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बिना सेफ्टी 101 मंजिला इमारत पर चढ़े पर्वतारोही एलेक्स होनोल्ड, थम गई लोगों की सांसें

अमेरिकी पर्वतारोही एलेक्स होनोल्ड ने ताइवान की मशहूर ताइपे 101 इमारत पर बिना किसी सुरक्षा उपकरण के चढ़ाई कर इतिहास रच दिया. करीब 508 मीटर ऊंची इस 101 मंजिला इमारत पर उन्होंने 90 मिनट में फ्री सोलो क्लाइम्बिंग की. इस साहसिक कारनामे को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और दुनियाभर से उन्हें सराहना मिली.

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इस साहसिक कारनामे के लिए उन्हें दुनियाभर से सराहना मिली. ( Photo: X/@OttoHuang120)
इस साहसिक कारनामे के लिए उन्हें दुनियाभर से सराहना मिली. ( Photo: X/@OttoHuang120)

अमेरिका के मशहूर पर्वतारोही एलेक्स होनोल्ड ने एक बार फिर दुनिया को हैरान कर दिया है. उन्होंने ताइवान की मशहूर 101 मंजिला गगनचुंबी इमारत ताइपे 101 पर बिना किसी सुरक्षा उपकरण के चढ़ाई कर ली. इस दौरान न तो उन्होंने रस्सी का इस्तेमाल किया, न हार्नेस और न ही किसी तरह की सेफ्टी बेल्ट. करीब 508 मीटर ऊंची इस इमारत पर होनोल्ड ने नीचे से चढ़ना शुरू किया. उन्होंने इमारत के कोने में बने छोटे-छोटे उभारों, सजावटी किनारों और एल-आकार की संरचनाओं का सहारा लिया।. आमतौर पर जंगलों और पहाड़ों में अकेले चढ़ाई करने वाले होनोल्ड के लिए यह अनुभव अलग था, क्योंकि यह चढ़ाई एक व्यस्त शहर के बीच हो रही थी और नीचे सड़क पर मौजूद लोग उन्हें देखकर लगातार तालियां बजा रहे थे.

करीब 90 मिनट की मेहनत के बाद शिखर पर पहुंचे
करीब 90 मिनट की मेहनत के बाद जब होनोल्ड शिखर पर पहुंचे, तो नीचे मौजूद भीड़ खुशी से झूम उठी. लाल रंग की टी-शर्ट पहने होनोल्ड ने ऊपर पहुंचकर हाथ हिलाया और जीत का जश्न मनाया. ऊपर से ताइपे शहर का नज़ारा बेहद खूबसूरत दिख रहा था. चढ़ाई के बाद एलेक्स होनोल्ड ने कहा कि ऊपर बहुत तेज़ हवा चल रही थी और संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण था. उन्होंने कहा- नज़ारा अविश्वसनीय था. यह ताइपे को देखने का सबसे खूबसूरत तरीका था. 

चढ़ाई का सबसे कठिन हिस्सा
ताइपे 101 का डिज़ाइन अपने आप में चुनौती भरा है. इमारत के बीच के हिस्से में बांस के डिब्बों जैसी संरचना बनी हुई है, जहां खड़ी और फिसलन भरी सतहें हैं. हर सेक्शन में आठ-आठ मंजिलें हैं, जिन पर चढ़ना बेहद मुश्किल होता है. कुछ जगहों पर बालकनियां थीं, जहां होनोल्ड थोड़ी देर रुककर सांस लेते रहे. कई बार उन्हें बड़ी-बड़ी सजावटी संरचनाओं के बीच से रास्ता बनाकर अपने हाथों के सहारे खुद को ऊपर खींचना पड़ा. बारिश के कारण यह चढ़ाई एक दिन टाल दी गई थी, जिसके बाद इसे नेटफ्लिक्स पर लाइव दिखाया गया.

लोगों को प्रेरित करना है मकसद
होनोल्ड का कहना है कि वह चाहते हैं कि लोग इस चढ़ाई को सिर्फ एक तमाशे की तरह न देखें, बल्कि इससे प्रेरणा लें. उन्होंने कहा कि जीवन का समय सीमित होता है और लोगों को उसे सार्थक तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए. इस ऐतिहासिक चढ़ाई पर ताइवान के राष्ट्रपति ने भी एलेक्स होनोल्ड की तारीफ की और इसे ताइवान की भावना और खूबसूरती का प्रतीक बताया. वहीं ब्रिटेन के मशहूर प्रसारक पियर्स मॉर्गन और एडवेंचर एक्सपर्ट बेयर ग्रिल्स ने भी होनोल्ड के साहस और हुनर की सराहना की.

पहले भी हुई थी चढ़ाई, लेकिन यह सबसे खास
ताइपे 101 पर पहले भी चढ़ाई हो चुकी है. साल 2004 में फ्रांसीसी पर्वतारोही एलेन रॉबर्ट ने सुरक्षा रस्सी के साथ इस इमारत पर चढ़ाई की थी. लेकिन बिना किसी सुरक्षा के पूरी तरह फ्री सोलो चढ़ाई पहली बार एलेक्स होनोल्ड ने ही की है.

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