कर्नाटक के मैसूरु से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों को हैरान कर दिया. वीडियो देखने के बाद कई लोग कहने लगे कि यहां लोगों को सिविक सेंस सिखाना असंभव है. सड़क किनारे सार्वजनिक जगहों पर पेशाब रोकने के लिए लगाए गए शीशों का मकसद लोगों में शर्मिंदगी का एहसास पैदा करना था, ताकि वे ऐसा करने से बचें. लेकिन अब एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स उसी शीशे के सामने खुले में पेशाब करता नजर आ रहा है. इस घटना का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर फैल रहा है और इसके बाद लोगों के बीच सिविक सेंस को लेकर बहस छिड़ गई है.
दरअसल, मैसूरु सिटी कॉर्पोरेशन ने पिछले हफ्ते शहर के सबअर्बन बस स्टैंड के पास सड़क किनारे दीवारों पर स्टील के रिफ्लेक्टिव शीशे लगवाए थे. इसका मकसद लोगों को सार्वजनिक जगहों पर पेशाब करने से रोकना था. अधिकारियों का मानना था कि लोग जब खुद को शीशे में देखेंगे तो शर्म महसूस करेंगे और ऐसा करने से बचेंगे.
सिविक सेंस की ऐसी की तैसी!
वायरल वीडियो में एक व्यक्ति बिना किसी झिझक के उन्हीं शीशों के सामने पेशाब करता दिखाई दे रहा है. वीडियो में बाद में एक दूसरा व्यक्ति वहां पहुंचकर उसे रोकने और समझाने की कोशिश करता है.
इस वीडियो को ‘कर्नाटक पोर्टफोलियो’ नाम के सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर किया गया. वीडियो के कैप्शन में लिखा गया, 'जब शर्म ही नहीं बची, तो शर्मिंदा क्या होना.' वहीं कुछ यूजर्स ने कमेंट करते हुए लिखा कि सिविक सेंस की ऐसी की तैसी, पेशाब लगा है तो करेंगे ही. एक अन्य यूजर ने कहा कि इतना खर्चा करके शीशे लगवाए, एक सुलभ शौचालय भी बनवा देते. किसी को पेशाब लगे तो आखिर जाए कहां?
देखें वायरल वीडियो
पोस्ट में कहा गया कि शीशे लगाए हुए अभी एक हफ्ता भी नहीं हुआ है, लेकिन कुछ लोग बिना किसी हिचकिचाहट के वही हरकत कर रहे हैं. पोस्ट में यह भी लिखा गया कि अगर नागरिक अपनी सोच नहीं बदलेंगे, तो कोई भी पहल पूरी तरह सफल नहीं हो सकती.
मैसूरु प्रशासन की यह पहल सोशल मीडिया पर पहले काफी सराही गई थी. कई लोगों ने इसे स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ी एक अनोखी कोशिश बताया था. लेकिन अब सामने आए इस वीडियो ने लोगों के बीच नाराजगी बढ़ा दी है.