भारतीय रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है, जहां हर दिन हजारों ट्रेनें लाखों मुसाफिरों को उनकी मंजिल तक पहुंचाती हैं. पटरियों के इस विशाल जाल में कई ऐसी रोचक बातें छिपी हैं, जिन्हें जानकर लोग हैरान रह जाते हैं. क्या आपने कभी सुना है कि एक ही नाम और एक ही नंबर की ट्रेन एक ही समय पर देश के तीन अलग-अलग कोनों में मौजूद हो? सुनने में यह किसी जादू या टाइम मशीन की कहानी जैसा लगता है, लेकिन हकीकत में यह भारतीय रेलवे के सटीक प्लानिंग और मजबूत मैनेजमेंट का नतीजा है. तो चलिए जानते हैं उस अनोखी ट्रेन के बारे में, जो एक साथ कई पटरियों पर दौड़कर सबको चौंका देती है.
हम जिस ट्रेन की बात कर रहे हैं, उसका नाम है अवध असम एक्सप्रेस (15909/15910). यह सिर्फ एक पैसेंजर ट्रेन नहीं, बल्कि पटरियों पर दौड़ता हुआ एक चलता-फिरता अजूबा है. यह ट्रेन असम के डिब्रूगढ़ से राजस्थान के लालगढ़ तक चलती है और करीब 3100 किलोमीटर से ज्यादा का लंबा सफर तय करती है. खास बात यह है कि यह ट्रेन रोज़ाना चलती है, जबकि इतनी लंबी दूरी तय करने में इसे एक तरफ का सफर पूरा करने में ही लगभग चार दिन लग जाते हैं.
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आखिर कैसे एक ही ट्रेन एक साथ तीन जगह दिखाई देती है?
अब सवाल यह उठता है कि जब ट्रेन को एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने में चार दिन लगते हैं, तो फिर रोजाना ट्रेन कैसे चलाई जाती है? यहीं से इस अनोखी व्यवस्था का असली राज खुलता है. रेलवे के टाइम-टेबल के मुताबिक, डिब्रूगढ़ से हर दिन एक अवध असम एक्सप्रेस रवाना होती है. इसका मतलब यह हुआ कि सोमवार को निकली ट्रेन रास्ते में ही होती है, तभी मंगलवार और बुधवार को चली ट्रेनें भी अलग-अलग राज्यों में दौड़ रही होती हैं.
यानी एक ही समय पर, एक ही दिशा में, एक ही नाम और नंबर की तीन अलग-अलग ट्रेनें देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद रहती हैं. देखने वाले को लगता है जैसे एक ही ट्रेन ने खुद को तीन हिस्सों में बांट लिया हो, जबकि असल में यह रेलवे की बेहद सोच-समझकर बनाई गई योजना का नतीजा है.
रेलवे की स्मार्ट प्लानिंग से चलता है पूरा चक्र
यही अनोखा सिस्टम वापसी के रास्ते में भी लागू होता है. राजस्थान के लालगढ़ से असम लौटने के लिए भी तीन ट्रेनें अलग-अलग दिनों में ट्रैक पर होती हैं. इसके अलावा, रेलवे एक ट्रेन को हमेशा बैकअप और मेंटेनेंस के लिए रिजर्व रखता है, ताकि किसी तकनीकी खराबी या देरी की स्थिति में सेवा प्रभावित न हो. इस तरह कुल 7 ट्रेन सेट मिलकर इस लंबे रूट को बिना रुके संभालते हैं. यही वजह है कि अवध असम एक्सप्रेस रोजाना चलने के बावजूद कभी एक ही जगह अटकी हुई नहीं दिखती, बल्कि एक साथ कई पटरियों पर दौड़ती नजर आती है. यह व्यवस्था न सिर्फ यात्रियों की सुविधा बढ़ाती है, बल्कि भारतीय रेलवे की योजना, अनुशासन और तकनीकी समझ को भी दर्शाती है.
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9 राज्यों की सरहदों को लांघता भारत का सबसे लंबा 'डेली रूट'
अवध असम एक्सप्रेस का रास्ता भारत के विशाल भूगोल और संस्कृति की गवाही देता है. यह ट्रेन दो-चार नहीं, बल्कि पूरे 9 राज्यों की सरहदों को पार करते हुए गुजरती है. इसमें असम, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे बड़े प्रदेश शामिल हैं. इतना ही नहीं, इस लंबे सफर के दौरान यह ट्रेन कुल 88 स्टेशनों पर अपनी दस्तक देती है, जो इसे देश के एक बड़े हिस्से की लाइफलाइन बनाता है.
खास बात यह है कि इस सफर का एक और दिलचस्प पहलू इसका 'हॉल्ट टाइम' यानी स्टेशनों पर रुकने का समय है. कहीं यह 2 मिनट रुकती है तो कहीं 5 मिनट, लेकिन अगर इन सभी 88 स्टॉपेज के वक्त को जोड़ दिया जाए, तो मुसाफिर के सफर के करीब 4.30 से 5 घंटे तो सिर्फ स्टेशनों पर खड़ी ट्रेन की खिड़की से बाहर देखने में ही बीत जाते हैं. लंबी दूरी और तकनीकी सुरक्षा को देखते हुए रेलवे एक ट्रेन सेट को हमेशा 'अतिरिक्त' (Reserve) भी रखता है. 3100 किलोमीटर का यह सफर भारत की विविधता को एक ही धागे में पिरोने का काम करता है.