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इस धर्म के सिर्फ 4650 लोग भारत में, मांग रहे अल्पसंख्यक दर्जा

इस धर्म के सिर्फ 4650 लोग भारत में, मांग रहे अल्पसंख्यक दर्जा
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भारत ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का खूब स्वागत किया है. वे 6 दिन के दौरे पर भारत आए हैं. इस दौरान जहां भारत और इजरायल द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर करने के लिए कोशिश करेंगे, वहीं गौर करने वाली बात ये भी है कि भारत में रहने वाला यहूदी समुदाय आज भी अल्पसंख्यक दर्जा का इंतजार कर रहा है. इनमें से काफी यहूदी इजरायल मूल के हैं. (रिपोर्ट- कृतिका बनर्जी)
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1992 के नेशनल कमिशन फॉर माइनॉरिटी एक्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने मुस्लिम, सिख, बौद्ध, क्रिश्चन, पारसी और जैन को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया है. हाल ही में एक सवाल के जवाब में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने लोकसभा में बताया था कि केंद्र सरकार ने अब तक यहूदियों को अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं दिया है.
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लेकिन करीब 2 साल पहले तब के अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने कहा था कि सरकार यहूदियों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग पर विचार कर रही है. उन्होंने कहा था कि यहूदी समुदाय से उन्हें प्रस्ताव मिला है और उन्होंने इसे अन्य मंत्रालयों को अपने विचार देने के लिए भेज दिया है.
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2001 की जनगणना के मुताबिक, भारत में 4650 यहूदी रहते हैं. इनमें से 2466 महाराष्ट्र में रहते हैं. महाराष्ट्र के साथ-साथ मणिपुर, मिजोरम और गुजरात में यहूदियों की संख्या अन्य राज्यों से अधिक है.

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महाराष्ट्र जून 2016 में यहूदियों को अल्पसंख्यक का दर्जा देकर ऐसा करने वाला पहला राज्य (और अब तक का इकलौता) बन गया था. ये दर्जा मिलने के बाद यहूदी महाराष्ट्र सरकार की ओर से अल्पसंख्यक समुदाय के लिए शुरू किए गए लाभकारी योजनाओं का लाभ ले सकते हैं. इस दर्जे से उनकी शादियों का रजिस्ट्रेशन कराना भी आसान हो जाता है.
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पिछले साल नरेंद्र मोदी इजरायल जाने वाले पहले भारतीय पीएम बने थे. इसके बाद भारत में रहने वाले यहूदियों को ये उम्मीद थी कि उन्हें केंद्र की ओर से अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाएगा. अब 6 महीने बाद नेतन्याहू भारत में हैं और उनका मंगलवार को मुंबई के चबद हाउस जाने का प्रोग्राम है जो कि यहूदियों का धार्मिक स्थल है. ऐसे में यहूदी एक बार फिर उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा मिल जाएगा.
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आखिर में आपको एक दिलचस्प बात बता दें कि ऑल इंडिया रेडियो पर सुनाई देने वाले सिग्नेचर ट्यून को भारत में रहने वाले एक यहूदी रिफ्यूजी ने ही बनाया था. उनका नाम था वाल्टर कौफमैन. उन्होंने एआईआर में बतौर म्यूजिक डायरेक्टर वह ट्यून तैयार किया था.

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