उत्तर कोरिया के दो भाइयों ने अपने परिवार के साथ देश से निकलने की प्लानिंग में 10 साल लगा दिए. जब 9 लोग उस अलग- थलग देश से भाग रहे थे, तो किसी को उम्मीद नहीं थी कि वो खुली हवा में सांस ले पाएंगे. सामने बस अंधेरा दिख रहा था.
नॉर्थ कोरिया के इन दो भाइयों को अपने देश से भागने की योजना बनाने में एक दशक से ज्यादा समय लग गया. यह साहसिक प्लान उनके पिता ने बनाई थी. भागते समय दोनों भाईयों ने अपने दिवंगत पिता की अस्थियों को भी साथ लेकर अंधेरे में खड़ी एक नाव की ओर रेंगते हुए बढ़े थे. उस रात तट पर आसपास पहरेदार मौजूद थे. फिर भी दोनों भाईयों और उनके परिवार ने हिम्मत जुटाकर देश से बाहर निकलने का साहस किया. क्योंकि, उन्हें दोबारा मौका नहीं मिलने वाला था.
नॉर्थ कोरिया से भाग निकलने में सफल किम इल-ह्योक ने सीएनएन को बताया कि 6 मई, 2023 को तीन दिनों तक चले वसंत ऋतु के तूफान ने पीले सागर को अपनी चपेट में ले लिया था. इससे उनकी आवाजाही छिप गई थी. किम इल-ह्योक और किम यी-ह्योक, दोनों भाईयों ने अपने परिवार के सात सदस्यों को इकट्ठा किया. इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे.
छोटे बच्चों को बोरी में बंदकर नाव पर ले गए
भागने वालों में किम यी-ह्योक के दो बच्चे थे, जिनकी उम्र 4 और 6 साल थी और उन्हें बोरी के थैलों में छिपाकर वे ले जा रहे थे. किम इल-ह्योक की पत्नी, जो पांच महीने की गर्भवती थीं, अनिच्छा से इस सफर पर निकली थी. किम इल-ह्योक ने बताया कि मेरी पत्नी देश छोड़कर भागना नहीं चाहती थी. उसे खासकर गर्भावस्था के दौरान ऐसा करने को लेकर चिंता थी.
मैं उसे समझाने की कोशिश करता रहा, कहता रहा कि बच्चे की खातिर हमें दक्षिण कोरिया जाना होगा. मैंने उससे पूछा कि क्या वह चाहती है कि हमारे बच्चे इस तरह के देश में बड़े हों. अंत में, मेरी पत्नी मान गई और हमने एक साथ देश छोड़ने का फैसला किया.
दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने किम के दलबदल के विवरण की पुष्टि की. इन उत्तर कोरियाई लोगों ने वहां जो कठिनाइयों को झेला सबकुछ साझा किया. उस रात नौ लोग नॉर्थ कोरिया से भाग निकले थे. लेकिन आज उनमें से केवल आठ ही जीवित हैं, जो दक्षिण कोरिया में अपनी कहानियों को आगे बढ़ा रहे हैं.
पिता ने 10 साल पहले देश छोड़ने की प्लानिंग शुरू की थी
किम इल-ह्योक ने बताया कि परिवार के मुखिया ने ही 10 साल से भी पहले उत्तर कोरिया से भागने का विचार सबसे पहले रखा था. यह सुझाव देते हुए कि समुद्र के रास्ते आजादी मिल सकती है. उन्होंने बताया कि हमारे परिवार का नावों या मछली पकड़ने से कोई लेना-देना नहीं था और हम समुद्र से दूर अंदरूनी इलाके में रहते थे. मेरे पिता ने कहा कि इस समाज में कोई उम्मीद नहीं है. इसे बदलने का कोई रास्ता नहीं है. बाहर एक विशाल, स्वतंत्र दुनिया है. चलो दक्षिण कोरिया चलते हैं.
