अगर आप इस बार माघ मेले की भव्यता को देखने के लिए प्रयागराज की यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो अपने बजट की चिंता छोड़ दीजिए. प्रयागराज एक ऐसा शहर है, जो अपने मेहमानों का स्वागत खाली हाथ नहीं, बल्कि 'अन्नपूर्णा' के भरे हुए भंडारों से करता है. संगम नगरी की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि यहां आने वाले किसी भी यात्री या घुमक्कड़ को भोजन की तलाश में भटकना नहीं पड़ता.
प्रयागराज में ऐसी कई जगहें हैं, जहां दिन-रात मुफ्त भोजन मिलता है. यहां शहर की तमाम सेवा समितियां और स्वयंसेवी संगठन इस कोशिश में रहते हैं कि कोई भी मुसाफिर भूखे पेट न सोए. तो चलिए, आज हम आपको बताते हैं कि अपनी प्रयागराज यात्रा के दौरान आप कहां-कहां लजीज और सात्विक भंडारे का आनंद ले सकते हैं.
संगम क्षेत्र और माघ मेला परिसर के रेती पर बिछी 'महा-रसोई'
प्रयागराज के किले और लेटे हुए हनुमान जी के दर्शन के लिए जाने वाले यात्रियों के लिए किला चौराहा और मिंटो पार्क सबसे अहम पॉइंट है. यहां कई धार्मिक और सेवा समितियों द्वारा विशाल पंडाल लगाए जाते हैं, जहां 24 घंटे भंडारा चलता रहता है. यहां आपको गरमा-गरम पूरी-सब्जी, खिचड़ी और फल का प्रसाद इतनी सादगी और प्यार से परोसा जाता है कि आपकी थकान छूमंतर हो जाएगी.
यह उन श्रद्धालुओं के लिए सबसे सुलभ जगह है जो संगम की ओर पैदल बढ़ रहे होते हैं. अगर आप माघ मेले के भीतर टेंट सिटी या रेती पर घूम रहे हैं, तो यहां का नजारा किसी जादुई नगरी जैसा होता है. मेले के दौरान यहां सैकड़ों कैंप और अखाड़े लगते हैं, जहां निरंतर लंगर की व्यवस्था होती है. संगम में आस्था की डुबकी लगाने के बाद इन कैंपों में जाकर प्रसाद ग्रहण करना हर यात्री के सफर का एक जरूरी हिस्सा होता है. यहां की व्यवस्था इतनी शानदार होती है कि भारी भीड़ के बीच भी हर किसी को बड़े प्यार से भोजन कराया जाता है.
हनुमान मंदिर और संकट मोचन के आसपास की सेवा परंपरा
प्रयागराज के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर और संकट मोचन मंदिर के आसपास का क्षेत्र भी अपने विशाल भंडारों के लिए जाना जाता है. यहां विशेष रूप से मंगलवार, शनिवार और मेले के प्रमुख स्नान पर्वों पर अद्भुत आयोजन होते हैं. यहां का प्रसाद ग्रहण करने के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं, और सेवादार यह सुनिश्चित करते हैं कि कतार में खड़ा आखिरी यात्री भी तृप्त होकर विदा हो.
रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड
प्रयागराज की सीमा में कदम रखते ही सेवा का हाथ आपका इंतजार कर रहा होता है. जो मुसाफिर लंबी ट्रेन यात्रा या बस के सफर से थककर स्टेशन पर उतरते हैं, उनके लिए निकास द्वारों पर ही स्थानीय सेवा समितियों द्वारा भोजन के पैकेट या खुले भंडारे का आयोजन किया जाता है. यहां का मकसद यही है कि थके हुए यात्री को शहर में प्रवेश करते ही सबसे पहले भोजन की राहत मिल सके.
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शहर के मुख्य मार्गों पर सक्रिय स्वयंसेवी संगठन
मुख्य मेला क्षेत्र के अलावा, शहर की विभिन्न सामाजिक सेवा समितियां पूरे नगर में सक्रिय रहती हैं. माघ मेले के दौरान ये संगठन मुख्य मार्गों और चौराहों पर छोटे-बड़े स्टॉल लगाते हैं. इनका लक्ष्य उन यात्रियों तक पहुंचना है जो शहर के भीतर घूम रहे हैं या अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं. वाकई, प्रयागराज की गलियों में बहती सेवा की यह धारा हर मुसाफिर के सफर को यादगार बना देती है.