कश्मीर में बीएसएफ के जवानों ने कड़ाके की ठंड और बर्फ के बीच बिहू उत्सव मनाया. बता दें, असम में 14 जनवरी से अगले तीन दिन तक बिहू का पर्व मनाया जा रहा है. इसे माघ महीने में माघ बिहू (भोगाली बिहू), वैशाख में बोहाग बिहू और कार्तिक में काटी बिहू के रूप से मनाया जाता है.
अपने घरों से दूर देश की रक्षा के लिए LOC पर तैनात बीएसएफ के जवानों ने इस मौके पर नृत्य करके बिहू का जश्न मनाया. इसका एक वीडियो भी ट्विटर पर वायरल हुआ है, जिसमें देखा जा सकता है कि केरन सेक्टर में बीएसएफ के कुछ जवान बर्फ के बीचों बीच नाच और गा रहे हैं.
BSF कश्मीर के ट्विटर अकाउंट से इस वीडियो को 16 जनवरी को शेयर किया गया है. यह वीडियो लोगों को खूब पसंद आ रहा है.
Mountains and mountains of snow, blinding blizzards, freezing temperatures, stress of 24 hours vigil , away from homes; this all didn’t deter BSF troops to dance few steps & celebrate at FDL in Sector .
— BSF Kashmir (@BSF_Kashmir)
इस पर कई लोग अपने-अपने रिएक्शन्स भी दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, ''हैप्पी भोगाली बिहू. जय हिंद.'' एक अन्य यूजर ने लिखा, ''एक खूबसूरत रिश्ता. इस देश से है.'' तीसरे यूजर ने लिखा, ''बहुत बढ़िया.''
Great job
— PK 9 (@PK961511195)
एक खूबसूरत रिश्ता ,
इस वतन से है।🇮🇳❤️
— Hari Om Mishra 🇮🇳❤️ (@HariOm57650409)
Happy Bhogali bihu ....Jai hind
— Dharmendra Das (@Dharmen45567449)
वहीं, इससे पहले भारतीय सेना के जवानों ने जम्मू कश्मीर के बारामूला जिले में एलओसी पर कुछ इसी तरह लोहड़ी मनाई थी. वीडियो में आप देख सकते हैं कैसे जवान पंजाबी गानों पर एक साथ मस्ती से झूम रहे हैं. और पूंछ में बीएसएफ के जवानों ने भी बड़े ही हर्षोल्लास के साथ लोहड़ी का पर्व मनाया था.
Jammu and Kashmir | Indian Army Jawans celebrate along LOC in Baramulla district
(Video Souce: Indian Army)
— ANI (@ANI)
: Jammu and Kashmir | BSF personnel celebrate in Poonch district
— ANI (@ANI)
कैसे मनाते हैं बिहू माघ
बिहू की शुरुआत लोहड़ी के दिन होती है. इसे उरुका कहते हैं. इस दिन सभी लोग पवित्र नदियों और सरोवरों में आस्था की डुबकी लगाते हैं. इसके बाद नदी के पास सार्वजनिक स्थल पर पुआल की छावनी बनाते हैं. इस घर को भेलाघर कहा जाता है. इस स्थल पर उरुका की रात्रि को भोज का आयोजन किया जाता है. इसमें सात्विक भोजन बनाया जाता है. भोजन सर्वप्रथम ईश्वर को भोग लगाया जाता है. इसके बाद सभी लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं.