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यहां चिकन खिलाकर दूल्हा पसंद करती है लड़की... अगर ना है तो वसूलती है कीमत

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न संस्कृतियां पनपती हैं. इनमें से कुछ काफी बड़े भूभाग में फैली हुई हैं और उनके रस्म और रिवाजों से हम सब परिचित होते हैं. वहीं कुछ विशेष जतीय समूह सुदूर इलाकों में काफी कम संख्या में हैं और इनकी परंपराएं भी काफी पुरानी और अनूठी हैं, जो आधुनिक समाज के लिए थोड़ी असामान्य लग सकती है. आज हम ऐसी एक जातीय समुदाय के बारे में जानेंगे, जिनके बीच शादी पक्की करने के लिए चिकन खिलाने का अनूठा रिवाज है.

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यहां शादी के लिए दूल्हा ढूंढने का ये है अनोका रिवाज (Representational Photo - AP)
यहां शादी के लिए दूल्हा ढूंढने का ये है अनोका रिवाज (Representational Photo - AP)

हर देश में कुछ ऐसे जातीय समुदाय मिल जाएंगे, जिनकी परंपराएं काफी अलग होती हैं. चीन में एक अल्पसंख्यक समुदाय है, जिसमें  महिलाएं दूल्हा ढूंढने के लिए और अवांछित दूल्हों को अस्वीकार करने के लिए चिकन खिलाने का एक रस्म निभाती है. अगर कोई पसंद है तो उसके साथ चिकन खाकर सहमति जताती है और न होने पर चिकन की दोगुनी कीमत वसूलती है.  

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, दाई जातीय अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का प्रेम संबंध बनाने का एक अनोखा तरीका है. महिलाएं नव वर्ष के दौरान मुर्गियां लेकर बाजार में रिश्ते तय करने की कोशिश करती हैं. इस उम्मीद में कि इससे उन्हें अच्छे रिश्ते मिलेंगे. वे पक्षियों को रिश्ते तय करने के उपकरण के रूप में इस्तेमाल करती हैं.

विवाह के लिए योग्य दूल्हा खोजने के लिए चिकन का इस्तेमाल दक्षिण-पश्चिमी चीन के युन्नान प्रांत के शीशुआंगबन्ना में रहने वाले दाई जातीय समूह द्वारा प्रचलित एक प्रेम-प्रसंग प्रथा है. दाई जनजाति, जिसकी अनुमानित जनसंख्या 13 लाख है. मुख्य रूप से युन्नान के शीशुआंगबन्ना दाई स्वायत्त प्रान्त और देहोंग दाई और जिंगपो स्वायत्त प्रान्त में रहती है.

दाई भाषा में इस प्रथा को युएसाओ कहा जाता है , जबकि स्थानीय हान लोग इसे चुआन गुनियांग कहते हैं , जिसका शाब्दिक अर्थ है "लड़कियों से मिलना". इस परंपरा का मूल आधार युवा पुरुषों और महिलाओं के बीच एक अनूठी रोमांटिक बातचीत है जो स्थानीय बाजारों में मुर्गे के मांस के आदान-प्रदान के माध्यम से होती है.

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अगर दूल्हा पंसद आ गया तो
इस रिवाज के दौरान, युवक सुंदर और दयालु महिलाओं की तलाश करते हैं. जबकि महिलाएं मेहनती और साहसी पुरुषों की तलाश करती हैं. दाई नव वर्ष के दिन, मुर्गों को काटा जाता है और मांस पकने के बाद, युवतियां अपने सबसे अच्छे पारंपरिक परिधान पहनकर उसे बाजार ले जाती हैं. इस उम्मीद में कि जिस युवक की वे प्रशंसा करती हैं, वह उसे खरीदने आएगा.

जब हंसमुख युवक आकर कीमत पूछते हैं, तो रुचि न रखने वाली लड़की जवाब देती हैं- पहले खा लीजिए, फिर पैसे की बात होगी. फिर बाद में लड़के से  दोगुनी कीमत वसूली जाती है. इसे उन्हें विनम्रतापूर्वक मना करने का तरीका माना जाता है.

वहीं, अगर लड़की को वह युवक पसंद आता है, तो वह उसे एक स्टूल देगी और उसे अपने बगल में बैठने के लिए आमंत्रित करती है. उस समय, वह युवक शायद कहे - हम दाई लोगों में एक कहावत है. भोजन का स्वाद तब और बढ़ जाता है जब उसे साझा किया जाता है और बोझ तब हल्का लगता है, जब उसे साथ मिलकर उठाया जाता है. अगर हम साथ मिलकर खाएंगे, तो चिकन का स्वाद और भी अच्छा लगेगा.

जिस पर लड़की जवाब देती है- खुले मन से खाने पर इसका स्वाद बेहतर लगता है, और खुले मन से खाने पर यह आसान भी होता है. यहां बहुत शोर है, इसलिए चलो इसे जंगल में ले जाकर खाते हैं. इसके बाद दोनों चिकन और अपने स्टूल को लेकर शांत जंगल में चले जाते हैं. जहां वे एक-दूसरे के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकते हैं.

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इस तरह के रोमांटिक संबंध बनाने का रिवाज साल में केवल 15 अक्टूबर से लेकर अगले वर्ष के फरवरी महीने के बीच ही चलता है. खेती-बाड़ी के व्यस्त मौसम के दौरान, जो 15 जुलाई से 15 अक्टूबर तक चलता है, ऐसा करना पर सख्त प्रतिबंध होता है.

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