जब भी हम किसी शानदार वेकेशन के बारे में सोचते हैं, तो दिमाग में दो ही तस्वीरें आती हैं- या तो नीले पानी वाला कोई बीच या फिर बर्फ से ढके खूबसूरत पहाड़. लेकिन क्या आपने कभी ऐसी जगह के बारे में सुना है जहां नीला समंदर और सफेद बर्फ एक-दूसरे में घुले मिले नजर आते हों? सुनने में किसी फिल्मी सीन जैसा लगता है न? पर यकीन मानिए, जापान का 'होक्काइडो' द्वीप इस नामुमकिन से दिखने वाले नजारे को हकीकत में बदल देता है.
अक्सर हमें रेत और बर्फ देखने के लिए अलग-अलग ट्रिप प्लान करनी पड़ती है, लेकिन होक्काइडो कुदरत का वो अनोखा कोना है जहां सादगी और खूबसूरती का बेजोड़ मिलन होता है. यहां की फिजाओं में एक ऐसी शांति है जो आपको पेरिस की चमक-धमक और स्विट्जरलैंड की भीड़भाड़ से कहीं दूर एक जादुई दुनिया में ले जाएगी. अगर आप भी प्रकृति प्रेमी हैं और कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो आपने पहले कभी नहीं देखा, तो होक्काइडो को अपनी ट्रैवल लिस्ट में सबसे ऊपर रख लीजिए.
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आमतौर पर बीच का नाम सुनते ही हमारे मन में सुनहरी रेत और चिलचिलाती धूप का ख्याल आता है, लेकिन होक्काइडो के ओतारू ड्रीम बीच और शिराहामा बीच की कहानी बिल्कुल जुदा है. सर्दियों के दिनों में यहां दूर-दूर तक रेत का नामोनिशान नहीं मिलता बल्कि पूरी जमीन सफेद बर्फ की मोटी परत से ढक जाती है.
जरा कल्पना कीजिए कि आप मखमली सफेद बर्फ पर कदम रख रहे हैं और ठीक सामने समंदर की बेताब लहरें आपसे गुफ्तगू कर रही हैं. यहा पैरों के नीचे रेत की चुभन और सूरज की तपिश नहीं बल्कि बर्फ की रूहानी ठंडक महसूस होती है. यह पूरा नजारा किसी जादुई कैनवास जैसा लगता है, मानो कुदरत ने गहरे नीले पानी और दूधिया सफेद बर्फ को मिलाकर अपनी सबसे शानदार पेंटिंग उतार दी हो. सोने पर सुहागा तब होता है, जब सुबह की पहली किरण इन बर्फीले तटों को छूती है और फिर तो पूरा मंजर हीरों की तरह जगमगा उठता है.
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अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि जब चारों तरफ इतनी बर्फ है कि सड़कें और घर तक ढक गए हैं तो फिर यह समंदर क्यों नहीं जमता? इसके पीछे एक बहुत ही दिलचस्प वजह छिपी है जिसे कुदरत का अनोखा विज्ञान कह सकते हैं. दरअसल समंदर के पानी में नमक की मात्रा बहुत ज्यादा होती है जिसकी वजह से उसका जमने वाला तापमान काफी नीचे चला जाता है. मतलब साफ है कि पानी को बर्फ बनने के लिए जितनी ठंड चाहिए उससे कहीं ज्यादा ठंड की जरूरत इस खारे पानी को होती है.
इसके अलावा होक्काइडो के आसपास की लहरें कभी शांत नहीं बैठतीं, बल्कि लगातार शोर मचाते हुए थपेड़े मारती रहती हैं. पानी की इसी निरंतर हलचल की वजह से बर्फ को पैर जमाने का मौका ही नहीं मिलता. यही कारण है कि एक तरफ जमीन पूरी तरह सफेद चादर ओढ़े शांत रहती है और दूसरी तरफ समंदर अपनी पूरी रफ्तार से जिंदा नजर आता है. दिसंबर से फरवरी के बीच यहां का नजारा सबसे चरम पर होता है और टोक्यो से महज डेढ़ घंटे की उड़ान आपको इस जन्नत के दीदार करा सकती है.