उत्तर प्रदेश में तीन महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार से पस्त बीजेपी के लिए त्रिस्तरीय नगरीय चुनाव में मिली शानदार सफलता संजीवनी लेकर आयी है और वर्ष 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर इसकी उम्मीदें लहलहा उठी हैं.
नगर निगम चुनाव में अब तक के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन से निहाल पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, 'विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बावजूद हमने नगर निकाय चुनाव को पार्टी के चुनाव चिह्न पर लड़ने का फैसला किया और कार्यकर्ताओं एवं नेताओं की सामूहिक मेहनत और जनता के अभूतपूर्व समर्थन से हमें शानदार कामयाबी मिली.'
उन्होंने कहा, 'कांग्रेस तो सीधे चुनाव में लड़कर बुरी तरह परास्त हुई है, जबकि सपा और बसपा भी निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन देकर छद्म रूप से मैदान में उतरी और पराजित हुई.' वाजपेयी ने कहा, 'निकाय चुनाव में पार्टी के कार्यकर्ता और सभी राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तरीय नेता 'मैं' से ऊपर उठकर 'हम' के रूप में काम किया और पार्टी की जीत उसी का परिणाम है.' उन्होंने कहा कि इन चुनावों से यह साफ हो गया है कि तीन माह पहले जनता पर दिखा समाजवादी पार्टी का जादू भी बिखर गया है और जनता ने उसकी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति को नकार कर भाजपा का हाथ पकड़ लिया है.
नगर निकाय चुनाव परिणामों को लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए एक शुभ और सकारात्मक संकेत बताते हुए वाजपेयी ने कहा, 'लोकसभा चुनाव जनपदवार रणनीति बना कर लड़े जायेंगे और केन्द्र में भाजपानीत राजग को सत्तारूढ़ करने में उत्तरप्रदेश भाजपा महत्वपूर्ण योगदान करेगी.' उनके साथ मौजूद लखनऊ नगर निगम के मेयर पद पर दुबारा जीत दर्ज करने वाले डॉ. दिनेश शर्मा ने नगर निकाय चुनाव में मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि लखनऊ में केवल 34 प्रतिशत मतदाता ही अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाये.
उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर बल देते हुए कहा कि विधानसभा, लोकसभा तथा स्थानीय निकाय के चुनाव एक ही मतदाता सूची से होने चाहिए.
शर्मा ने नगर निकाय में पार्टी को मिली कामयाबी को 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव का 'ट्रेलर' बताते हुए भरोसा जताया कि लोकसभा चुनाव में भाजपा अप्रत्याशित जीत दर्ज करेगी.
नगर निकाय चुनाव में प्रदेश की 12 नगर निगमों के मेयर पद पर सात में जीत और तीन में बढ़त दर्ज करके भाजपा अभूतपूर्व जीत की ओर बढ़ी है, जबकि इलाहाबाद नगर निगम में बसपा समर्थित तथा बरेली में सपा समर्थित उम्मीदवार की जीत हुई है.