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कोयला घोटाला: सोनिया ने SP से बात की

यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी ने करीब 11 लाख करोड़ के कथित कोयला घोटाले को लेकर समाजवादी पार्टी से बात की है. वहीं दूसरी ओर इस घोटाले को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कोई भी टिप्‍पणी करने से इंकार कर दिया है.

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कोयला घोटाला
कोयला घोटाला

यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी ने करीब 11 लाख करोड़ के कथित कोयला घोटाले को लेकर समाजवादी पार्टी से बात की है. वहीं दूसरी ओर इस घोटाले को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कोई भी टिप्‍पणी करने से इंकार कर दिया है.

बिना नीलामी के कोयला ब्लाक आवंटन कर सरकार द्वारा कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के कारण 10.67 लाख करोड़ रूपये का नुकसान होने की कैग रिपोर्ट से संबंधित खबरों पर विपक्ष के भारी हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद आज 12 बजे तक स्थगित कर दी गई.

सदन की कार्यवाही शुरू होने पर भाजपा, जद यू, वाममोर्चा, अकाली दल के सदस्यों ने प्रश्नकाल स्थगित करने की मांग की. जदयू सदस्यों ने कहा कि केंद्र सरकार बिहार को थर्मल पावर स्टेशन के विस्तार के लिए कोल लिंकेज नहीं दे रही है और देश में कोयला ब्लाक के आवंटन में 10 लाख करोड़ रूपये का घोटाला हो रहा है.

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अध्यक्ष मीरा कुमार ने सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने और शून्यकाल में इस विषय को उठाने को कहा लेकिन सदस्यों ने शोर शराबा जारी रखा. भाजपा, जद यू, वाममोर्चा के सदस्य अध्यक्ष के आसन के पास आ गए. वहीं, सरकार को बाहर से समर्थन देने वाली सपा और बसपा के सदस्य भी अपने स्थान से इस विषय को उठाते देखे गए. शोर शराबा थमता नहीं देख अध्यक्ष ने कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

कैग ने नवीनतम रिपोर्ट में कोयला खदानों में हुए बंदरबांट का खुलासा किया है. रिपोर्ट के मुताबिक कोयला खदानों में नीलामी प्रक्रिया का पालन नहीं करने के चलते सरकारी खजाने को करीब 10.67 लाख करोड़ रुपए की चपत लगी. नुकसान की यह रकम 2जी घोटाले की रकम से 6 गुना ज्यादा है.

2004 से 2009 के दौरान 100 कंपनियों को कोयला खदानों का आवंटन बिना नीलामी कर दिया गया. इनमें निजी और सरकारी कंपनियां शामिल हैं और ये बिजली, स्टील और सीमेंट का कारोबार करती हैं. कैग की 110 पेज की रिपोर्ट संसद में जल्द ही पेश की जाएगी. इस रिपोर्ट पर आम बजट पास हाने के बाद चर्चा होने की उम्मीद है.

लाभ पाने वाली कंपनियों में टाटा ग्रुप की कंपनियां, जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड, इलेक्ट्रो स्टील केस्टिंग्स लिमिटेड, द अनिल अग्रवाल ग्रुप फर्म्स, दिल्ली की भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड, जायसवाल नेको, नागपुर की अभिजीत ग्रुप और आदित्य बिरला ग्रुप की कंपनियां शामिल हैं. इस लिस्ट में एस्सार ग्रुप की पावर कंपनियां, अदानी ग्रुप, आर्सेलर मित्तल इंडिया, लेंको ग्रुप और कुछ अन्य छोटी-बड़ी कंपनियां शामिल हैँ.

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कैग की इस रिपोर्ट पर टाटा, अदानी, बिरला ग्रुप और एस्सार ने कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है. उल्लेखनीय है कि 2004-09 के दौरान कोयला मंत्रालय शिबू सोरेन और प्रधानमंत्री के पास रहा. ऐसे में माना जा रहा है कि एक बार फिर प्रधानमंत्री इस घोटाले की आंच में आ सकते हैं. मौजूदा बजट सत्र में विपक्ष को नया मुद्दा मिल गया है और सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

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