नीला समंदर, सफेद रेत और चारों तरफ फैली प्राकृतिक सुंदरता.. अंडमान निकोबार की सैर करना हर किसी का सपना होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंडमान की इसी खूबसूरती के बीच एक ऐसी जगह भी है जहां कदम रखना तो दूर, उसके करीब जाने की कोशिश भी आपको जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकती है? दरअसल, हम बात कर रहे हैं नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड (North Sentinel Island) की. यह भारत का वो Forbidden यानी प्रतिबंधित इलाका है जहां जाने की गलती आपको भारी जुर्माना और कानूनी मुसीबत में डाल सकती है. तो चलिए जानते हैं, क्यों इस आइलैंड को दुनिया की सबसे खतरनाक जगहों में गिना जाता है और यहां पर्यटकों की एंट्री पूरी तरह बंद क्यों है.
एडवेंचर के शौकीनों के लिए यह जान लेना बेहद जरूरी है कि इस द्वीप की खूबसूरती सिर्फ दूर से देखने के लिए भी नहीं है. भारत सरकार ने 'अंडमान और निकोबार (आदिम जनजाति संरक्षण) नियम, 1956' के तहत इस पूरे इलाके को सील कर रखा है. नियम इतने सख्त हैं कि द्वीप के चारों ओर 9 किमी के दायरे में भटकना भी पूरी तरह वर्जित है. इस सुरक्षा घेरे की निगरानी का जिम्मा भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल (Coast Guard) के पास है, जो यहां चौबीसों घंटे पहरा देते हैं. अगर कोई भी व्यक्ति रोमांच के चक्कर में या गलती से इस सीमा को लांघने की कोशिश करता है, तो उसे तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाता है. यहां अनधिकृत प्रवेश न केवल आपकी जान जोखिम में डालता है, बल्कि इसके लिए आपको भारी जुर्माने के साथ सख्त कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ेगा.
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तीरों की बारिश और जान का खतरा
यहां जाने पर पाबंदी सिर्फ कानूनी वजहों से नहीं है, बल्कि यह आपकी जान की सुरक्षा से भी जुड़ा है. नॉर्थ सेंटिनल द्वीप पर 'सेंटिनली' जनजाति रहती है, जो हजारों सालों से बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटी हुई है. ये लोग किसी भी बाहरी व्यक्ति का हस्तक्षेप पसंद नहीं करते. इतिहास गवाह है कि जब भी किसी ने इस द्वीप पर कदम रखने की कोशिश की, इन आदिवासियों ने तीरों और भालों से उन पर जानलेवा हमला कर दिया. यहां जाना मौत को सीधी दावत देने जैसा है.
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क्यों जरूरी है यह प्रतिबंध?
यह पाबंदी न केवल आपकी जान बचाने के लिए है, बल्कि इन आदिवासियों के अस्तित्व को बचाने के लिए भी है. सेंटिनली जनजाति के पास आधुनिक बीमारियों (जैसे जुकाम या बुखार) से लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) नहीं है. एक छोटी सी मानवीय बीमारी भी पूरी जनजाति का खात्मा कर सकती है. इसीलिए, सरकार इन लोगों के संरक्षण के लिए इस द्वीप की घेराबंदी करके रखती है.