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'क्षमा याचना से कोई छोटा नहीं हो जाता', शंकराचार्य विवाद पर बोले अखिलेश यादव, कहा- जगद्गुरु का स्थान सबसे ऊंचा

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पदवी पर विवाद के बीच अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमला बोला है. उन्होंने सरकार से माफी मांगने की बात कहते हुए लिखा कि 'क्षमा वीरस्य भूषणम्'. अखिलेश ने तीखे तेवर में कहा कि शंकराचार्य से प्रमाणपत्र मांगने वाले पहले अपना प्रमाणपत्र दें, भाजपाइयों की सोच गिर चुकी है.

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शंकराचार्य विवाद पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया (File Photo)
शंकराचार्य विवाद पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया (File Photo)

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की 'शंकराचार्य' की पदवी को लेकर विवाद गहरा गया है. प्रयागराज माघ मेला में टकराव के बाद प्रशासन ने उन्हें नोटिस भेजकर जवाब मांगा है. फिलहाल, अविमुक्तेश्वरानंद ने अपना जवाब प्रशासन  को भेज दिया है लेकिन इन सबके बीच जमकर सियासत भी हो रही है. सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इशारों में सरकार से माफी मांगने की बात कही है. 

बकौल अखिलेश यादव- 'किसी और की गलती के लिए भी यदि आप अप्रत्यक्ष रूप से कहीं दूर से भी जुड़े हुए हों तो भी क्षमा याचना करने से कोई छोटा नहीं हो जाता, बल्कि मन को हल्का और अच्छा लगता है. महान लोगों को पता होता है कि उस धृष्टता के पीछे किसी और का कोई व्यक्तिगत कारण अथवा स्वार्थ रहा होगा, इसीलिए वो बड़े मन से क्षमा याचक को माफ भी कर देते हैं और अपना स्नेह-आशीर्वाद भी देते हैं. इसीलिए हमारी संस्कृति में कहा गया है : क्षमा वीरस्य भूषणम्!'

इससे पहले अखिलेश ने लिखा था- 'जगद्गुरु का है विश्वगुरु से भी ऊंचा स्थान, इहलोक का शासक भी जिनको करे प्रणाम.' इसके आलावा उन्होंने शंकराचार्य से प्रमाणपत्र मांगने के मसले पर भी हमला बोला. अखिलेश यादव ने कहा कि सर्टिफिकेट मांगने वाले पहले खुद का सर्टिफिकेट दें. उन्होंने कहा- 'विभाजनकारी भाजपाई और उनके संगी-साथियों की सोच इस हद तक गिर जाएगी, ये किसी ने नहीं सोचा था.' 

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 अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्रशासन को दिया 8 पन्नों का जवाब 

प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने मंगलवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक नोटिस भेजकर उनके ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में प्रस्तुतीकरण पर सवाल उठाया था. प्राधिकरण ने दलील दी थी कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. इसके जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से बुधवार को 8 पन्नों का विस्तृत स्पष्टीकरण मेला प्राधिकरण की ईमेल और दफ्तर भेजा गया. जब कार्यालय में कोई जिम्मेदार अफसर जवाब लेने मौजूद नहीं मिला, तो अनुयायियों ने उसे दफ्तर के गेट पर ही चस्पा कर दिया. सीनियर वकील अंजनी कुमार मिश्रा के माध्यम से यह जवाब दाखिल किया गया.

'करोड़ों हिंदुओं की आस्था का अपमान'

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से भेजे गए जवाब में मेला प्राधिकरण के नोटिस को बेहद अपमानजनक बताया गया है. वकील अंजनी कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रशासन का यह कदम न केवल अनुचित है, बल्कि यह करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ करने जैसा है. जवाब में इस बात पर जोर दिया गया है कि धार्मिक पदों पर इस तरह का प्रशासनिक हस्तक्षेप धार्मिक भावनाओं को आहत करता है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का दिया हवाला

जवाब में कानूनी पक्ष रखते हुए वकील पीएन मिश्रा ने कहा कि प्रशासन जिस 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला दे रहा है, उससे पहले 21 सितंबर 2022 का भी एक आदेश है. इस आदेश में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्पष्ट रूप से शंकराचार्य बताया गया था. टीम का तर्क है कि प्रशासन तथ्यों को सही तरीके से नहीं देख रहा है और अनावश्यक रूप से पदवी पर विवाद पैदा कर रहा है.

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दफ्तर के बाहर हुआ हाई वोल्टेज ड्रामा

जब अविमुक्तेश्वरानंद की टीम सेक्टर-4 स्थित मेला प्राधिकरण के दफ्तर पहुंची, तो वहां कोई अफसर नोटिस लेने के लिए मौजूद नहीं था. काफी देर इंतजार करने के बाद टीम और अनुयायियों ने अपना विरोध दर्ज कराया. अंततः, उन्होंने 8 पन्नों के उस जवाब को कार्यालय के मुख्य द्वार पर ही चिपका दिया. 

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