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जेल या बेल? अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनाई कल, इलाहाबाद हाईकोर्ट पर टिकी सबकी नजरें

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पॉक्सो एक्ट मामले में कल (27 फरवरी) इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत पर सुनवाई होगी. स्वामी ने इन आरोपों को सत्ता का षड्यंत्र और पूरी तरह निराधार बताया है. उनके अनुसार, कथित पीड़ित बच्चे शिकायतकर्ता के पास ही रह रहे हैं, जिसके सबूत वे अदालत में पेश करेंगे.

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Photo: PTI)
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Photo: PTI)

इलाहाबाद हाईकोर्ट में कल (27 फरवरी) स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई होगी. पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज होने के बाद स्वामी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है. जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच शुक्रवार को दोपहर बाद इस याचिका पर सुनवाई करेगी. केस की संवेदनशीलता को देखते हुए कानूनी गलियारों में इस पर सबकी नजरें टिकी हैं.

अपने ऊपर लगे आरोपों पर बोले अविमुक्तेश्वरानंद

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह निराधार और सत्ता का षड्यंत्र बताया है. उन्होंने सवाल उठाया कि जांच में शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज पुलिस के साथ क्यों मौजूद है? स्वामी के अनुसार, पीड़ित बताए जा रहे बच्चे लंबे समय से आशुतोष के पास ही रह रहे हैं और उनके साथ कर्मकांड कर रहे हैं, जिसके सबूत अदालत में पेश किए जाएंगे. 17 जनवरी की कथित घटना को उन्होंने पूरी तरह झूठा करार दिया.

सरकार पर साधा निशाना 

उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में अपराधियों का बोलबाला है और अपराधी ही पुलिस की जांच रिपोर्ट मीडिया को बता रहे हैं. स्वामी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने हमेशा कानून के राज की बात की है, चाहे वह अतीक अहमद की हत्या का मामला हो या धर्म की रक्षा का. 

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उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व की सरकारों (सपा-बसपा) ने विरोध होने पर अपनी गलतियां मानी थीं, लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार 'बुलडोजर संस्कृति' और 'अहंकार' के साथ आवाज उठाने वालों को दबा रही है. उन्होंने साधु-संतों की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए कहा कि जब शंकराचार्य के साथ ऐसा हो रहा है, तो आम संतों का क्या होगा.

मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला 

गौरतलब है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) में दर्ज मामले ने अब तूल पकड़ लिया है. डीके फाउंडेशन की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने केस संख्या 4177/in/2026 दर्ज कर लिया है. 

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक हिस्ट्रीशीटर की तहरीर पर बिना ठोस सबूतों के पुलिस की शक्ति का दुरुपयोग कर स्वामी के विचारों को दबाने और उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है. NHRC इस संबंध में जल्द ही नोटिस जारी कर सकता है. 

हाई कोर्ट पर टिकी सबकी निगाहें 

बता दें कि 24 गफरवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है. प्रयागराज के झूंसी थाने में 21 फरवरी को इनके खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी.

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इस मामले में अविमुक्तेश्वरानंद, मुकुंदानंद और 2-3 अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है. याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया है कि विवेचना जारी रहने तक उन्हें राहत प्रदान की जाए. यह याचिका सीधे तौर पर पुलिस की संभावित दंडात्मक कार्रवाई और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग को लेकर पेश की गई है.

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