मिडिल ईस्ट में पिछले 40 दिनों से जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग फिलहाल थम गई है. सीजफायर का ऐलान हो चुका है, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं. दुनिया भर में इस बात को लेकर चिंता बनी हुई है कि यह संघर्ष दोबारा भड़क सकता है. लेबनान पर हमलों की खबरें जारी हैं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति भी जस की तस बनी हुई है.
इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी सैनिक अभी भी अपने बेस पर मौजूद हैं और हालात पहले जैसे ही हैं. उन्होंने संकेत दिया कि सिर्फ एक आदेश की देरी है और जंग फिर से शुरू हो सकती है. ऐसे में सबसे ज्यादा दबाव उन सैनिकों पर है, जो हजारों किलोमीटर दूर अनिश्चित परिस्थितियों में तैनात हैं.
अमेरिकी सैनिक किस कदर तनाव में काम कर रहे हैं, इसका अंदाजा एक हालिया खुलासे से लगाया जा सकता है. पेंटागन में 8 अप्रैल 2026 को प्रेस ब्रीफिंग हुई.इसमें डैन कैन ने एक सवाल का जवाब दिया.उन्होंने ‘Operation Epic Fury’ के दौरान सैनिकों की खपत के चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए
9.5 लाख गैलन कॉफी गटक ली
उन्होंने बताया कि करीब 6 हफ्तों तक चले इस ऑपरेशन में अमेरिकी सैनिकों ने 60 लाख से ज्यादा मील्स खाए, 9.5 लाख गैलन कॉफी पी, 20 लाख एनर्जी ड्रिंक्स का इस्तेमाल किया और 'बहुत सारा निकोटीन. लिया. ये आंकड़े यह भी बताते हैं कि लगातार हाई-प्रेशर माहौल में सैनिकों को खुद को सतर्क और सक्रिय बनाए रखने के लिए किन चीजों का सहारा लेना पड़ा.
76 लाख कप काफी!
इन आंकड़ों को आसान भाषा में समझें तो 9.5 लाख गैलन कॉफी करीब 76 लाख कप के बराबर होती है. यानी अगर हर मिनट एक कप कॉफी पी जाए, तो इसे खत्म करने में 14 साल से ज्यादा समय लग जाएगा. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस पूरे ऑपरेशन के दौरान सैनिकों के लिए कैफीन किसी ईंधन से कम नहीं था.
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ब्रीफिंग के दौरान जनरल कैन ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा मैं यह नहीं कह रहा कि हमें कोई समस्या है. इस बयान पर वहां मौजूद पत्रकारों के बीच हल्की हंसी भी देखने को मिली. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह ऑपरेशन बेहद कठिन परिस्थितियों में चलाया गया. उनके अनुसार, हालात अफरा-तफरी, गर्म, अंधेरे और अनिश्चित थे, जहां हर कदम पर जोखिम बना हुआ था
सीजफायर के बावजूद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और सैनिक अब भी तैनात हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जंग जैसे हालात में कैफीन और एनर्जी ड्रिंक्स वास्तव में सैनिकों के लिए एक जरूरी सहारा बन चुके हैं?