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मोर पंख के व्यापार पर प्रतिबंध की तैयारी

मोर भले ही राष्ट्रीय पक्षी हो लेकिन इसके पंख के व्यापार पर कोई पाबंदी नहीं है. सरकार अब मोर पंख के व्यापार को प्रतिबंधित करने के लिए वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में संशोधन की तैयारी कर रही है.

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मोर भले ही राष्ट्रीय पक्षी हो लेकिन इसके पंख के व्यापार पर कोई पाबंदी नहीं है. सरकार अब मोर पंख के व्यापार को प्रतिबंधित करने के लिए वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में संशोधन की तैयारी कर रही है.

वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा ‘‘मंत्रालय वन्य जीव संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2010 लाने की प्रक्रिया में है जिसमें मोर पंख के व्यापार को प्रतिबंधित करने का प्रावधान है. लेकिन धार्मिक उद्देश्यों के लिए मोर पंख के उपयोग की अनुमति दी जायेगी.’ उन्होंने कहा कि विधेयक का मसौदा तैयार हो गया है और इस पर समाज के विभिन्न वर्गो की राय ली जा रही है.

मंत्रालय ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 43 (3) ए और धारा 44 में संशोधन करने का प्रस्ताव किया है जिसमें मोर पंखों के लेनदेन और बिक्री पर रोक का उल्लेख किया गया है.

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अधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य पंख के लिए इस राष्ट्रीय पक्षी को पकड़ने और उसके शिकार पर रोक लगाना है.

वर्तमान कानून के तहत, मोर की हत्या और मोर पंख से निर्मित वस्तुओं का निर्यात प्रतिबंधित है लेकिन कानून मोर पंख और उससे बनी वस्तुओं के घरेलू कारोबार की अनुमति इस आधार पर देता है कि ये पंख प्राकृतिक रूप से गिरा दिये गए होंगे.

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