हिमालय की ऊंची चोटियों पर छिपा एक रहस्यमयी जीव जिसे 'पहाड़ों का भूत कहा जाता है. हिम तेंदुआ यानी स्नो लेपर्ड जिसे नंगी आंखों से देख पाना मुश्किल है. इसका स्लेटी-सफेद फर और काले-भूरे धब्बे इसे बर्फ और चट्टानों के बीच ओझल हो जाते हैं. यह शांत, चालाक और ऊंचाई का उस्ताद शिकारी है, जो हजारों फीट ऊपर रहता है. लेकिन जलवायु परिवर्तन और अवैध शिकार के कारण आज यह लुप्तप्राय प्रजाति बन चुका है.
जाहिर है इसको कैमरे में कैप्चर करना बहुत मुश्किल है.वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी के लिए ये कुदरत से सीधी जंग है. खासकर हिमालय में, जहां ऊंचाई 15,000 फीट से ज्यादा, ऑक्सीजन कम और ठंड जानलेवा होती है. तेज हवाओं के बीच कैमरा संभालना तक मुश्किल हो जाता है. फोटोग्राफर घंटों एक ही जगह टिके रहते हैं. साथ ही चट्टानों को निहारते हुए.
इस उम्मीद में कि कहीं कोई हलचल दिख जाए.ऐसा ही एक रोमांचक अनुभव लद्दाख के उल्ली इलाके में देखने को मिला. इंस्टाग्राम पर मशहूर फोटोग्राफर विजेथ भार्गव (@drone_pilot_vb) ने 9 अप्रैल को अपनी कहानी साझा की. उन्होंने बताया कि वे लगातार 12 दिनों तक रोज सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक पहाड़ की रिज पर कैमरा लेकर बैठे रहे. उनके साथ कई भारतीय और विदेशी फोटोग्राफर भी मौजूद थे.
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शाम होते ही असली परीक्षा शुरू होती. तापमान अचानक 7-8 डिग्री गिर जाता और बर्फीली हवाएं उंगलियां जमा देतीं. लेकिन इंतजार जारी रहा. और फिर आया वो पल चट्टानों के बीच हल्की सी हरकत. पत्थर नहीं, बल्कि एक मादा हिम तेंदुआ अपने दो पांच महीने के शावकों के साथ सामने थी. मां आगे-आगे, शावक पीछे खेलते-कूदते, गिरते-संभलते चलते रहे. करीब एक घंटे तक यह परिवार चट्टानों पर घूमता रहा, आराम करता रहा और शिकार की तलाश में नजरें दौड़ाता रहा.
करीब एक किलोमीटर दूर गांव और पर्यटक टेलीस्कोप से इस नजारे को देख रहे थे, लेकिन ये दुर्लभ जीव अपनी ही दुनिया में मग्न थे. विजेथ इस पल को याद करते हुए कहते हैं-प्रकृति में यह कोई राजा नहीं, बल्कि एक घोस्ट है..यह दृश्य सिर्फ एक फोटोग्राफर का सपना नहीं, बल्कि हर वाइल्डलाइफ प्रेमी के लिए एक संदेश है.