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500-500 के नोटों का बेड, जूते के डिब्बों-थैलों में गड्डियां, सीक्रेट पर्चियों से लेनदेन... आगरा में छापे की Inside Story

आगरा में जूता कारोबारियों के ठिकानों पर हुई आईटी की छापेमारी से पर्ची सिस्टम का खुलासा हुआ है. शहर में जूते का घरेलू कारोबार करीब 20 हजार करोड़ रुपये का है. इस कारोबार में नोट की जगह पर्ची से बड़ा लेनदेन होता है. इसमें बड़े कारोबारी मामूली कमीशन काटकर पर्ची से करोड़ों रुपये का नकद भुगतान कर देते हैं.  

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जूता कारोबार में कैसे चलता है पर्ची सिस्टम?
जूता कारोबार में कैसे चलता है पर्ची सिस्टम?

उत्तर प्रदेश के आगरा में जूता कारोबारियों के ठिकानों पर इनकम टैक्स (IT) की छापेमारी तीन दिनों तक चली. कारोबारियों ने बेड-गद्दों, जूतों के डिब्बों में कैश छिपाकर रखा था. आईटी की रेड में कुल 53 करोड़ रुपये कैश जब्त किए गए हैं. इनकम टैक्स विभाग की छापेमारी में जो सबसे बड़ा खुलासा हुआ है वो 'पर्ची से कारोबार' का है. आइए जानते हैंके  कि आगरा में जूते का कारोबार कैसे पर्चियों से फल-फूल रहा है. 

दुनियाभर में मशहूर आगरा के जूते का कारोबार करीब 20 हजार करोड़ रुपये का है. इस कारोबार में नोट की जगह पर्ची से बड़ा लेनदेन होता है. इसमें बड़े कारोबारी मामूली कमीशन काटकर पर्ची से करोड़ों रुपये का नकद भुगतान कर देते हैं.  

कैसे चलता है पर्ची का कारोबार? 

घरेलू जूता कारोबार उधार पर अधिक निर्भर करता है. ट्रेडर्स और बड़े कारोबारी छोटे कारोबारियों को तुरंत भुगतान की बजाय पर्ची बनाकर दे देते हैं, इस पर तारीख और अवधि लिखी होती है. नीयत तारीख पर पर्ची देने वाले बड़े कारोबारी से छोटे कारोबारी भुगतान प्राप्त कर लेते हैं. यह पूरा काम नंबर दो में चलता है. इससे एक तरफ व्यापार में नकदी नहीं दिखाई देती है तो दूसरी ओर बड़े पैमाने पर टैक्स में भी हेराफेरी हो जाती है. पर्चियों का ये खेल 100 से अधिक बड़े जूता कारोबारियों की साख पर चल रहा है. पर्ची को भुनाने के बदले तीन प्रतिशत तक का ब्याज लिया जाता है. 

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हरमिलाप ट्रेडर्स के यहां भी मिलीं पर्चियां 

सूत्रों की मानें तो आयकर विभाग की अन्वेषण शाखा को हरमिलाप ट्रेडर्स के मालिक के घर से बड़ी संख्या में पर्चियां भी मिली हैं. इन पर्चियों में 20 से अधिक जूता कारोबारियों के नाम हैं. कारोबार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बीते एक महीने से चुनाव की वजह से पर्चियों का भुगतान नहीं हो रहा था. नकदी की जब्ती के डर से कारोबारी पर्चियां ही ले रहे थे. चुनाव खत्म होते ही इन्हें भुनाया जाने लगा, जिसकी भनक आयकर विभाग को लग गई थी.  

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फंस गया करोड़ों का भुगतान 

इन पर्चियों के सामने आने से शहर के बाकी व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है. इन पर्चियों में बाकी व्यापारियों से लेनदेन की जानकारी है. जिसके आधार पर आयकर विभाग बाकी व्यापारियों के टर्नओवर का आकलन कर सकता है. हरमिलाप ट्रेडर्स के मालिक ने जिन व्यापारियों की पर्चियों को भुनाया था, उनका भुगतान फंस सकता है. सूत्रों के मुताबिक, 50 करोड़ रुपये से अधिक लेनदेन की पर्चियां भुनाई गई थीं. हरमिलाप ट्रेडर्स कुछ सालों में ही जूता कारोबार में बड़ा नाम बन गया.   

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तीन बड़े जूता कारोबारियों के ठिकानों पर छापेमारी 

बता दें कि आयकर विभाग ने मुख्य रूप से हरमिलाप ट्रेडर्स और इसके साथ व्यापारिक संबंध रखने वाली कंपनियों जैसे एमजी रोड स्थित बीके शूज, धाकरन स्थित मंशू फुटवियर के ठिकानों पर छापेमारी की है. हरमिलाप ट्रेडर्स के मालिक के घर से छापेमारी के दौरान बेडरूम से भारी संख्या में कैश बरामद किया है, जिसकी गिनती की जा रही है. कारोबारी के यहां जूतों के डिब्बों और थैलों से भी कैश बरामद हुआ है. इतना ही नहीं, रेड में जितना भी कैश मिला है सब 500-500 की गड्डियां के रूप में मिला है. 

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