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अपहरण के आरोपी की रिहाई के बदले मांगी ₹1 लाख की रिश्वत, SHO समेत 3 पुलिसकर्मी सस्पेंड

बहराइच में अपहरण मामले में रिश्वतखोरी का गंभीर मामला सामने आया है. कोलकाता से अपहृत लड़की की बरामदगी के बाद आरोपी को छोड़ने के बदले ₹1 लाख की रिश्वत लेने के आरोप में मटेहरा थाने के SHO समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है. शिकायत पर जांच में आरोप सही पाए गए. विभागीय कार्रवाई जारी है.

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जांच में आरोप सही पाए गए.(Photo: Representational)
जांच में आरोप सही पाए गए.(Photo: Representational)

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप सामने आने के बाद थाना स्तर के तीन पुलिसकर्मियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है. एक युवती के अपहरण मामले में हिरासत में लिए गए आरोपी को छोड़ने के बदले एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में थाना प्रभारी (SHO) समेत तीन पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले में विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है.

दरअसल, यह मामला उस समय सामने आया जब आरोपी के रिश्तेदार ने पुलिस के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक सेल में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में कहा गया कि हिरासत से रिहा करने के लिए उससे एक लाख रुपये की मांग की गई थी. शिकायत पर संज्ञान लेते हुए उच्च अधिकारियों ने गोपनीय जांच कराई, जिसमें आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए.

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कोलकाता से अपहरण, बहराइच में मिली लड़की

अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) दुर्गा प्रसाद तिवारी ने बताया कि गजेंद्र सिंह नाम के युवक पर कोलकाता से एक लड़की के अपहरण का आरोप है. वह लड़की को बहराइच लेकर आया और उसे अपने बहनोई मुनीजर सिंह के घर पर रखा गया था. यह घर मटेहरा थाना क्षेत्र के धनौली गौरा गांव में स्थित है.

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लड़की के परिजनों ने पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के माध्यग्राम थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत अपहरण का मामला दर्ज कराया था. 11 जनवरी को पश्चिम बंगाल पुलिस की टीम बहराइच पहुंची और मटेहरा पुलिस के साथ मिलकर लड़की को बरामद किया.

हिरासत, शिकायत और कार्रवाई

लड़की की बरामदगी के बाद गजेंद्र सिंह, मुनीजर सिंह और लड़की को मटेहरा थाने लाया गया. स्थानीय अदालत से रिमांड आदेश भी लिया गया. इसके बाद मुनीजर सिंह ने आईजी देवीपाटन रेंज कार्यालय की एंटी करप्शन हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई कि उसे रिहा करने के लिए एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई.

शिकायत मिलने पर आईजी अमित पाठक ने मामले की विस्तृत गोपनीय जांच के आदेश दिए. जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद मटेहरा थाने के एसएचओ सुरेंद्र कुमार बौध, उपनिरीक्षक विशाल जायसवाल और कांस्टेबल अवधेश यादव को शुक्रवार को निलंबित कर दिया गया.

विभागीय जांच जारी, रकम लौटाई गई

अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई है. साथ ही, जो एक लाख रुपये रिश्वत के तौर पर दिए गए थे, उन्हें शिकायतकर्ता को वापस कर दिया गया है. पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी.

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