उत्तर प्रदेश के बांदा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया. छह साल की मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी की सारी हदें पार करने वाले दोषी अमित रैकवार को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है. यह फैसला महज 56 दिनों के भीतर आया, जिसे तेज न्यायिक प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है.
अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि दोषी को तब तक फांसी पर लटकाया जाए, जब तक उसकी मौत न हो जाए. सजा सुनाए जाने के वक्त आरोपी के चेहरे पर कोई पछतावा या भाव नजर नहीं आया. वहीं, पीड़ित परिवार ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया है.
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गुटखे के बहाने बुलाया, फिर की हैवानियत
यह जघन्य वारदात 25 जुलाई 2025 की है. बांदा के कालिंजर थाना क्षेत्र में छह साल की मासूम बच्ची अपने घर के बाहर खेल रही थी. इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला आरोपी अमित रैकवार उसे गुटखा देने के बहाने अपने साथ ले गया.
आरोपी ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और विरोध करने पर उस पर बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं. बच्ची का हाथ तोड़ दिया गया, जीभ काट दी गई और दांतों से उसके नाजुक अंगों को बुरी तरह घायल कर दिया गया. जब परिजनों ने बच्ची को खोजा तो वह खून से लथपथ हालत में मिली.
अस्पताल से कानपुर रेफर, हालत आज भी गंभीर
घायल मासूम को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे कानपुर रेफर कर दिया गया. डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची की हालत बेहद नाजुक थी. छह महीने बीत जाने के बाद भी बच्ची पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है.
परिजनों का कहना है कि बच्ची आज भी बदहवास रहती है और आने वाले समय में उसके ऑपरेशन होने हैं. इस घटना ने परिवार की पूरी जिंदगी बदल कर रख दी है.
एनकाउंटर में गिरफ्तारी, पैरों में लगी गोली
घटना के कुछ ही घंटों बाद पुलिस हरकत में आ गई. आरोपी अमित रैकवार मध्य प्रदेश की ओर जंगलों में भागने की कोशिश कर रहा था. इसी दौरान पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई, जिसमें आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी.
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. उस समय पूरे जिले में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश था और लोग आरोपी के एनकाउंटर की मांग कर रहे थे. इसके बाद से आरोपी जेल में बंद था.
20 दिन में चार्जशीट, 56 दिन में फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए विवेचना अधिकारी इंस्पेक्टर दीपेंद्र सिंह ने महज 20 दिनों के भीतर जांच पूरी कर ली. 12 नवंबर को पुलिस और अभियोजन की ओर से आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया.
ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 10 गवाह पेश किए. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया. इस पूरे मामले में कुल 36 तारीखें पड़ीं और महज 56 दिनों में अदालत ने फांसी की सजा सुना दी.
जज का सख्त संदेश, लगाया जुर्माना भी
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह अपराध समाज की आत्मा को झकझोर देने वाला है. ऐसे जघन्य अपराधों में सख्त सजा जरूरी है. कोर्ट ने आरोपी को फांसी की सजा के साथ 75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
खास बात यह रही कि जिस जज ने इस मामले की सुनवाई शुरू की थी, उसी जज ने अंतिम फैसला भी सुनाया. सजा के बाद पुलिस टीम आरोपी को जेल लेकर रवाना हो गई.
मां बोलीं- हमारी बेटी की जिंदगी तबाह कर दी
फैसले के बाद पीड़ित बच्ची की मां ने कहा कि आरोपी ने उनकी बेटी की पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी. उन्होंने बताया कि जब बच्ची मिली थी तो उसकी सांस चल रही थी, लेकिन शरीर पर गंभीर घाव थे. हाथ टूटा हुआ था, जीभ कटी हुई थी और कई ऐसे जख्म थे जो आज तक नहीं भर पाए हैं.
मां ने कहा कि आरोपी के साथ यही होना चाहिए था. उन्होंने अदालत के फैसले और पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताया और कहा कि इससे उन्हें न्याय मिला है.
अपराधियों में जाएगा सख्त संदेश- एसपी
बांदा के एसपी पलाश बंसल ने बताया कि 25 जुलाई को कालिंजर थाना क्षेत्र में छह साल की बच्ची के साथ पड़ोसी द्वारा दुष्कर्म की घटना हुई थी. बच्ची की हालत बेहद गंभीर थी, इसलिए उसे तुरंत बेहतर इलाज के लिए कानपुर भेजा गया.
उन्होंने कहा कि पीड़ित की तहरीर पर केस दर्ज किया गया और मुठभेड़ के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने तेजी से चार्जशीट दाखिल की और कोर्ट में मजबूत पैरवी की. एसपी के मुताबिक सरकार की मंशा है कि ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत महिला और बच्चों के खिलाफ अपराधों में सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई हो. ऐसे फैसलों से अपराधियों में डर पैदा होगा और समाज को कड़ा संदेश जाएगा.