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आपका वेकेशन प्लान 'ट्रैवल स्कैम' तो नहीं, सस्ते पैकेज के चक्कर में ऐसे हो रही है ठगी

सोशल मीडिया पर दिखने वाले सस्ते टूर पैकेज, चमकदार विज्ञापन और पांच-सितारा रिव्यू अक्सर भरोसेमंद लगते हैं, लेकिन कई बार यही चीजें सबसे बड़ा जोखिम बन जाती हैं. यहां जानिए, आखिर ये फर्जी ट्रैवल वेबसाइटें भरोसा कैसे जीतती हैं और किन संकेतों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.

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फेक रिव्यू के मायाजाल में न फंसें (Photo: Pexels)
फेक रिव्यू के मायाजाल में न फंसें (Photo: Pexels)

सस्ते टूर पैकेज, चमकदार विज्ञापन और हजारों पांच-सितारा रिव्यू ट्रैवल प्लान करते वक्त यही चीजें सबसे ज्यादा भरोसा दिलाती हैं. लेकिन कई बार यही भरोसा यात्रियों को भारी नुकसान में बदल देता है. सोशल मीडिया और इंटरनेट पर सक्रिय फर्जी वेबसाइटें और पेज पहले आकर्षक ऑफर दिखाते हैं, फिर बुकिंग के बाद अचानक गायब हो जाते हैं. ऐसे मामलों में न सफर होता है और न ही पैसे वापस मिलते हैं.

दरअसल, ट्रैवल स्कैम का सबसे बड़ा हथियार होता है लुभावना ऑफर. बहुत सस्ती डील, सीमित समय का ऑफर या आज बुक नहीं किया तो मौका हाथ से निकल जाएगा जैसे जुमलों के जरिए यात्रियों पर जल्द फैसला लेने का दबाव बनाया जाता है. यही जल्दबाजी लोगों को पूरी जांच-पड़ताल से रोक देती है. नतीजा यह होता है कि भरोसे के चक्कर में भुगतान कर दिया जाता है और यहीं से ठगी की पूरी कहानी शुरू हो जाती है. तो चलिए जानते हैं, फर्जी ट्रैवल वेबसाइटें और स्कैमर्स आखिर किस तरह यात्रियों को अपने जाल में फंसाते हैं.

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फर्जी वेबसाइटें कैसे भरोसा जीतती हैं

स्कैमर्स जानी-मानी ट्रैवल कंपनियों जैसी दिखने वाली वेबसाइटें बनाते हैं. इनके डोमेन नाम असली साइट से मिलते-जुलते होते हैं, बस हल्का सा फर्क होता है. कई बार वेबसाइट पर HTTPS और ताले का निशान भी दिखता है, जिससे लोग उसे सुरक्षित मान लेते हैं. हालांकि, सिर्फ HTTPS होना ही किसी साइट की सच्चाई की गारंटी नहीं है. आजकल फर्जी साइटें भी इसे इस्तेमाल करने लगी हैं.

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फेक रिव्यू और चमकदार कंटेंट का खेल

ऐसी वेबसाइटों और सोशल मीडिया पेजों पर अक्सर रिव्यू जरूरत से ज्यादा पॉजिटिव और एक जैसे दिखते हैं.न किसी असली अनुभव का ज़िक्र होता है, न ठहरने या घूमने की कोई तस्वीर दिखाई देती है, हर तरफ बस तारीफों की भरमार नजर आती है.  यही फेक रिव्यू धीरे-धीरे यात्रियों का भरोसा जीत लेते हैं. वहीं पहली नजर में वेबसाइट का डिजाइन भले ही आकर्षक लगे, लेकिन थोड़ा ध्यान देने पर स्पेलिंग की गलतियां, अधूरी जानकारियां और टूटी हुई लिंक साफ नजर आने लगती हैं, जो इसकी सच्चाई की ओर इशारा करती हैं.

भुगतान के समय होती है सबसे बड़ी गलती

ठग अक्सर क्रेडिट कार्ड या सुरक्षित गेटवे की जगह सीधे बैंक ट्रांसफर, गिफ्ट कार्ड या किसी निजी अकाउंट में पैसे भेजने को कहते हैं. ऐसे भुगतान को ट्रैक करना या वापस पाना लगभग नामुमकिन होता है. पैसा मिलते ही वेबसाइट, मोबाइल नंबर और सोशल मीडिया पेज अचानक बंद हो जाते हैं.

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कैसे बचें इस मायाजाल से

ट्रैवल बुकिंग के दौरान ठगी से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि आप जल्दबाजी में कोई फैसला न लें. स्कैमर्स अक्सर ऑफर खत्म होने वाला है या कुछ ही सीटें बची हैं जैसे दावों से मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते हैं ताकि आप बिना सोचे-समझे भुगतान कर दें. इससे बचने के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइटों या जानी-मानी एजेंसियों का ही उपयोग करें और अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें. इसके अलावा, वेबसाइट की असलियत पहचानने के लिए उसके URL को ध्यान से देखें, अगर डोमेन नेम में स्पेलिंग की गलती (जैसे Amazon की जगह Amzon) या .xyz जैसे संदिग्ध एक्सटेंशन दिखें, तो समझ लें कि यह एक जाल है. क्योंकि सुरक्षित वेबसाइटें हमेशा HTTPS और लॉक आइकन का उपयोग करती हैं, जबकि फर्जी साइटें आपकी निजी और वित्तीय जानकारी चुराने के मकसद से बनाई जाती हैं.

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सिर्फ वेबसाइट पर मौजूद चमक-धमक वाले रिव्यू पर आंख मूंदकर भरोसा न करें, क्योंकि स्कैमर्स अक्सर खुद ही फर्जी और सकारात्मक फीडबैक लिखवाते हैं. ऐसे में असली अनुभव जानने के लिए आपको हमेशा स्वतंत्र प्लेटफॉर्म या सोशल मीडिया पर जाकर लोगों की शिकायतों और चर्चाओं की जांच करनी चाहिए. इतना ही नहीं, भुगतान के मामले में भी बेहद सतर्क रहना जरूरी है.

इसके लिए हमेशा सुरक्षित पेमेंट गेटवे या क्रेडिट कार्ड का ही चुनाव करें. यदि कोई आपसे सीधे व्यक्तिगत बैंक खाते, यूपीआई या गिफ्ट कार्ड के जरिए पैसे भेजने की मांग करता है, तो समझ लीजिए कि यह खतरे का सबसे बड़ा संकेत है. यही वजह है कि यदि कोई डील जरूरत से ज्यादा सस्ती लगे, तो उसकी सच्चाई पर सवाल उठाना अनिवार्य हो जाता है. अंत में, आपकी थोड़ी सी समझदारी और रिसर्च आपको उस बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है, जहां ठग आपकी मेहनत की कमाई लेकर रातों-रात गायब हो जाते हैं.

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