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2014 से भी सस्ता है हवाई सफर... टिकट के रेट पर बोले आकासा के CEO विनय दुबे

क्या हवाई टिकट वाकई महंगा हो गया है या हम सिर्फ हवा में बातें कर रहे हैं? आकासा एयर के CEO विनय दुबे ने 2014 के आंकड़ों के साथ एक ऐसा दावा किया है जो आपकी सोच बदल देगा. इतना ही नहीं, उन्होंने इंडिगो और एयर इंडिया जैसे दिग्गजों के बीच टिकने का अपना 'सीक्रेट फॉर्मूला' भी साझा किया.

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आकासा के CEO बोले- भारतीय आसमान में सबके लिए जगह है (Photo: ITG)
आकासा के CEO बोले- भारतीय आसमान में सबके लिए जगह है (Photo: ITG)

'इंडिया टुडे इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव 2026' में आकासा एयर के CEO विनय दुबे ने हवाई किराए में बढ़ोतरी के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि अगर महंगाई के आंकड़ों को जोड़कर देखें, तो आज का हवाई टिकट 2014 या उससे पहले की तुलना में काफी सस्ता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में आज भी दुनिया के सबसे किफायती हवाई किरायों में से एक उपलब्ध है. 

मार्केट में इंडिगो और एयर इंडिया का दबदबा है, लेकिन विनय दुबे को इसकी फिक्र नहीं. उनका कहना है कि भारतीय आसमान में हर किसी के लिए अपनी जगह है. उन्होंने जंगल का उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे वहां बड़े गोरिल्ला के साथ-साथ दूसरे जानवर भी आराम से रहते हैं, वैसे ही भारत जैसे बड़े देश में 5-6 सफल एयरलाइंस एक साथ काम कर सकती हैं. उनका लक्ष्य किसी को प्रतिस्पर्धा में हराना नहीं, बल्कि ग्राहकों को बेहतर और भरोसेमंद सर्विस देना है.

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एयरलाइंस की विफलता से लिया सबक

जेट एयरवेज और गो-एयर जैसी कंपनियों के बंद होने पर दुबे ने कहा कि यह सिर्फ भारत की समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर ऐसा होता है. उन्होंने सफल होने के तीन बुनियादी मंत्र बताए. पहला, लागत पर नियंत्रण रखना, जिसके लिए आकासा ने बोइंग के साथ 226 नए और ईंधन की बचत करने वाले विमानों का सौदा किया है. दूसरा, प्रोफेशनल मैनेजमेंट का होना और तीसरा, बिजनेस के उतार-चढ़ाव को झेलने के लिए हमेशा पर्याप्त पूंजी पास रखना.

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सिस्टम में पारदर्शिता का जिक्र करते हुए विनय दुबे ने एक दिलचस्प खुलासा किया. उन्होंने बताया कि जब 2020 में उन्होंने एयरलाइन शुरू करने का फैसला लिया, तो लोगों ने डराया था कि बिना बड़ी पहुंच और रिश्वत के लाइसेंस नहीं मिलेगा. हालांकि, उन्होंने बिना एक भी रुपये की रिश्वत दिए और बिना किसी की सिफारिश के महज 23 महीने में लाइसेंस हासिल कर लिया. उन्होंने इसे सरकार की बड़ी उपलब्धि करार दिया.

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विदेशी विस्तार पर 'नो इमोशनल लगाव'

इंटरनेशनल रूट्स पर बात करते हुए CEO ने साफ किया कि आकासा का लंदन या न्यूयॉर्क जैसे शहरों के लिए कोई 'इमोशनल लगाव' नहीं है. उन्होंने कहा कि वे उन जगहों पर उड़ान भरकर खुश हैं जहां भारतीय यात्री वास्तव में जाना चाहते हैं, जैसे अबू धाबी या फुकेत. उनका मानना है कि जब एयरलाइंस भावनाओं में बहकर सिर्फ रुतबा दिखाने के लिए बड़े रूट चुनती हैं, तभी वे आर्थिक संकट में फंसती हैं. फिलहाल उनका पूरा ध्यान भारतीय बाजार और चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर पकड़ मजबूत करने पर है.

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