बिजली उत्पादक तथा उपकरण बनाने वाली कंपनियों के विरोध एवं समर्थन के बीच सरकार आगामी बजट में आयातित पॉवर गीयर पर 10 से 12 प्रतिशत शुल्क लगा सकती है.
सूत्रों के अनुसार आर्थिक मामलों के विभाग ने राजस्व विभाग से प्रस्तावित शुल्क पर निर्णय करने को कहा गया है और यह शुल्क 10 से 12 प्रतिशत हो सकता है. एक तरफ जहां भारी उद्योग विभाग (डीएचआई) तथा बिजली मंत्रालय 14 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने के पक्ष में हैं वहीं आर्थिक मामलों के विभाग का मानना है कि 10 से 12 प्रतिशत शुल्क पर्याप्त है.
सूत्रों ने कहा कि इस बारे में काम किया जा रहा है. आर्थिक विभाग के अनुसार उच्च शुल्क ढांचा से वैश्विक निवेशकों को न केवल गलत संदेश जाएगा बल्कि उत्पादन लागत में भी वृद्धि होगी. बिजली उत्पादक खासकर निजी क्षेत्र की कंपनियां भी यह दलील दे रही हैं.
योजना आयोग के सदस्य अरूण मैरा ने 10 प्रतिशत सीमा शुल्क तथा 4 प्रतिशत अतिरिक्त विशेष शुल्क लगाने का सुझाव दिया था. फिलहाल 1,000 मेगावाट क्षमता से कम बिजली परियोजनाओं के उपकरणों के आयात पर 5 प्रतिशत शुल्क लगता है जबकि शेष परियोजनाओं के लिये उपकरणों के आयात पर कोई शुल्क नहीं लगता. आयातित बिजली उपकरणों पर उंचा आयात शुल्क लगाने के पीछे भेल और एल एण्ड टी जैसी घरेलू कंपनियों को समान स्तर उपलब्ध कराना है.