इसलिए, उसने अपने छोटे बेटे को तटवर्ती इलाकों में काम ढूंढने के लिए भेज दिया. किम इल-ह्योक ने बताया कि लगभग चार से पांच साल बाद, मेरे भाई ने काम सीख लिया और अपनी खुद की नाव ले ली. समय के साथ, भाई ने नॉर्थ कोरिया की सत्ताधारी पार्टी के वफादारों का विश्वास भी जीत लिया और रिश्वत की मदद से स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों के साथ घनिष्ठ संबंध बना लिए. प्योंगयांग की समुद्री गश्तें उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के शासन के प्रहरी के रूप में काम करती हैं, जो ठंडे, अडिग उद्देश्य के साथ पीले सागर को चीरती हुई आगे बढ़ती हैं. उनका काम ही भगोड़ों को रोकना है.
उत्तर कोरिया से भागने के लिए, किम परिवार को गश्ती नौकाओं से बचना था और उत्तरी सीमा रेखा (एनएलएल) को पार करना था - जो उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच एक तनावपूर्ण, विवादित समुद्री सीमा है. इसके पास का जलक्षेत्र समुद्री जीवों से समृद्ध है, लेकिन वहां मछली पकड़ने की हिम्मत कम ही लोग करते हैं. क्योंकि यह क्षेत्र अत्यधिक प्रतिबंधित और कड़ी निगरानी में रहता है. दोनों भाइयों ने इसका फायदा उठाते हुए मछुआरे बनकर गश्ती दल की सुरक्षा में मौजूद कमियों का पता लगाया.
किम इल-ह्योक ने कहा कि अगर हम एनएलएल की ओर बढ़ते हैं, तो उत्तर कोरियाई सेना हमारा पीछा कर सकती है. अगर वे ऐसा करते हैं, तो वे हमें कितनी जल्दी पकड़ लेंगे? हमने हर चीज का हिसाब लगाया था. दिन के समय गश्त तेज होती थी और रात में धीमी, खासकर खराब मौसम वाले दिनों में या जब समुद्री चेतावनी जारी की जाती थी. जब गश्ती दल ने हमें पकड़ा, तो उन्होंने हमारे साथ ऐसा व्यवहार किया जैसे हम कोई बड़े अपराधी हों.
गार्डों के शक को खत्म करने के लिए रचा लंबा खेल
जब किम और उसके भाई से वर्षों तक पूछताछ की गई, तो उन्होंने एक ही कहानी दोहराई. उन्होंने तट के किनारे तैनात गार्डों को रिश्वत दी थी, उनसे विनती की थी कि उन्हें एनएलएल के पास मछली पकड़ने दिया जाए. प्रचुर मात्रा में मछली पकड़ना इतना अच्छा था कि इसे नजरअंदाज करना मुश्किल था.गार्डों ने भाइयों की कहानियों की बार-बार पुष्टि की. किम परिवार अपनी नाव को समुद्री सीमा के पास ले जाता था, लेकिन हमेशा वापस लौट आता था. यह एक सुनियोजित बहाना था - एक सावधानीपूर्वक किया गया कार्य जिसने उनके आसन्न पलायन को छिपा दिया था.
उत्तर कोरिया में किम परिवार को धनी माना जाता था. उनके पास एक बड़ा टीवी था, जो उत्तर कोरियाई अधिकारियों के पास आधिकारिक रूप से पंजीकृत था. इसके अलावा भी उनके पास एक छोटा टीवी था, जिसे उन्होंने गुप्त रूप से खरीदा था और व्यापारियों द्वारा चीन से तस्करी करके लाया गया था. किम ने याद करते हुए बताया कि दक्षिण कोरियाई सीमा के पास स्थित अपने घर से किम परिवार सियोल से प्रसारित होने वाले 10 चैनल देख सकते थे. उन्होंने आगे बताया कि हमारे पास तांबे के तार का एक कामचलाऊ एंटीना था जिसे हम मोड़कर रखते थे और जरूरत पड़ने पर खोलते थे. हम उसे कमरे में अलग-अलग दिशाओं में घुमाते रहते थे जब तक कि हमें सिग्नल वाला स्थान नहीं मिल जाता.
