घूमने-फिरने का शौक किसे नहीं होता, लेकिन अक्सर हमारी यात्राएं अनजाने में ही प्रकृति पर भारी पड़ जाती हैं. ज्यादातर लोग सोचते हैं कि 'इको-फ्रेंडली' यात्रा (Sustainable Travel) के लिए बहुत मेहनत या बड़े बदलावों की जरूरत है, पर हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. यह तो बस एक नई सोच और सफर के नए नजरिए को अपनाने जैसा है.
आपको बस यह जानना है कि कहां रुकना है और कैसे अपनी छोटी-छोटी आदतों से प्रकृति को बचाना है. इतना ही नहीं, जब आप एक जागरूक मुसाफिर बनते हैं, तो आपका सफर न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा होता है, बल्कि आपके लिए भी अधिक सुकून देने वाला और सस्ता हो जाता है.
1. उन अनुभवों को चुनें जो सीधे स्थानीय लोगों को फायदा पहुंचाएं
सफर के दौरान हम कहां अपना पैसा खर्च कर रहे हैं, इसका बड़ा असर पड़ता है. ऐसे टूर या गतिविधियों का हिस्सा बनें जो वहां के स्थानीय समुदायों द्वारा संचालित हों. उदाहरण के लिए, किसी बड़े कमर्शियल टूर के बजाय स्थानीय गाइड के साथ सैर पर निकलें या वहां के कारीगरों की वर्कशॉप में भाग लें. इतना ही नहीं, जब आप स्थानीय सहकारी समितियों द्वारा बनाए गए रास्तों पर चलते हैं, तो आपका पैसा सीधे उस जगह की संस्कृति और विरासत को बचाने में मदद करता है. इसके लिए आपको कोई अतिरिक्त मेहनत नहीं करनी पड़ती, बस आपका एक सही चुनाव ही काफी है.
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2. ऑफ-पीक चुनकर पर्यावरण को राहत दें
ज्यादातर लोग छुट्टियों के पीक सीजन में ही बाहर निकलते हैं, जिससे पर्यटन स्थलों पर क्षमता से अधिक बोझ बढ़ जाता है. इसके बजाय, अगर आप यह तय करें कि कैसे भीड़भाड़ से बचकर ऑफ-पीक समय में यात्रा करनी है, तो यह प्रकृति के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा. इससे न केवल वहां के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को सांस लेने का मौका मिलता है, बल्कि आपको भी कम दाम में बेहतर सुविधाएं और शांति मिलती है. यह छोटा सा फैसला पर्यावरण और आपकी जेब, दोनों के लिए फायदेमंद साबित होता है.
3. डिजिटल सुविधाओं का लें सहारा
आजकल तकनीक ने सफर को बहुत आसान बना दिया है. यात्रा के दौरान कागज की बर्बादी रोकने के लिए ज्यादा से ज्यादा डिजिटल टिकट और कैशलेस भुगतान का इस्तेमाल करें. इतना ही नहीं, डिजिटल पेमेंट अपनाने से आपको मुद्रित रसीदों या छोटे नोटों के झंझट से भी मुक्ति मिलती है, जो अक्सर कचरे में फेंक दिए जाते हैं. यह हैक न केवल आपके बैग का बोझ कम करता है, बल्कि संसाधनों की फिजूलखर्ची को रोकने में भी एक बड़ी भूमिका निभाता है.
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4. स्थानीय वास्तुकला वाले घरों या होमस्टे में ठहरें
ठहरने के लिए कहां रुकना है, यह चुनते समय सिर्फ लग्जरी सुविधाओं को न देखें. ऐसे स्थान चुनें जो वहां की पारंपरिक निर्माण शैली और स्थानीय सामग्री से बने हों. अक्सर पारंपरिक घर प्राकृतिक रूप से इस तरह बनाए जाते हैं कि वे मौसम के हिसाब से ठंडे या गर्म रहें, जिससे एसी या हीटर जैसी बिजली खपत वाली चीजों की जरूरत कम पड़ती है. यहां तक कि ऐसे घरों में रहकर आप उस जगह की असल जीवनशैली को करीब से महसूस कर पाते हैं और कम संसाधनों में एक बेहतर अनुभव प्राप्त करते हैं.
5. मौसम और मिट्टी से जुड़ा 'लोकल जायका' ही चखें
खाने-पीने का शौक रखने वालों के लिए यह सबसे बेहतरीन हैक है. हमेशा वही चीजें खाएं जो उस क्षेत्र में उस मौसम में प्राकृतिक रूप से उगती हों. जब आप बेमौसम की चीजों की मांग करते हैं, तो उन्हें दूर-दराज से लाने में बहुत ज्यादा कार्बन उत्सर्जन होता है. इतना ही नहीं, मौसमी और स्थानीय भोजन ज्यादा ताजा, पौष्टिक और स्वादिष्ट होता है. इस छोटे से चुनाव से आप न केवल वहां के किसानों की मदद करते हैं, बल्कि पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचाते हैं.