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'आपका नाम एपस्टीन फाइल्स में है' जब CEO को मिला ये मेल, फिर जो हुआ वो वायरल हो गया

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक मामला तेजी से वायरल हो रहा है. दिल्ली की एक कंपनी के सीईओ को ऐसा ईमेल मिला, जिसकी सब्जेक्ट लाइन थी-आपका नाम एपस्टीन फाइल में है.पहले पल में मामला गंभीर लगा, लेकिन जब सीईओ ने मेल खोला तो सच्चाई कुछ और निकली.

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मेल भेजने वाला IIT हैदराबाद के CSE का छात्र था (Photo: X/@Harshdeeprapal)
मेल भेजने वाला IIT हैदराबाद के CSE का छात्र था (Photo: X/@Harshdeeprapal)

स्टार्टअप की दुनिया में नौकरी या इंटर्नशिप पाने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते. लेकिन IIT हैदराबाद के एक छात्र की एक चाल इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा में है. वजह बना एक ऐसा ईमेल, जिसकी सब्जेक्ट लाइन ने सीधे सीईओ को चौंका दिया और इंटरनेट पर बहस छेड़ दी.

लेगिट एआई के फाउंडर और सीईओ हर्षदीप रापाल को जो मेल मिला, उसकी सब्जेक्ट लाइन थी-'आपका नाम एपस्टीन फाइलों में है.' यह पढ़ते ही किसी का भी दिल बैठ जाए. रापाल भी एक पल के लिए सन्न रह गए. लेकिन जब उन्होंने ईमेल खोला, तो कहानी कुछ और निकली. पहली ही लाइन थी-'मजाक कर रहा था, मैं चाहता था कि आप मेल खोलें.' यानी पूरा मामला सिर्फ अटेंशन पाने का था.

मेल भेजने वाला IIT हैदराबाद के CSE का छात्र था. उसने आगे लिखा कि उसने कंपनी की वेबसाइट देखी और खासतौर पर स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स असिस्टेंट की अवधारणा में उसकी दिलचस्पी है. उसने अपना परिचय दिया, चर्चा की इच्छा जताई और अपना रिज्यूमे भी अटैच कर दिया. मकसद साफ तौर पर पेशेवर था, लेकिन शुरुआत इतनी चौंकाने वाली थी कि वही चर्चा का केंद्र बन गई.

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रापाल ने इस मेल का स्क्रीनशॉट X पर शेयर किया, छात्र का नाम छुपाते हुए, और साफ संदेश दिया-दोस्तों, कृपया ऐसा न करें.उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी अनुबंधों के कारोबार में काम करती है, जो बेहद गंभीर क्षेत्र है. यहां जवाबदेही, स्वामित्व और पेशेवर रवैया सबसे अहम है. अगर पहला ईमेल ही ऐसे सब्जेक्ट और ओपनिंग मैसेज से भरा हो, तो ज्यादातर फाउंडर जवाब देना पसंद नहीं करेंगे.

 

उन्होंने यह भी कहा कि हताशा कभी-कभी लोगों को शॉर्टकट अपनाने पर मजबूर कर देती है, लेकिन यह तरीका फायदेमंद नहीं होता. कॉलेज प्रोजेक्ट्स और असली बिजनेस टीम का हिस्सा बनने में बड़ा फर्क है, और यह फर्क समझना जरूरी है.

पोस्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. कई यूजर्स ने छात्र के तरीके को अपरिपक्व बताया. किसी ने कहा कि इस सोच के साथ, भले ही उम्मीदवार कितना भी कुशल क्यों न हो, नौकरी मिलना मुश्किल है. तो किसी ने इसे गैर-गंभीर और अस्वीकार्य करार दिया.

इस पूरे मामले ने एक बार फिर साफ कर दिया-वायरल होने की कोशिश और प्रोफेशनल छवि बनाने में जमीन-आसमान का फर्क है. पहला ईमेल ही आपकी पहचान बनाता है. गलत शुरुआत, और मौका शुरू होने से पहले ही खत्म.

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