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सफर में मुफ्त वाई-फाई का लालच पड़ेगा महंगा, खाली हो सकता है आपका बैंक खाता

सफर के दौरान एयरपोर्ट या कैफे में मिलने वाला मुफ्त वाई-फाई आपकी जेब और प्राइवेसी दोनों पर भारी पड़ सकता है. हैकर्स अक्सर असली जैसे दिखने वाले नकली नेटवर्क बनाकर आपके फोन का डेटा चोरी करने की फिराक में रहते हैं.

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फ्री वाई-फाई कनेक्ट करने से पहले ये बातें जरूर जान लें (Photo: Pixabay)
फ्री वाई-फाई कनेक्ट करने से पहले ये बातें जरूर जान लें (Photo: Pixabay)

सफर के दौरान जब हम घर से दूर होते हैं, तो एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या किसी कैफे में मिलने वाला 'फ्री वाई-फाई' किसी तोहफे जैसा लगता है. चाहे घर वालों को अपनी लोकेशन भेजनी हो या खाली समय में वीडियो देखना, मुफ्त इंटरनेट का लालच हमें तुरंत कनेक्ट करने पर मजबूर कर देता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस 'फ्री' इंटरनेट को आप बड़े मजे से इस्तेमाल कर रहे हैं, उसके पीछे हैकर्स का जाल भी हो सकता है.

सार्वजनिक वाई-फाई सुविधा तो देते हैं, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही आपकी निजी जानकारी को खतरे में डाल सकती है. सुरक्षित रहने के लिए आपको कोई एक्सपर्ट होने की जरूरत नहीं है, बस कुछ छोटी बातों का ध्यान रखना ही काफी है.

साइबर अपराधी अक्सर बहुत चालाक होते हैं. वे एयरपोर्ट या होटल के असली वाई-फाई जैसा ही मिलता-जुलता नाम रख देते हैं, ताकि आप बिना सोचे-समझे उससे जुड़ जाएं. इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप सिर्फ नाम न देखें, बल्कि नेटवर्क के काम करने का तरीका भी देखें. अगर कोई वाई-फाई आपसे जरूरत से ज्यादा परमिशन मांग रहा है, आपको अजीब से पेज पर भेज रहा है या बहुत स्लो चल रहा है, तो समझ जाइए कि दाल में कुछ काला है.

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'ऑटो-कनेक्ट' सेटिंग को कहें बाय-बाय

हमारे फोन और लैपटॉप की आदत होती है कि वे उन नेटवर्क से खुद-ब-खुद जुड़ जाते हैं, जिन्हें हम पहले कभी इस्तेमाल कर चुके होते हैं. हैकर्स इसी का फायदा उठाते हैं. वे आपके पुराने नेटवर्क जैसा नाम बनाकर आपके डिवाइस को धोखे से कनेक्ट कर सकते हैं. इसलिए अपने फोन की सेटिंग में जाकर 'ऑटो-जॉइन' फीचर को बंद कर दें. इससे आपका डिवाइस आपकी मर्जी के बिना किसी भी नेटवर्क से नहीं जुड़ेगा.

बैकग्राउंड में चल रहे ऐप्स पर रखें नजर

हमारे फोन में कई ऐसे ऐप्स होते हैं, जो इस्तेमाल न होने पर भी इंटरनेट का इस्तेमाल करते रहते हैं और चुपचाप डेटा भेजते रहते हैं. पब्लिक वाई-फाई पर यह खतरनाक हो सकता है. कोशिश करें कि ऐसे ऐप्स का इस्तेमाल करें जो बैकग्राउंड डेटा को रोक सकें. इससे सिर्फ वही ऐप इंटरनेट चलाएगा जिसे आपने खुद खोला है, जिससे आपकी जानकारी लीक होने का खतरा काफी कम हो जाएगा.

ब्राउजिंग को रखें पूरी तरह सीक्रेट

आप इंटरनेट पर कौन सी वेबसाइट खोल रहे हैं, इसे भी पब्लिक नेटवर्क पर कोई दूसरा देख सकता है. इससे बचने के लिए अपने ब्राउजर की सेटिंग में जाकर 'DNS-over-HTTPS' को ऑन कर दें. यह आपकी ब्राउजिंग को एक सुरक्षा कवच दे देता है. इससे हैकर्स आपको किसी फर्जी वेबसाइट पर नहीं भेज पाएंगे और आपकी लॉगिन डिटेल्स भी सुरक्षित रहेंगी.

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लैपटॉप के लिए बनाएं एक अलग ट्रैवल अकाउंट

अगर आप लैपटॉप लेकर सफर कर रहे हैं, तो अपने मेन अकाउंट के बजाय एक नया ट्रैवलर अकाउंट बना लें. इस प्रोफाइल में कम से कम जानकारी रखें. खुदा न खास्ता अगर कोई आपके डिवाइस तक पहुंच भी जाए, तो उसे आपकी जरूरी फाइल्स और निजी डेटा नहीं मिलेगा. यह तरीका आपके सेंसिटिव डॉक्यूमेंट्स को सुरक्षित रखने में काफी मदद करता है.

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