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'पहले ISRO में था, अब एक रेस्टोरेंट में मैनेजर!' साइंटिस्ट ने बताया- क्यों छोड़ा रॉकेट मिशन? वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में रेस्टोरेंट का मैनेजर खुद को ISRO का पूर्व साइंटिस्ट-इंजीनियर बताता है. 16 साल तक सैटेलाइट असेंबली जैसे तनावपूर्ण काम के बाद उसने मानसिक शांति के लिए करियर ब्रेक लिया. इस कहानी ने वैज्ञानिकों पर काम के दबाव और सुविधाओं को लेकर बहस छेड़ दी है.

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सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में रेस्टोरेंट के मैनेजर ने खुद को ISRO का पूर्व साइंटिस्ट-इंजीनियर बताया. ( Photo: Instagra/@guywithmetaglasses)
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में रेस्टोरेंट के मैनेजर ने खुद को ISRO का पूर्व साइंटिस्ट-इंजीनियर बताया. ( Photo: Instagra/@guywithmetaglasses)

कभी-कभी जिंदगी की सबसे गहरी कहानियां सबसे साधारण जगहों पर सामने आ जाती हैं. ऐसी ही एक कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें एक रेस्टोरेंट में हुई आम-सी बातचीत ने सबको हैरान कर दिया. वीडियो में दिखाया गया है कि एक कस्टमर रेस्टोरेंट में खाना खाते हुए वहां खड़े एक व्यक्ति से पूछता है कि क्या वह मैनेजर है. सामने खड़ा व्यक्ति शांति से जवाब देता है-'हां. कस्टमर आगे पूछता है कि उसे यहां काम करते हुए कितना समय हो गया है. मैनेजर जवाब देता है-'तीन महीने'.

ISRO छोड़कर कर रहे रेस्टोरेंट में काम
इसके बाद जो बातचीत होती है, वह हर किसी को चौंका देती है. रेस्टोरेंट का मैनेजर बताता है कि इससे पहले वह ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) में काम करता था. यह सुनकर कस्टमर हैरान रह जाता है और पूछता है कि वहां वह क्या करता था. मैनेजर जवाब देता है—मैं वहां रॉकेट साइंटिस्ट-इंजीनियर था. कस्टमर विश्वास नहीं कर पाता और दोबारा पूछता है—'आप ISRO छोड़कर यहां आ गए?' मैनेजर बिना किसी अफसोस के कहता है- हां, मैंने वहां 16 साल काम किया और फिर छोड़ दिया और वह एक ही शब्द में जवाब देता है-'बहुत टेंशन था.'

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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'सैटेलाइट असेंबलिंग का काम बेहद तनावपूर्ण'
इसके बाद वह अपने काम की गंभीरता को समझाते हुए बताता है कि ISRO में सैटेलाइट असेंबलिंग का काम बेहद तनावपूर्ण होता है. वहां टॉलरेंस लेवल 0.01 या उससे भी कम होता है. एक छोटे से पार्ट को जोड़ने के लिए कई हिस्से आते हैं, और हर पार्ट की माप बिल्कुल सटीक होनी चाहिए. अगर जरा-सी भी गड़बड़ी हो जाए, तो पूरा सिस्टम फेल हो सकता है.

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वह उदाहरण देते हुए कहता है कि एक इंसान के बाल की मोटाई लगभग 0.004 माइक्रोन होती है. अगर असेंबली के दौरान गलती से एक बाल भी दो पार्ट्स के बीच गिर जाए, तो टॉलरेंस बढ़कर 0.05 हो सकता है, जो पूरे मिशन को खराब कर सकता है. ऐसी सटीकता और लगातार दबाव में काम करते-करते दिमाग थक जाता है.

'यहां कोई टेंशन नहीं है, दिमाग शांत रहता है'
कस्टमर यह सब सुनकर भावुक हो जाता है और कहता है- सर, आप बैठिए… आप इस देश का फ्यूचर हैं. लेकिन मैनेजर मुस्कुराते हुए कहता है कि यहां रेस्टोरेंट में उसे सुकून मिलता है. यहां कोई टेंशन नहीं है, दिमाग शांत रहता है.' वह आगे बताता है कि उसने अमेरिका में NASA के लिए भी आवेदन किया था, लेकिन कुछ पेपरवर्क की वजह से वह मौका नहीं मिल पाया. इसलिए उसने फिलहाल करियर ब्रेक लेने और मानसिक शांति के लिए यह काम चुना है. 'अभी थोड़ा आराम कर रहा हूं,'.

सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल
इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूज़र्स जमकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं. thefightingmonk777 नाम के यूज़र ने लिखा कि सरकार वैज्ञानिकों और सार्वजनिक क्षेत्र के इंजीनियरों को बहुत कम वेतन देती है. 1402lightyears ने लिखा कि यह व्यक्ति अपने फैसले को लेकर बेहद शांत और आत्मविश्वास से भरा हुआ नजर आता है, क्योंकि वह अपने कौशल और अनुभव को जानता है. वहीं felis.the.catus ने टिप्पणी की कि यह दुखद है कि हमारे वैज्ञानिकों को बेहतर अवसरों के लिए दूसरे रास्ते देखने पड़ते हैं, जबकि नेताओं के पास सुविधाओं की कोई कमी नहीं.

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नोट: आजतक.इन इस कहानी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है. यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और उसमें किए गए दावों पर आधारित है.

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