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कम्फर्ट जोन में रहना पड़ा महंगा! माइक्रोसॉफ्ट इंजीनियर ने बताया क्यों 4 साल लेट हुई सैलरी ग्रोथ

माइक्रोसॉफ्ट के एक टेक्निकल एक्सपर्ट ने बताया कि एक ही कंपनी में लंबे समय तक काम करने और वफादारी के कारण उनकी सैलरी ग्रोथ में 4 साल की देरी हुई. उन्होंने माना कि असली समस्या कंपनी नहीं, बल्कि कम्फर्ट जोन में रहना था. बाद में स्किल्स पर काम और जॉब बदलने से उनके करियर में तेजी से बदलाव आया.

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करियर में आगे बढ़ने के लिए कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना जरूरी है. ( Photo: Instagram/ @saileshgurung97)
करियर में आगे बढ़ने के लिए कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना जरूरी है. ( Photo: Instagram/ @saileshgurung97)

आज के समय में लोग करियर में तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन कई बार कुछ फैसले ऐसे होते हैं जो हमारी ग्रोथ को धीमा कर देते हैं. हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट के एक टेक्निकल एक्सपर्ट ने अपनी ऐसी ही एक गलती के बारे में बताया, जिसने उनकी सैलरी बढ़ने में 4 साल की देरी कर दी. इस इंजीनियर का नाम शैलेश गुरुंग है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों का अनुभव बताया.

टीसीएस से की थी शुरुआत
शैलेश ने अपने करियर की शुरुआत टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी TCS से की थी. उन्होंने वहां करीब 4 साल तक काम किया. इस दौरान उन्होंने पूरी मेहनत और ईमानदारी से काम किया. उन्हें उम्मीद थी कि समय के साथ उनकी सैलरी और ग्रोथ भी तेजी से बढ़ेगी. शैलेश ने बताया कि TCS में काम करते समय उनकी सैलरी बहुत धीरे-धीरे बढ़ रही थी. उन्हें जो इंक्रीमेंट मिला, वह उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं था. उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें लगा कि अगर वह एक ही कंपनी में लंबे समय तक काम करेंगे, तो उन्हें अपने आप बेहतर मौके मिलेंगे. लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि यह सोच गलत थी.

वफादारी बनी सबसे बड़ी गलती
शैलेश ने साफ कहा कि उनकी सबसे बड़ी गलती वफादारी थी. उनका मानना था कि एक कंपनी के साथ लंबे समय तक जुड़े रहने से उन्हें फायदा मिलेगा, लेकिन असल में इससे उनकी ग्रोथ रुक गई. उन्होंने कहा-वफादारी से सैलरी नहीं बढ़ती. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कंपनी पूरी तरह से जिम्मेदार नहीं थी. उन्होंने कहा कि असली समस्या यह थी कि वह अपने कम्फर्ट जोन में रह रहे थे. यानी उन्हें जो माहौल मिला हुआ था, उसमें वह सहज हो गए थे और खुद को आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा प्रयास नहीं कर रहे थे.

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जब लिया बड़ा फैसला
शैलेश ने बताया कि असली बदलाव तब आया, जब उन्होंने खुद पर काम करना शुरू किया. उन्होंने नए स्किल्स सीखे, अपनी क्षमताओं को बढ़ाया और अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने का फैसला किया. इसके बाद उन्होंने नौकरी बदली और उनका करियर तेजी से आगे बढ़ने लगा. शैलेश का करियर तब बदल गया, जब उन्होंने TCS छोड़कर दूसरी कंपनियों में काम करना शुरू किया. उन्होंने Deloitte में काम किया और फिर आगे चलकर माइक्रोसॉफ्ट तक पहुंच गए. उन्होंने कहा कि इस पूरे सफर ने उन्हें सिखाया कि ग्रोथ के लिए सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि सही फैसले लेना भी जरूरी है.

सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया
शैलेश की इस बात पर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई. कुछ लोगों ने उनकी बात से सहमति जताई और कहा कि उन्होंने भी अपने करियर में ऐसा ही अनुभव किया है. एक यूजर ने लिखा- मैंने भी कई साल एक ही कंपनी में बिताए और बाद में समझ आया कि यह वफादारी नहीं, बल्कि आलस था. वहीं कुछ लोगों का मानना था कि वफादारी भी जरूरी होती है, लेकिन इसके साथ खुद को बेहतर बनाना भी उतना ही जरूरी है.

करियर में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ मेहनत और वफादारी काफी नहीं है. जरूरी है कि हम समय-समय पर खुद को अपडेट करें, नए स्किल्स सीखें और सही मौके पर सही फैसले लें.

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