किम ने बताया कि उस टीवी को देखना किसी दूसरी दुनिया में झांकने जैसा था. रात में बिजली वाले घर, भरपूर भोजन, पूरे दक्षिण कोरिया में निर्बाध आवागमन, गर्म पानी. मानो संभावनाओं के द्वार खुल गए हों. किम के पिता का निधन भागने का सपना साकार होने से पहले ही हो गया. उन्होंने अपनी संपत्ति अपने बच्चों के लिए छोड़ी, जिससे किम परिवार की संपत्ति में वृद्धि हुई. उन्होंने कहा कि 2015 से 2020 तक, मैंने मुख्य रूप से घरेलू उपकरणों से संबंधित एक व्यवसाय किया. फिर महामारी आई, जिसने किम के जीवन की दिशा बदल दी और उनकी बचत में वृद्धि की.मेरा कारोबार खूब फला-फूला. मैं अकेला नहीं था. मेरे जैसे अन्य व्यापारियों ने और भी अधिक पैसा कमाया, जबकि जिनके पास कुछ नहीं था वे और भी अधिक भुखमरी से मर रहे थे.
नॉर्थ कोरिया से भागने में पैसे ने की बहुत मदद
मई 2023 तक, किम इल-ह्योक की पत्नी अपनी गर्भावस्था के दूसरे तिमाही में थीं, और बच्चे के जन्म से पहले बचने का कोई रास्ता खोजने के लिए समय तेजी से बीत रहा था. जब वसंत ऋतु के तूफान से पीला सागर उफान पर आ गया. तब किम परिवार को अपना मौका मिल गया. तट पर भारी बारिश हो रही थी, रडार पर दृश्यता कम हो गई थी – और इसी धुंध का फायदा उठाकर उन्होंने अपना कदम उठाया.
भागने की योजना को अंजाम देने के लिए, भाइयों ने रात के पहरेदारों को रिश्वत दी और कहा कि वे मछली पकड़ने के लिए एक बेहद असंभव रात बिताने जा रहे हैं. भाई तट के किनारे आगे जाकर महिलाओं को छुपकर ले आएंगे. किम ने बताया कि उत्तर कोरिया में पुरुष जहाज पर चढ़ सकते हैं, लेकिन महिलाएं नहीं. कानूनी तौर पर, अगर कोई महिला जहाज पर चढ़ती है, तो उस पर तुरंत अपवित्र इरादों का संदेह किया जाता है और यह मान लिया जाता है कि वह देशद्रोह का प्रयास कर रही है.
तय स्थान तक पहुंचने के लिए महिलाओं को बारूदी सुरंगों से भरे क्षेत्र को पार करना पड़ा – जो उत्तर कोरिया के समुद्र तटीय इलाके का एक भयावह हिस्सा है. लेकिन वर्षों की सावधानीपूर्वक तैयारी के बाद, उन्होंने एक सुरक्षित मार्ग को अच्छी तरह से याद कर लिया था.
किम इल-ह्योक की गर्भवती पत्नी ने अपनी मां, भाभी और किम यी-ह्योक की सास के साथ बारूदी सुरंगों से भरे इलाके को पार किया और सभी तट पर नाव तक पहुंच गईं. किम ने बताया कि लहरें हमारी नाव को चट्टानों से टकराकर तुरंत डुबो सकती थीं, लेकिन हमने हर चीज़ की सावधानीपूर्वक योजना बनाई थी.हम धीरे-धीरे चट्टानों के करीब पहुंचे, जहां हम महिलाओं और बच्चों को नाव पर चढ़ाने में कामयाब रहे.
परिवार की महिलाओं के साथ-साथ बहन के पति के भी इस सफर में शामिल होने से, परिवार के सभी नौ सदस्य अब परिवार के मुखिया की अस्थियों के साथ एक साथ थे. किम ने बताया कि हर कोई एकदम शांत था, सांस लेने की भी आवाज नहीं थी. सबसे तेज आवाज नाव के इंजन की थी, हालांकि हमने साइलेंसर में बदलाव करके आवाज कम करने की कोशिश की थी.
हम धीमी गति से, तेज कदमों की रफ्तार से आगे बढ़ रहे थे, जिससे इंजन से लगातार 'धड़, धड़, धड़' की आवाज आ रही थी. उस गति से, रडार हमें तैरते हुए मलबे के रूप में ही देख पाता. दोनों बच्चे अभी भी बोरी के थैलों में छिपे हुए थे और उन्हें चुप रहने के लिए कहा गया था क्योंकि उत्तर कोरिया उनसे और दूर होता जा रहा था.
