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ईश्वर को नहीं मानती थी महिला, मौत के करीब पहुंचकर कुछ ऐसा देखा कि बदल गई सोच, बताया अनुभव

मौत के बाद क्या होता है.यह सवाल सदियों से इंसान को परेशान करता आया है. धर्म, विज्ञान और दर्शन में इस पर लगातार बहस होती रही है, लेकिन आज तक कोई ठोस जवाब नहीं मिल पाया. इसी बीच दुनिया में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो दावा करते हैं कि उन्होंने मौत के करीब जाकर मौत के बाद का अनुभव महसूस किया. ऐसी ही एक कहानी अमेरिका की एरिका टेट की है.

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 एरिका के मुताबिक, उन्होंने एक बेहद चमकदार सफेद रोशनी देखी (Photo:Insta/@ericatait.spiritualtherapist)
एरिका के मुताबिक, उन्होंने एक बेहद चमकदार सफेद रोशनी देखी (Photo:Insta/@ericatait.spiritualtherapist)

अमेरिका के न्यू जर्सी में साल 2015 में हुई एक खतरनाक दुर्घटना ने 22 साल की एरिका टेट (Erica Tait) की जिंदगी ही नहीं, सोच भी पूरी तरह बदल दी. एक रोमांचक हाइकिंग ट्रिप पर अकेले निकली एरिका बिना किसी सेफ्टी इक्विपमेंट के पैलिसेड्स क्लिफ्स पर चढ़ाई कर रही थीं, तभी उनका पैर फिसल गया और वह करीब 60 फीट नीचे चट्टानों पर जा गिरीं.

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हादसे में एरिका की रीढ़ की हड्डी, पेल्विस, दोनों हाथ और कई पसलियां टूट गईं, वहीं दोनों फेफड़े भी गंभीर रूप से घायल हो गए. हालत इतनी नाजुक थी कि सांस लेना तक मुश्किल हो गया. चमत्कार यह रहा कि उन्होंने किसी तरह फोन से मदद के लिए कॉल कर दी, लेकिन अपनी सही लोकेशन नहीं बता सकीं. इसके बाद एरिका को सात घंटे तक दर्द में तड़पते हुए रेस्क्यू का इंतज़ार करना पड़ा.

अस्तित्व शरीर नहीं, बल्कि कुछ ऐसा है जो कभी खत्म नहीं होता

एरिका का दावा है कि इसी दौरान उन्हें एक ऐसा अनुभव हुआ, जिसने उनकी पूरी सोच बदल दी. उन्होंने बताया कि उनका दर्द जैसे अचानक खत्म हो गया और उनकी चेतना शरीर से अलग होकर ऊपर की ओर चली गई. उन्हें गहरी शांति महसूस हुई और पहली बार एहसास हुआ कि उनका असली अस्तित्व शरीर नहीं, बल्कि कुछ ऐसा है जो कभी खत्म नहीं होता.

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एरिका के मुताबिक, उन्होंने एक बेहद चमकदार सफेद रोशनी देखी, जिसे वह ईश्वर या ‘यूनिवर्सल कॉन्शसनेस’ जैसा बताती हैं. उस पल उन्हें महसूस हुआ कि इस ब्रह्मांड में सब कुछ एक ही ऊर्जा से जुड़ा है, बस कंपन की गति अलग-अलग है.

 

पूरे जीवन की झलक

मौत के बेहद करीब पहुंच चुकी एरिका ने बताया कि उन्हें अपने पूरे जीवन की झलक एक फिल्म की तरह दिखी. इस दौरान कोई उन्हें जज नहीं कर रहा था, बल्कि वह खुद अपने सबसे निष्पक्ष रूप में अपने फैसलों और बीते अनुभवों को देख रही थीं. उन्हें साफ दिखा कि उनके कुछ फैसलों से उन्होंने खुद को और दूसरों को कैसे चोट पहुंचाई.

‘हम सब एक हैं’-यही सबसे बड़ा संदेश

 एरिका कहती हैं कि उस अनुभव से उन्हें यह सबसे बड़ा सच समझ आया कि हम सब असल में एक ही अस्तित्व का हिस्सा हैं. किसी और को चोट पहुंचाना, खुद को चोट पहुंचाने जैसा ही है. इंसान का असली मकसद यही है कि वह इस एकता को याद रखे और करुणा के साथ जीवन जिए.

नास्तिक से आध्यात्मिक सफर तक

इस हादसे से पहले एरिका खुद को नास्तिक मानती थीं और सिर्फ वही मानती थीं, जो आंखों से दिखे. लेकिन इस ‘नियर डेथ एक्सपीरियंस’ ने उन्हें आध्यात्मिक सोच की ओर मोड़ दिया. अब 33 साल की एरिका न्यू जर्सी में एक साइकोथेरेपी बिजनेस चलाती हैं, जहां वह मनोविज्ञान, बॉडी-हीलिंग और आध्यात्मिक तरीकों को मिलाकर लोगों की मदद करती हैं.एरिका का कहना है कि उनका मकसद अब सिर्फ एक है खुद को और दूसरों को यह याद दिलाना कि हम कौन हैं और क्यों यहां हैं.
 

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