लेकिन सही इलाज से इसे ठीक किया जा सकता है. उन्होंने युवाओं को सलाह दी है कि वे हिंसक या तनाव बढ़ाने वाले मोबाइल गेम से दूर रहें. फिलहाल अमृतलाल का इलाज जारी है और उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है. परिजनों को उम्मीद है कि वह जल्द ही सामान्य होकर घर लौट सकेगा.