करमापा के अस्थायी आवास से भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा की बरामदगी के मामले में जांच के दायरे को बढ़ाते हुए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने उनके सचिव से घंटों पूछताछ की और उनके सहायक के आवास और दफ्तर की तलाशी ली. इसके अतिरिक्त एक स्थानीय व्यापारी के आवास पर भी छापेमारी की गई.
एडीजीपी (कानून एवं व्यवस्था) एस आर मरदी ने कहा कि छापेमारी में चार लाख अमेरिकी डॉलर समेत विदेशी मुद्रा बरामद की गई लेकिन गोंपू शेरिंग को गिरफ्तार नहीं किया जा सका.
पुलिस ने धर्मशाला स्थित व्यापारी के सी भारद्वाज के आवास पर भी छापा मारा लेकिन कोई सबूत हाथ नहीं लगा.
मरदी ने कहा कि करमापा उग्येन त्रिनले दोरजी से धन के स्रोत के बारे में पूछा गया। हालांकि उन्होंने अनभिज्ञता जताई.
हालांकि, उनके प्रवक्ता ने जोर दिया कि यह चढ़ावा और दान का धन है और यह अवैध धन नहीं है.
पुलिस ने करमापा समर्थित ट्रस्ट पर छापेमारी के दौरान सात करोड़ रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा बरामद की थी और मुख्य लेखाकार शक्ति लामा को गिरफ्तार किया था.
पुलिस ने करमापा की बड़ी बहन नागदुप पेलजन से भी पूछताछ की. उन्होंने कहा कि उनका भाई धार्मिक गुरु है और उसका धन से कोई लेना देना नहीं है.
डीजीपी डी एस मिन्हास ने कहा कि विभिन्न एजेंसियों की तरफ से जांच प्रगति पर है और करमापा को न तो गिरफ्तार किया गया है और न ही नजरबंद हैं.
सरकार ने पहले ही उनपर कुछ पाबंदियां लगाई थीं और बाहर जाने के लिए उन्हें सरकार से अनुमति लेनी होगी. अब तक बरामद धन के स्रोत के बारे में पूछे जाने पर मिन्हास ने कहा कि संबद्ध लोगों के बैंक खातों की जांच की जा रही है लेकिन यह असंभाव्य लगता है कि इतना धन श्रद्धालुओं के चढ़ावे से आया.{mospagebreak}
अब तक तीन लोगों आशुतोष और संजय दत्त और शक्ति लामा को गिरफ्तार किया गया है. आशुतोष और संजय के पास एक करोड़ रुपये नकद थे और उन्हें 26 जनवरी को उना सीमा से पकड़ा गया था.
करमापा के प्रवक्ता ने कहा कि वे पुलिस और प्रवर्तन विभाग के अधिकारियों के साथ पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं और उन्होंने कुछ भी अवैध काम नहीं किया है.
सूत्रों ने बताया कि कुछ गोपनीय और ठोस दस्तावेज बरामद किए गए हैं लेकिन पुलिस ने विवरण का खुलासा करने से इंकार कर दिया.
करमापा भारत में घुसे और रहस्यमय परिस्थितियों में साल 2000 में धर्मशाला पहुंचे. धर्मशाला के निकट सिधबाड़ी में ग्यूतो मठ में उनके ठहरने की व्यवस्था की गई और उन्हें सुरक्षा प्रदान की गई. कुछ वर्षों पहले दलाई लामा ने उन्हें करमापा के तौर पर मान्यता दी थी लेकिन चीनी मुद्रा समेत भारी मात्रा में विदेशी मुद्राओं की बरामदगी से उनके चीनी संबंधों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं.
इस बीच, तिब्बत की निर्वासित सरकार ने इन घटनाक्रमों पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है और इससे बेपरवाह दलाई लामा आज आठ दिन के लिए कर्नाटक की यात्रा पर चले गए.