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बादलों के ऊपर बसी है यह अनोखी घाटी, जहां सड़कें बादलों को चीरकर निकलती हैं

अगर आप ऐसी जगह देखना चाहते हैं जहां रास्ता जमीन पर नहीं, बादलों के बीच चलता महसूस हो और जहां धुंध हर सुबह एक नई कहानी गढ़ती हो, तो यह खबर आपके लिए है. भीड़ से दूर, शांति और रहस्य की चादर ओढ़े खड़ी है. आखिर क्या है इस जगह की खासियत, क्यों यहां पहुंचने वाला हर यात्री सुकून की बात करता है.

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धुंध की चादर में लिपटी अनिनी वैली (Photo: Pexels)
धुंध की चादर में लिपटी अनिनी वैली (Photo: Pexels)

क्या आपने कभी ऐसी जगह के बारे में सोचा है जहां सुबह तो होती है, पर सूरज नहीं दिखता? जहां सामने खड़े ऊंचे पहाड़ सिर्फ ठंडी हवा के झोंकों से महसूस होते हैं और चारों तरफ धुंध की एक सफेद चादर बिछी रहती है. यहां चलते हुए कई बार ऐसा लगता है जैसे रास्ता ज़मीन पर नहीं, बल्कि बादलों के बीच से होकर गुजर रहा हो. तवांग और जीरो वैली की चर्चा तो बहुत होती है, लेकिन अरुणाचल प्रदेश में एक ऐसी घाटी भी है जो उन सबसे बिल्कुल अलग और शांत है. तो चलिए जानते हैं, आखिर इस छिपी हुई वादी में ऐसा क्या खास है जो इसे देखने के लिए लोग इतनी दूर खिंचे चले आते हैं.

पूर्वोत्तर भारत को अक्सर देश का सबसे खूबसूरत हिस्सा माना जाता है. जब भी यहां घूमने की बात होती है, तो ज्यादातर लोग सिक्किम, मेघालय या असम का रुख करते हैं. अरुणाचल प्रदेश की बात हो तो तवांग और जीरो वैली ही लोगों की पसंद होती है. लेकिन इन मशहूर जगहों से काफी दूर, एक ऐसी घाटी भी है जो आज भी भीड़भाड़ से बची हुई है. अपनी रहस्यमयी सुंदरता को समेटे यह जगह है अनिनी वैली.

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पहाड़ों के बीच बसा सुकून का पता

अगर आप इस जन्नत तक पहुंचने का मन बना रहे हैं, तो आपको अरुणाचल प्रदेश के दिबांग जिले का रुख करना होगा, जहां की वादियों के बीच यह खूबसूरत अनिनी वैली बसी है. यह न सिर्फ कुदरत का करिश्मा है, बल्कि इस पूरे इलाके का मुख्य केंद्र भी है. यहां की सबसे बड़ी खूबी इसकी खामोशी है, आप जैसे-जैसे घाटी के करीब पहुंचते हैं, शहरों का शोर-शराबा और भागदौड़ खुद-ब-खुद पीछे छूटने लगती है.

रही बात यहां तक पहुंचने की, तो राजधानी ईटानगर से यह करीब 570 किलोमीटर की दूरी पर है, वहीं अगर आप असम की तरफ से आ रहे हैं तो डिब्रूगढ़ से आपको लगभग 381 किलोमीटर का सफर तय करना होगा. माना कि यह रास्ता थोड़ा लंबा है और इसमें वक्त भी लगता है, लेकिन यकीन मानिए, पहाड़ों के मोड़ पर हर पल बदलते नजारे और खिड़की से आती ठंडी हवा आपको थकावट का अहसास तक नहीं होने देगी.

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प्रकृति का अपना अनूठा रूप

अनिनी वैली की असली जादुई शक्ति इसकी कुदरती बनावट में छिपी है, जो किसी कलाकार के कैनवास पर उतरी एक सुंदर तस्वीर जैसी जान पड़ती है. जब आप चारों तरफ नजर घुमाएंगे, तो खुद को हिमालय की उन ऊंची और बर्फीली चोटियों से घिरा पाएंगे जो आसमान को छूने की जिद करती हैं. इस घाटी का हर कोना खास है, चाहे वो बादलों को ओढ़े हुए विशाल पहाड़ हों, मखमल की तरह बिछे हरे-भरे घास के मैदान हों, या फिर पहाड़ों का सीना चीरकर कल-कल बहते दूधिया झरने. यहां की सबसे दिलचस्प बात है यहां का लुका-छिपी खेलती धुंध. कई बार यह धुंध इतनी घनी हो जाती है कि पूरी घाटी को अपनी आगोश में छिपा लेती है और फिर अचानक जैसे ही हवा का एक झोंका आता है, पर्दा हट जाता है और पूरी घाटी अपने पूरे निखार के साथ आपके सामने खिल उठती है.

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मौसम और बर्फ का जादू

यहां का मौसम किसी जादू से कम नहीं है. गर्मियों के दिनों में जब मैदानी इलाकों में तपिश होती है, तब अनिनी की हवाओं में एक खास सुहावनापन और ठंडक घुली होती है. यहां की फिजाओं में न कोई जल्दबाजी है और न ही शहरों जैसी भागदौड़. यहां पहुंचकर ऐसा महसूस होता है मानो वक्त की रफ्तार सुस्त पड़ गई हो और समय थम सा गया हो. वहीं, सर्दियों का मंजर तो एकदम अलग ही होता है. जब आसमान से रुई जैसी बर्फ गिरती है, तो पूरी घाटी सफेद चादर ओढ़कर किसी परीकथा जैसी दिखने लगती है. यही वजह है कि लोग यहां सिर्फ सैर-सपाटे के लिए नहीं आते, बल्कि अपनी थकान मिटाने और शांति के कुछ पल खुद के साथ बिताने खिंचे चले आते हैं.

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लेकिन यह सफर सिर्फ एक घाटी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह अनगिनत यादों को खुद में समेटने का एक जरिया है. अनिनी के आंचल में दिबांग घाटी की गहराई और ड्री व मथुन जैसी नदियों का शोर छिपा है, जिनके किनारे बैठकर आप घंटों तक बहते पानी की संगीत जैसी आवाज सुन सकते हैं. अगर आप इस खूबसूरती को और करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो 'अनिनी व्यू पॉइंट' और 'मिश्मी हिल्स' जैसी जगहें आपका दिल जीत लेंगी. सच तो यह है कि अनिनी वैली हमें यह सिखाती है कि दुनिया में कुछ जगहें ऐसी भी हैं जो शोर-शराबे से दूर रहकर भी अपनी कहानी बड़े सुकून से सुनाती हैं. अगर आप भी नॉर्थ-ईस्ट जाने का सपना बुन रहे हैं, तो इस अनछुए स्वर्ग को अपनी लिस्ट में शामिल करना बिल्कुल न भूलें.

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