जब हमने आखिरकार बोरियां खोलीं, तो उनकी आंखें पूरी तरह खुली हुई थीं और उन्होंने कोई आवाज नहीं की थी. वह सचमुच चमत्कारों की रात थी. किम ने आगे कहा कि मेरी धड़कन की आवाज इंजन की आवाज से भी तेज हो गई थी. उन्होंने उस रात के सबसे तनावपूर्ण पल को याद करते हुए कहा कि मैं इतना तनाव में था कि मेरे दिल की धड़कन मेरे कानों में सुनाई दे रही थीं. चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ था, कोई भी कुछ नहीं बोल रहा था.
लगभग दो घंटे बाद, किम परिवार दक्षिण कोरियाई क्षेत्र में प्रवेश कर गया था. यह एक दुर्लभ उपलब्धि थी. जिसे असाधारण गति से हासिल किया गया. उत्तर कोरियाई नागरिक जो देश की भूमि और सीमा पार करके चीन में प्रवेश करते हैं. अक्सर अपनी यात्रा में महीनों या वर्षों का समय लगने का वर्णन करते हैं. क्योंकि वे भगोड़ों को निर्वासित करने के लिए नियुक्त अधिकारियों से बचने की कोशिश करते हैं.
किम परिवार ने सबसे पहले दक्षिण कोरिया के येओनप्योंग द्वीप को देखा, जो आधी रात में भी उजाले की तरह जगमगा रहा था. किम इल-ह्योक ने एक सर्चलाइट चालू की और दक्षिण कोरियाई नौसेना का एक जहाज उनकी ओर बढ़ने लगा. किम ने बताया कि दक्षिण कोरियाई नौसेना ने लाउडस्पीकर पर हमसे पूछा कि क्या हमारा इंजन खराब हो गया है, ताकि वे हमारी मंशा का पता लगा सकें. हमने जवाब दिया, 'नहीं, हमारा इंजन खराब नहीं हुआ है. हम उत्तर कोरियाई मछुआरे हैं जो दक्षिण कोरिया भागकर आए हैं.
किम ने बताया कि ऐसा लगा जैसे मेरे कंधों से बहुत बड़ा बोझ उतर गया हो. मेरी पत्नी बहुत भावुक थी क्योंकि हम उसके परिवार को पीछे छोड़ आए थे. रोने के कारण उसकी आंखें सूजी हुई थीं. बाकी महिलाएं कुछ स्तब्ध और भावहीन लग रही थीं, लेकिन उस क्षण हम सभी को राहत महसूस हुई.
अपने पलायन के चार महीने बाद, दंपति ने एक बेटी, येरी का स्वागत किया .एक साल बाद, पूरा परिवार सियोल के एक शानदार भोज कक्ष में येरी का पहला जन्मदिन मनाने के लिए इकट्ठा हुआ. कई उत्तर कोरियाई शरणार्थी जो दक्षिण कोरिया पहुंचने में सफल हो जाते हैं, उन्हें संघर्ष करना पड़ता है. पार्टी में किम के छोटे भाई यी-ह्योक ने सीएनएन को बताया कि उन्हें स्वतंत्र जीवन में ढलने में समय लग रहा है.
किम यी-ह्योक ने एक बार एक इंटरव्यू में कहा था कि कभी-कभी, जब मैं आधी रात को जागता हूं, तो मैं भ्रमित हो जाता हूं, यह सोचकर कि मैं अभी भी उत्तर कोरिया में हूं. वह इंटरव्यू किम यी-ह्योक का आखिरी साक्षात्कार साबित हुआ. भाग्य के एक अप्रत्याशित और बेहद क्रूर मोड़ में, येरी के जन्म समारोह के दो महीने बाद स्कूबा डाइविंग दुर्घटना में यी-ह्योक की मृत्यु हो गई.
उत्तर कोरिया से भाग निकले हुए उनकी पत्नी और दो बच्चे, जिन्हें अभी दो साल भी नहीं हुए थे, अब उस पति और पिता के बिना थे जिन्होंने उन्हें भागने में मदद की थी. किम इल-ह्योक के लिए यह समझना मुश्किल था कि 10 साल की योजना के बाद, उसका भाई केवल 19 महीने की आजादी ही देख पाया.